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विस्तारीकरण की तैयारी:एक्सपांशन में 61,999 करोड़ खर्च, इस साल से 23.5 एमटी हॉट मेटल का होगा उत्पादन

भिलाई10 महीने पहले
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  • बीएसपी सहित सेल की अन्य इकाइयों में पिछले 8 वर्षों में किया गया है खर्च

सेल ने बीएसपी सहित अपने विभिन्न इकाइयों के आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण परियोजना (एमईपी) के तहत बीते 8 वर्षों में 61,999 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। इसके बाद वर्तमान वित्त वर्ष से कंपनी का हाट मेटल का उत्पादन 17. 44 एमटी से बढ़कर 23.5 एमटी होने की उम्मीद है। इस टार्गेट के साथ काम शुरू किया गया है। सेल प्रबंधन ने अपनी 8 प्रमुख इकाइयों में विस्तारीकरण की योजना 2010-11 में शुरू की। उसे पूरा होने में लगभग 9 वर्ष लग गए। एक्सपांशन का सबसे बड़ा हिस्सा बीएसपी के खाते में था, वहीं प्रोजेक्ट को पूरा होने में 6 साल अतिरिक्त लगा। बीते वित्त वर्ष में एसएमएस-3 के कुछ कास्टर और कनवर्टर से उत्पादन शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया। एसएमएस-3 में अभी भी कुछ काम बाकी है। जानिए…किस वर्ष प्रोजेक्ट में कितना किया खर्च: वर्ष 2012 में 11021 करोड़, 2013 में 9731 करोड़, 2014 में 9890 करोड़, 2015 में 6840 करोड़, 2016 में 6034 करोड़, 2017 में  4938 करोड़, 2018 में 5130 करोड़, 2019 में 4303 करोड़ और 2020 में 4112 करोड़ का खर्च शामिल है।

प्रोजेक्ट में देरी से बढ़ रहा सेल पर कर्ज का बोझ
एक्सपांशन प्रोजेक्ट के लिए लिए कर्ज और प्रोजेक्ट में हुई देरी का असर कंपनी के बैलेंस शीट पर पड़ रहा है। कंपनी पर हर कर्ज बढ़ा है। वर्ष 2019-20 में ही कंपनी का कर्ज 54127 करोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व के वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 45170 करोड़ पर था।

कर्ज के साथ बढ़ रहा ब्याज, सैलरी बांटने में भी दिक्कत
सेल प्रबंधन को अपनी विभिन्न इकाइयों को ऑपरेट करने और कार्मिकों के सैलरी के भुगतान के लिए तक बैंक से कर्ज लेना पड़ रहा है। ब्याज का भुगतान भी हर साल बढ़ते ही जा रहा है। वित्त वर्ष 2020 में कंपनी 3487 करोड़ रुपए महज ब्याज में ही खर्च कर चुकी है।

एक्सक्लूसिव उत्पाद से तीन साल प्रॉफिट में इकाइयां
रेलपांत जैसे एक्सक्लूसिव स्टील उत्पाद से बीएसपी जैसी इकाइयों के कारण सेल तीन वर्षों से कंपनी को घाटे से उबारने में कामयाब रहा, लेकिन बाकी प्लांट के उत्पादों की मार्केट में डिमांड घटने से और पुराने लोन की वजह से कंपनी का कर्ज व ब्याज का आंकड़ा बढ़ रहा है।

ऊर्जा खपत घटी, कोक के रेट में आई कमी
बीएसपी सहित सेल प्रबंधन के लिए राहत भरी बात यह है कि उसकी इकाइयों में कोक रेट और ऊर्जा के खपत में कमी आती जा रही है वहीं सीडीआई में वृद्धि होती जा रही है। वर्ष 2015 में कोक रेट 513 था जो 2020 में घटकर 457 में पहुंच गया। इसी तरह सीडीआई 2015 में 34 प्रतिशत, 2020 में 76 प्रतिशत रहा। ऊर्जा खपत 2015 में 6.59 और 2020 में 6.47 प्रतिशत रहा। ब्लास्ट फर्नेस में उत्पादकता 2015 में 1.58 और 2020 में 1.80 के साथ 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

लेबर प्रोडक्टिविटी में भी इजाफा
एक अप्रैल की स्थिति में कंपनी में 69379 कर्मचारी काम कर रहे थे। एक साल में 2960 लोग रिटायर हुए। इसका असर लेबर प्रोडक्टिविटी पर पड़ा। 2014 में 278 टन क्रूड स्टील का उत्पादन था जो 2019-20 में बढ़कर 400 टन हो गया है।

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