बढ़ रहा खतरा / जून के पहले 15 दिनों में 57 मरीज मिले, दूसरे पखवाड़े में पॉजिटिव की संख्या 91 तक पहुंची

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  • जून में कोरोना की रफ्तार 63% तेज, मार्च से लेकर मई तक मरीजों की संख्या सिर्फ 13 थी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

भिलाई. जून के अंतिम सप्ताह तक कोरोना वायरस की रफ्तार शुरूआती 15 दिनों की तुलना में 63% तेज हो गई है। 1 जून से 15 जून के भीतर जिले में कोरोना के 57 पॉजिटिव मरीज मिले थे। 16 जून से 30 जून के भीतर 91 मीरज मिल गए हैं। इस माह की शुरूआत से ही कोरोना ने अपना दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस और मेडिकल स्टॉफ जो भी इसके जद में आया वह संक्रमित हो गया है। 25 मार्च को जिले में कोरोना का पहला मीरज खुर्सीपार में मिला था। तबसे लेकर मई तक यहां केवल 13 मरीज ही थे, लेकिन जून की 30 तारीख आते-आते पॉजिटिव मरीजों का आकड़ा 161 पहुंच गया है। इसमें से 148 मरीज सिर्फ जून में आए हैं। 
अच्छी बात यह कि इलाज के बाद सभी संक्रमितों में से 94 की छुट्टी भी हो गई है। एम्स में पहले से भर्ती जिले के एक और मरीज की रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव आई है। इस तरह से जिले में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 69 हो गई है।  इधर, क्वारेंटाइन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक जगहों में मास्क नहीं पहनने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं।

चुनौती: जिले में अब जांच करने का लोड तीन गुना बढ़ गया
मरीजों की संख्या बढ़ने से समस्या यह कि उनके क्लोज कांटेक्ट में आने वालों की जांच करनी पड़ रही है। एक-एक पॉजिटिव मरीज के अनुसार 10 से 20 लोगों के सैंपल लेने पड़ रहे हैं। बोरसी की जो दो किशोरियां पॉजिटिव आई। स्वास्थ्य विभाग को उनके परिवार से 30 लोगों को सैंपल लेकर जांच करानी पड़ रही है। जांच लोड तीन गुना बढ़ गया है। 

परेशानी: ट्रेंसिंग करने वाले स्टाफ पर लाेड भी बढ़ रहा
केस बढ़ने के साथ ही उन्हें अस्पताल में शिफ्ट करने के साथ ही कांटेक्ट ट्रेसिंग करने वाले स्टॉफ पर भी लोड बढ़ गया है। जैसे-जैसे पॉजिटिव केस आ रहे हैं, उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त कर्मचारियों को लगाया है, लेकिन काम खतरे से भरपूर होने के नाते उन्हें भी संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। 

इनका हौसला न तोड़ें : जिले में कोरोना से जंग को कमजोर कर रही ये तीन परेशानियां...
1. कोरोना वारियर्स का भय: कोरोना को लेकर वारियर्स में भय एक बड़ी समस्या बन कर उभर रहा है। निजी अस्पतालों के डॉक्टर और स्टॉफ काम छोड़ने लगे हैं। यह सिलसिला जारी रहा तो दिल्ली और मुंबई की तरह आने वाले दिनों हमारे शहर के निजी अस्पताल भी डॉक्टर व स्टॉफ विहीन हो सकते हैं। 

2. क्रूर मकान मालिक: कोरोना काल में शहर के कुछ क्रूर मकान मालिक एक नई मुसीबत बन गए हैं। मरीजों की जान बचाने के क्रम में निजी अस्पताल का कोई कर्मचारी जैसे ही संक्रमित हो रहा है। वह उसको और अन्य कर्मचारियों को मकान से निकल जाने को कह रहे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

3. सर्वाइवर से भी कर रहे दुर्व्यवहार: कोरोना पॉजिटिव आने के बाद  संबधित से  पड़ोसी तक का व्यवहार बदल जाना भी चिंताजनक है। क्योंकि घर के मुखिया को इलाज के लिए अस्पताल जाते ही घर के सदस्य दाना-पानी के लिए तरस जा रहे हैं। उस घर के बच्चों को दूध देने तक से लोग कतराने लगे हैं। प्रतिबंध के बाद भी चेतावनी के साथ लोग विक्टिम का वीडियो वायरल कर रहे हैं। रिसाली के एक डॉक्टर ने कंप्लेन भी की है।

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