लॉकडाउन का असर:जिले में 45 बड़े सहित 4963 उद्योग; 90 फीसदी फैक्ट्रियां बंद, क्योंकि कच्चा माल नहीं मिल रहा

भिलाई6 महीने पहले
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ट्वनिसिटी का औद्योगिक क्षेत्र, जहां सबसे ज्यादा उद्योग संचालित हो रहे हैं। इस समय इन फैक्ट्रियों में वीरानी छाई हुई है। कोई काम नहीं हो रहा। - Dainik Bhaskar
ट्वनिसिटी का औद्योगिक क्षेत्र, जहां सबसे ज्यादा उद्योग संचालित हो रहे हैं। इस समय इन फैक्ट्रियों में वीरानी छाई हुई है। कोई काम नहीं हो रहा।
  • 6 अप्रैल से जिले की सीमाएं सील, तब से बंद हैं ये उद्योग

कोरोना की दूसरी लहर ने फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन रोक दिया है। हालात यह है कि 90 प्रतिशत उद्योग बंद हो गए हैं। 6 अप्रैल के बाद से जिले में यह हालात हैं। इसकी मुख्य वजह ऑक्सीजन की सप्लाई का न होना बताया जा रहा है। उद्योग विभाग के मुताबिक जिले में 40 बड़ी सहित जिले की 4466 फैक्ट्रियां बंद हैं।

इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले 50 हजार से ज्यादा लोग अपने घरों पर बैठ गए हैं। सबको जमा-पूंजी से परिवार का गुजर-बसर करना पड़ रहा है। कोरोना काल में इन फैक्ट्रियों में ऑक्सीजन सप्लाई भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा संक्रमण का असर इन फैक्ट्रियों तक भी पहुंच गया है। संचालक से लेकर यहां काम करने वाले श्रमिक व उनके परिवार भी प्रभावित हो गए हैं। कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा बाहर से आवाजाही वाले उपकरण भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। न ऑर्डर है, न ही प्रोडक्शन। उद्योगों में केवल फूड व अन्य अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े उद्योग ही संचालित हो रहे हैं। वहां भी कम श्रमिक ही काम कर रहे।

फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन ठप होने की ये तीन भी वजह

रॉ- मटेरियल के दाम का बढ़ना : फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले रॉ- मटेरियल के दाम में 16 से 50 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। मटेरियल बीएसपी और जिंदल से लेकर फिनिश्ड प्रोडक्ट उन्हीं को बेचते हैं।

हार्ड-वेयर की दुकानें बंद

फैक्ट्री बड़ी हो या छोटी, वहां रोज का रोज छोटी-छोटी चीजों जैसे, नट-बोल्ट, बेरिंग, हैक्सा ब्लेड आदि की जरूरत होती है। लॉकडाउन में हार्ड-वेयर की दुकानें बंद होने से ये चीजें फैक्ट्रियों को नहीं मिल रहा। मालिक व स्टॉफ सभी संक्रमित : जिले में संक्रमण की दर 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाने से चूंकि जिले का हर दूसरा व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो गया है। ऐसे में फैक्ट्री संचालक और स्टॉफ कोरोना से संक्रमित हैं।

बैंकों से लिया कर्ज चुकाना चुनौती बना

फैक्ट्रियां बंद होने से संचालकों द्वारा लिया गया कर्जा चुकाना चुनौती बन गया है। फैक्ट्री शुरू करने के लिए जो लोन लिया था, वह तो है ही। कोरोना की पहली लहर में राहत के नाम पर जो कर्ज लिया था। वह भी उनके ऊपर बोझ है।

मुख्यमंत्री से ऑक्सीजन सप्लाई की डिमांड

प्रदेश के बड़े और छोटे उद्योग संचालकों ने गुरुवार को सीएम संघ वर्चुअल बैठक कर फैक्ट्रियों को 20 % ऑक्सीजन देने की मांग की। इसके लिए सबने कोरोना के एक्टिव मरीजों की घटती संख्या का हवाला दिया। उद्योगों के नहीं चलने से पसमस्या खड़ी हो सकती है।

90% उद्योग बंद हो गए बिगड़ेंगे आर्थिक हालात

जिले के छोटे-बड़े 90 % उद्योग बंद हो गए हैं। ऐसे में बैंकों से लिया कर्जा चुकाना चुनौती बन गया है। इस साल अब तक कोई राहत नहीं मिली। मुख्यमंत्री से मोरिटेरियम पीरियड दिलाने की मांग की है। आर्थिक हालात बिगड़ेंगे।

- केके झा, अध्यक्ष, एमएसएमई उद्योग संघ भिलाई

दुर्ग में अभी करीब 5 हजार उद्योग, प्रोडक्शन रुका

जिले में छोटे-बड़े उद्योगों की संख्या करीब 5 हजार हैं। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश के बाद ही उनको ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी गई है। बैठक में संचालकों ने 20 प्रतिशत ऑक्सीजन देने की मांग की है। संचालनालय से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, हम लोग उसका पालन सुनिश्चित करेंगे। अभी निर्देश नहीं मिले हैं। शासन का जैसे निर्देश हमें मिलेगा, उसके हिसाब से ही आगे की तैयारियां की जाएगी।

-साइमन इक्का, जनरल मैनेजर, डीआईसी दुर्ग

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