अब तक 6 कन्फर्म मरीज / कैंप-2 में फिर मिला डेंगू का 1 संभावित मरीज, पहले मिले मरीज को डेंगू की पुष्टि

जिला अस्पताल के जिस वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए बनाया था, उसे अब डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व किया गया है। यहां कुल 6 बेड लगाए गए हैं। जिला अस्पताल के जिस वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए बनाया था, उसे अब डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व किया गया है। यहां कुल 6 बेड लगाए गए हैं।
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जिला अस्पताल के जिस वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए बनाया था, उसे अब डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व किया गया है। यहां कुल 6 बेड लगाए गए हैं।जिला अस्पताल के जिस वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए बनाया था, उसे अब डेंगू मरीजों के लिए रिजर्व किया गया है। यहां कुल 6 बेड लगाए गए हैं।

  • एनएस-1 पॉजिटिव आने के बाद संभावित मरीज जिला अस्पताल में भर्ती
  • कैंप इलाका डेंगू का हॉटस्पॉट बन रहा, प्रशासन हुआ अलर्ट

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

भिलाई. कैंप-2 के संतोषी पारा में शुक्रवार को फिर डेंगू का एक संभावित मरीज मिला है। इस बार यहां की 13 वर्षीय बालिका उसकी चपेट में आई है। रैपिड किट से जांच में एनएस-1 पॉजिटिव आने के बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सीबीसी रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 86 हजार आई है। 
गुरुवार काे यहां की विवेकानंद कॉलोनी में डेंगू की जो संभावित महिला मिली थी, एलाइजा रिपोर्ट में उसे डेंगू होने की पुष्टि हुई है। कन्फर्मेशन के लिए बालिका का भी एलाइजा टेस्ट कराया गया है। बालिका जिला अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में और महिला चिंहित डेंगू वार्ड में भर्ती है। महिला की प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रही है। गुरुवार की सुबह उसकी प्लेटलेट्स 90 हजार थी। 24 घंटे में 27 हजार कम होकर 63 हजार पहुंच गई है। महिला की स्थिति फिलहाल सामान्य बनी हुई है। इस महिला के पॉजिटिव आने से पहले वार्ड-25 संतोषी पारा में डेंगू का पांच कंफर्म केस मिला है। इधर निगम और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
रविवार को बुखार, पांच दिनों बांद जांच
13 वर्षीय इस बच्ची को रविवार को बुखार आया था। सोमवार को वह पास के ही डॉ. तिवारी से दवा ली थी। आराम नहीं हुआ तो अगले दिन मंगलवार को डां. त्रिपाठी को दिखाई। इन्हीं की सलाह पर दो दिन बार बैकुंठधाम पहंची जहां से उसे सुपेला अस्पताल भेज दिया गया। जहां जांच कराई।
संक्रमितों के घर से गुजरती रही बच्ची
संतोषी पारा में अब तक मिले छह कंफर्म मरीजों की तरह नया संभावित मरीज भी बाहर कहीं आई-गई नहीं है। उसने बताया कि वह उसके यहां जिस घर में चार कंफर्म केस मिले, उसी के बगल में संचालित किराना स्टोर से घरेलू सामान लेने आती-जाती रही है। परिवार का कोई भी कहीं नहीं गया है।
बचपन में ही मां की मौत, कुल पांच लोग
पीड़ित बच्ची की बड़ी बहन ने बताया कि जब वह छोटी थी, तभी उनके मां की मौत हो गई। पिता को पैरालाइसिस अटैक पड़ गया है। सभी चार बहन और एक भाई है। बड़ी बहन ससुराल चली जाने से घर में कुल पांच सदस्य हैं। उनमें सबसे छोटी बहन डेंगू से पीड़ित हुई है। कफर्म रिपोर्ट नहीं आई है।
छठवां कंफर्म मरीज और नया संभावित केस, जिला अस्पताल में भर्ती
डेंगू का छठवां कंफर्म और नया संभावित मरीज जिला अस्पताल में ही भर्ती है। वहां के विशेषज्ञ डॉ. प्रोटोकॉल अनुसार फ्लूड चढ़ाने के साथ ही सिमेटोमेटिक ट्रीटमेंट कर रहे हैं। नए केस को कंफर्म करने एलाइजा टेस्ट कराया गया है। पहले इसकी कंफर्म जांच केवल मेडिकल कॉलेज में ही होती थी। अब जिला अस्पताल में भी होने लगी है।
चिंताजनक: सरकारी से छुट्‌टी लेकर निजी अस्पताल पहुंचा कन्फर्म मरीज
कैंप-2 के संतोषी पारा में मिला डेंगू का पांचवां कंफर्म मरीज शुक्रवार को जिला अस्पताल से निकलकर निजी अस्पताल में भर्ती हो गया है। उसके पिता ने इसका कारण बेटे की प्लेटलेट्स दिन पर दिन घटने को बताया है। कहा कि दो दिनों के इलाज से उनके इकलौते बेटे की स्थित में सुधार नहीं हुआ, इसलिए वह अपनी मर्जी से निजी अस्पताल चले गए हैं। उनके बेटे की प्लेटलेट्स तीन दिनों में घटते हुए 36 हजार पहुंच गई है। सीएस पी बाल किशोर ने बताया कि संक्रमण के शुरूआती दिनों में डेंगू मरीजों की प्लेटलेट्स घटते जाती है। लेकिन अगले दिनों में स्थिर होकर पुन: तेजी से बढ़ने लगती है। वेट एंड वॉच करते हुए सिमेटोमेटिक ट्रीटमेंट ही डेंगू का इलाज है। लेकिन उनके विशेषज्ञ यह बात जिले के पांचवें कंफर्म केस के पिता को नहीं समझा पाए हैं। जिला अस्पताल में मुफ्त इलाज हो सकने के बाद भी एक पिता कोे निजी अस्पताल पेड ट्रीटमेंट के लिए जाना पड़ा है। 
शुरू में प्लैटलेट कम होती है, अगले दिनों में  उतनी तेजी से बढ़ती भी है..
"डेंगू पीडितों की शुरूआती दिनों में प्लेटलेट्स कम होते जाती है। इसका मतलब यह नहीं की पीड़ित खतरे में आ गया है। आगे चलकर उसकी प्लेटलेट का गिरना स्थिर  हो जाता  है। फिर तेजी से बढ़ने लगती है। इस क्रम उसका सिमटोमेट्रिक ट्रीटमेंट कराना होता है। हमारे पास इसके लिए चार विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। सभी जगह इसके ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल एक सामान है।"
-डॉ. पी बालकिशोर, सीएस, जिला अस्प्ताल

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