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तैयारी जो बर्बाद हो गई:17 लाख खर्च कर कोरोना मरीजों के लिए 55 बोगियां 444 बेड तैयार किए, इस्तेमाल ही नहीं

भिलाईएक महीने पहले
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कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 17 लाख रुपए खर्च कर रेलवे ने 55 बोगियों में 444 बेडेड आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। 7 महीने पहले इसे तैयार किया गया। पहले दुर्ग के माल धक्का और बाद में मरोदा के यार्ड में खड़ा कर छोड़ दिया गया। 2 सीआईएसएफ के दो जवानों की ड्यूटी लगाई गई, लेकिन अनदेखी के चलते खिड़कियों में लगी जालियां जहां चोरी हो चुकी है। वहीं रखरखाव के अभाव में लगाए गए उपकरण कबाड़ में तब्दील होने लगे हैं। हमारा मकसद तैयारी पर सवाल उठाना नहीं है.. सिर्फ हालात बयां करना चाहते हैं..

लगाए बेड पर जम गई धूल की मोटी परत
रख-रखाव के अभाव के कारण रेलवे द्वारा बनाए गए आइसोलेशन वार्डों के बेडों पर धूल की परत जम गई है। खुली खिड़कियों से ली गई तस्वीर में ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है। कुछ बेडों पर सफेद चद्दर और भी इंतजाम नजर आया है, पर ज्यादातर कोचों में लगे बेड धूल फांकते दिखाई दे रहे हैं।

खिड़कियों पर लगी जालियां चोरी
डॉक्टरों और आस-पास के लोगों की सुरक्षा के लिए कोचों की हर खिड़की पर सेलो टेप से मच्छरदानी वाले कपड़े की जाली लगाई गई थी। इसलिए ताकि जब मरीज भर्ती किए जाए, तो वह बाहर थूक न सके। मच्छरों को अंदर आने से रोका जा सके, लेकिन जरूरी जाली चोरी हो गई है।

ट्रेन में अधूरा ऑक्सीजन सिलेंडर
ऑक्सीजन सिलेंडरों के पास एनएवी मास्क जरूर होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत ऑक्सीजन दिया जा सके। जब कोच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया गया। तब ऐसी व्यवस्था ही बनाई गई थी, लेकिन आज ऑक्सीजन सिलेंडर तो हैं, पर एनएवी मास्क नहीं दिखाई हैं।

कुछ ऐसा ही हाल इन उपकरणों का भी हुआ
वेंटिलेटर:
कोविड अस्पताल कचांदुर में 6 वेंटिलेटर खरीदी गए, करीब 18 लाख खर्च हुए। दो दिन ही में अस्पताल बंद कर दिया गया।
एबीजी मशीन: ऑक्सीजन की सटीक मात्रा बताने वाली 9 लाख की एबीजी मशीन जिला अस्पताल के स्टोर में पड़ी रही। 400 मौतों के बाद इसे सुधारा गया।
ट्रू-नॉट लैब: 11 लाख रुपए खर्च कर शास्त्री अस्पताल सुपेला के ट्रू-नॉट लैब का सेट-अप तैयार किया गया। दो महीने बाद तक लैब शुरू नहीं हो पाया। केस कम होने के बाद अब इसे शुरू किया गया।
ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर: खुद ऑक्सीजन बनाने की क्षमता, नेबुलाइजर और पल्स रेट बताने वाली 6.40 लाख की मशीन स्टोर में पड़ी थी। 8 ऐसी मशीनें थी, अब इसका उपयोग शुरू हुआ।

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