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पेंशन के नाम पर फर्जीवाड़ा:5554 लोग ऐसे.. जो हैं ही नहीं, पर उनके नाम से 5 साल तक जारी होती रही पेंशन

भिलाई2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • 11 करोड़ से अधिक की धांधली से जुड़ा है मामला, सत्यापन के बाद खुलासा
  • आधार कार्ड लिंक करने के दौरान अंदेशा हुआ, जांच की तो ये खुलासा

भिलाई और दुर्ग में पेंशन वितरण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। दोनों शहरों में 5554 ऐसे पेंशनधारी मिले हैं जो अन्य राज्यों से भी पेंशन ले रहे हैं। कई पेंशनधारी की मौत भी हो चुकी है। बावजूद उनके परिजन सालों से पेंशन उठा रहे हैं। इन फर्जी पेंशनधारियों का खुलासा पेंशन रोके जाने के बाद हुआ है। भिलाई निगम ने इस माह 4350 लोगों का पेंशन रोककर खाता बंद कर दिया है।

वहीं दुर्ग निगम ने भी 1204 लोगों की लिस्टिंग की है। जिनका पेंशन रोककर खाता बंद करने की तैयारी की जा रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा इस पूरे मामले को लेकर निकायों से सत्यापन कराया गया। इसमें मुख्य रूप से आधार को हितग्राहियों को जारी कार्ड से सत्यापित कराया गया। इसमें इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। केंद्र व राज्य शासन द्वारा संचालित योजनाओं में गरीब व जरूरतमंदों को 350 से लेकर 650 रु. प्रति महीने के जारी किए जाते हैं।

अजब ही मामला: कुछ मामलों में हितग्राही की मौत हो चुकी, इसमें से कुछ नाम फर्जी भी निकले

शिविर लगाकर सत्यापल में सामने आई गड़बड़ी : आधार लिंक में पकड़ी 2016 से पेंशनधारियों का अनिवार्य रूप से आधार लिंक कराया जा रहा है। 2016 से 2020 तक निगम ने आधार लिंक कराने के लिए कैंप लगाए। इस दौरान जो वास्तविक हितग्राही थे उन्होंने आधार से एकाउंट को लिंक कराया। लेकिन जो फर्जी है वो आधार लिंक नहीं करा पाए। अगर कराते तो उनकी गड़बड़ी पकड़ी जाती।
हितग्राही की मौत

कई ऐसे भी मामले थे कि पेंशनधारी की मौत के बावजूद उनके परिजन पेंशन ले रहे थे। लिंक कराने की बात सामने आई तो वो सामने ही नहीं आए। कई ने पार्षद के पास आवेदन करके खाता बंद करने की गुजारिश की। लेकिन अधिकांश ने इसकी सूचना नहीं दी। कई पार्षदों ने तो यह भी तर्क दे दिया कि अगर पेंशन मिल रहा है तो बंद क्यों करवा रहे हो? ये चीजें जांच में भी सामने आ चुकी है। इन सभी के जारी कार्ड को निरस्त करने की प्रक्रिया की जा रही है।
दूसरे स्टेट के रहवासी बन गए हैं हितग्राही

छत्तीसगढ़ में सन् 1980 के दशक से पेंशन योजना 60 रुपए से शुरू हुई जो अब 350 रुपए तक पहुंची है। जबकि पड़ोसी राज्यों व अन्य राज्यों के लोग यहां निवासरत है। कई ऐसे भी हितग्राही थे जो छत्तीसगढ़ के साथ-साथ साऊथ, एमपी व महाराष्ट्र में भी पेंशन ले रहे थे। इसीलिए छत्तीसगढ़ में आधार लिंक कराने सामने नहीं आए। बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही है, जो दूसरे राज्य के रहने वाले हैं, जिन्होंने जिले में पात्रता हासिल कर ली।
छत्तीसगढ़ में पेंशन के लिए चल रही 6 योजनाएं, इन योजनाओं के तहत मिलती है 350 से लेकर 650 रुपए की राशि प्रति माह

  • वृद्धा पेंशन: 60 से 79 वर्ष के पेंशनधारियों को 350 व 80 से अधिक वर्ष को 650 रुपए।
  • दिव्यांग पेंशन: 80% से ज्यादा दिव्यांग हितग्राहियों को 500 रु.
  • विधवा पेंशन योजना: 350 रुपए प्रति महीना पेंशन मिलती है।
  • सामाजिक सुरक्षा: गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बुजुर्गों को 350 रुपए।
  • सीएम पेंशन योजना: बुजुर्गों को 350 रुपए प्रति माह पेंशन।
  • सुखद सहारा पेंशन: तलाकशुदा, परित्यक्ता को 350 रुपए प्रति महीना।

सिर्फ एक योजना में ही 5 साल में फर्जी हितग्राहियों को बांटे 11 करोड़ रुपए

नगर निगम भिलाई में 4350 और दुर्ग निगम में 1204 संदिग्ध हितग्राही है। जिन्हें सालों से पेंशन दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर वृद्धावस्था पेंशन हितग्राहियों आंकलन करें तो करोड़ों रुपए की धांधली साफ उजागर हो रही है। वृद्धावस्था के तहत एक हितग्राही को 350 रुपए प्रति महीने के हिसाब से दुर्ग-भिलाई के 5554 संदिग्ध हितग्राहियों को हर महीने 19,43,900 रुपए पेंशन दिया जा रहा है।

एक साल में 2 करोड़ 33 लाख 26800 रुपए होते हैं। अगर पांच साल के पेंशन वितरण की बात करें तो 11 करोड़ 66 लाख 34000 रुपए इन संदिग्धों को पेंशन के रूप में दिए गए हैं। निगम के अधिकारी यह भी बताते हैं कि कई ऐसे भी संदिग्ध हितग्राही है जो 10 से 15 साल से पेंशन ले रहे हैं। अब उनका खाता बंद कर दिया गया है। अब इस मामले में नए सिरे से जांच भी की जा रही है। ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।

भिलाई में ही साढ़े 4 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की जानकारी मिल चुकी

^पेंशनधारियों को आधार से लिंक कराना अनिवार्य है। साढ़े 4 हजार से ज्यादा लोग भिलाई में संदिग्ध मिले हैं। दुर्ग में 1 हजार से ज्यादा हितग्राही संदिग्ध है। भिलाई ने ऐसे लोगाें का पेंशन रोक दिया है। किसी भी फर्जी व्यक्ति को पेंशन मिले। इसके लिए हम सख्ती बरत रहे हैं। जानकारी के बाद निकायों को निर्देशित किया गया है कि वे पुन: जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। ताकि ऐसे सारे हितग्राहियों की पात्रता को निरस्त किया जा सके। वर्ष 2016 के बाद के ये सभी हितग्राही हैं। अन्य पात्र हितग्राहियों का भी निकायों के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है। -डीपी ठाकुर, डिप्टी डायरेक्टर, समाज कल्याण विभाग, दुर्ग

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