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इस बार भी नीट में छाए हमारे होनहार:पहली बार 26 छात्रों को मिले 600 से ज्यादा अंक, कटऑफ बढ़ने के बाद भी 150 की सीट कन्फर्म

भिलाई5 दिन पहले
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प्रांजल उपाध्याय
  • टॉपर्स टॉक : डॉक्टर बनकर मिटाना चाहते हैं देश में बेटे-बेटियों के बीच का फर्क, करेंगे सेवा

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) में भिलाई के होनहारों ने एजुकेशन हब का दबदबा कायम रखा। प्रांजल उपाध्याय ने 720 में से 700 अंक हासिल कर ऑल इंडिया में 90वीं रैंक हासिल किया। ट्विनसिटी के 26 से ज्यादा छात्रों ने नीट की परीक्षा में 600 से अधिक अंक हासिल किए। एक्सपर्ट्स की माने तो इस बार कटऑफ लगभग 550 नंबर तक जाएगा।

बावजूद दुर्ग-भिलाई के करीब 150 बच्चों को मेडिकल की सीट मिल जाएगी। इस बार कोरोनाकाल में बच्चों को पढ़ने का मौका मिला। बताते हैं कि 30% से ज्यादा बच्चे इस बार क्वालिफाई किए हैं। भास्कर से बातचीत के दौरान टॉपर्स ने बताया कि वे इस प्रोफेशन में आकर ग्रामीणों और गरीबों की सेवा करना चाहते हैं।

माता-पिता की तरह मरीजों की सेवा करना चाहते हैं

प्रांजल उपाध्याय, अंक: 720/700

ऑल इंडिया में 90वीं रैंक हासिल करने वाले प्रांजल ने कहा कि छोटे शहर से यहां आकर पढ़ाई करने में थोड़ी दिक्कत हुई। लेकिन माता-पिता के प्रेरणा के अलावा टीचर्स और दोस्तों के सपोर्ट से पढ़ाई करना आसान हो गया। लॉकडाउन के समय को पढ़ाई में इस्तेमाल किया। डॉक्टर बनकर माता-पिता की तरह निस्वार्थ सेवा करना चाहता हूं।

गांव से पढ़ने भिलाई आया पापा का सपना पूरा करूंगा

पुरुषोत्तम साहू, अंक: 720 / 655

पुरुषोत्तम साहू ने बताया कि वे अपने पापा का सपना पूरा करना चाहते हैं। माता-पिता किसान है। गांव में पढ़ाई नहीं होती थी। मार्गदर्शन देने वाला भी कोई नहीं था। इस कारण भिलाई आया। पापा चाहते थे कि वे खुद डॉक्टर बने, लेकिन किसी कारण से वे नहीं पढ़ सके। इसलिए अब बेटा डॉक्टर बनकर उनके सपनों को पूरा करेगा। भिलाई में जो गाइडेंस मिला, वही काम आया।

मॉक टेस्ट ज्यादा से ज्यादा अटेंड करने का मिला फायदा

अफ्शा कुरैशी, अंक: 720/646

सेक्टर-2 की रहने वाली अफ्शा कुरैशी का कहना है कि लॉकडाउन में पढ़ने का फायदा मिला। ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट अटेन किया। कोरोना का टेंशन तो था ही लेकिन पापा-मम्मी ने जो सपोर्ट किया उसके कारण ही मैंने इस एग्जाम को क्वालिफाई किया। डॉक्टर बनकर ग्रामीणों और गरीबों की सेवा करना चाहती हूं। मेडिकल सेक्टर में संभावनाएं ज्यादा है।

चाचा-चाची डॉक्टर हैं, उनकी तरह मुझे भी बनना है

प्रांजल ठाकुर, अंक: 720/641

प्रांजल का कहना है कि पढ़ाई के दौरान कई बार ऐसा मौका भी आया जब कोरोना की वजह से डिप्रेशन ही महसूस हुई। लेकिन माता-पिता के सपोर्ट ने मेरी अच्छी मदद की और मैं बेहतर तरीके से पढ़कर सफल हो सका। चाचा-चाची मेरे डॉक्टर है। उन्हें देख डॉक्टर बनने का मन किया। कोरोनाकाल में पढ़ने का ज्यादा वक्त मिला। यह मेरे लिए एडवांटेज था।

बार-बार रिवीजन किया, इससे मिली सफलता

विदित कुमार सोनी, अंक: 720/ 637

मरोदा सेक्टर के रहने वाले विदित कुमार सोनी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान घर में रहकर ज्यादा रिविजन करने का फायदा मिला। एग्जाम काफी आसान था, जिसमें स्कोर कर सका। शुरू से ही साइंस में इंट्रेस था जिसके कारण इस फिल्ड में आया।

गांव में डॉक्टर नहीं, लोगों की करूंगी सेवा

अर्पिता वर्मा, अंक: 720/621

रिसाली की अर्पिता वर्मा कहती है कि डॉक्टर बनकर बड़े शहरों में जाना सभी का सपना होता है, लेकिन मैं डॉक्टर बनकर गांव में जाऊंगी और वहां पर बेटा-बेटी के बीच के फर्क को खत्म करुंगी। लोगों को अवेयर करूंगी कि बेटा और बेटी दोनों सामान है।

एसटी कैटेगरी में नितेश को देश में 45वां रैंक

भिलाई में रहकर पढ़ने वाले नितेश भगत ने एसटी कैटेगरी में ऑल इंडिया में 45वां रैंक हासिल किया है। नितेश जशपुर के रहने वाले हैं। नितेश ने 720 में से 613 अंक हासिल किया। नितेश ने बताया कि जशपुर में पढ़ाई में काफी दिक्कत होती थी, इसलिए गांव में ही अलग घर लेकर पढ़ाई की। कोचिंग में सभी डाउट्स को क्लियर करते थे। समर कोर्स के लिए वे भिलाई आए, उन्हें यहां की पढ़ाई पसंद आई तो यहीं कोचिंग ज्वाइन किया। आज एसटी कैटेगरी में ऑल इंडिया में 45वां रैंक हासिल कर लिया।

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