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  • 95 Percent Beds In 100 bed Shastri Hospital For Two Years Because Doctors Do Not Want To See Rounds In The Morning To See Admitted Patients.

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ऐसा है हाल:100 बिस्तर के शास्त्री अस्पताल में दो साल से 95 प्रतिशत बेड खाली क्योंकि डॉक्टर नहीं चाहते कि भर्ती मरीज को देखने के लिए सुबह शाम राउंड लगाना पड़े

भिलाईएक महीने पहले
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  • कुल 12 डॉक्टर, पंजीयन रोजाना 200 मरीजों की, भर्ती मरीजों की संख्या 10 से भी कम

100 बेड के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला में पिछले 2 साल से एक साथ कभी 10 मरीज भर्ती नहीं रहे हैं। भर्ती करने के बाद मरीजों को दो टाइम सुबह और शाम देखना ना पड़े, इसलिए यहां के डॉक्टरों ने भर्ती करने लायक मरीजों को भर्ती नहीं किया। ऐसा तब भी जब दो विशेषज्ञ डॉक्टरों को मिलाकर यहां 12 डॉक्टरों की तैनाती और औसतन 200 की रोज ओपीडी है। भिलाई के प्रमुख शासकीय अस्पताल की ऐसी तस्वीर भास्कर पड़ताल में सामने आई है। 2018 में जब डेंगू फैला था, तब इस अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ गए थे। अब तो अमूमन सभी के सभी बेड खाली रहते हैं। डिलीवरी के केस हटा दें तो महीने में यहां भर्ती मरीजों की संख्या 12 से कम है। डेंगू से उबरने के बाद से अब तक ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी, जब यहां एक साथ 10 मरीज भर्ती रहे हैं। भास्कर ने जब इस पूरे मामले की जानकारी ली। डॉक्टरों व अन्य स्टॉफ से बात की, तब पता चला कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि डॉक्टरों को मरीजों के देखने के लिए लगातार राउंड लगाने की जरूरत न पड़े।

लापरवाही ऐसी की जिन्हें भर्ती किया जाना है, उन्हें ऑब्जरवेशन में रखा जा रहा
भिलाई के इस प्रमुख शासकीय अस्पताल में जिन मरीजों को कम से कम तीन दिनों के लिए भर्ती करने की जरूरत होती है, उन्हें बिना भर्ती किए डॉक्टर घंटा दो घंटा ऑब्जरवेशन में रहकर घर भेज देते हैं। अपनी सहूलियत के हिसाब से डॉक्टरों ने यहां ऐसी व्यवस्था बनाई है। मासिक आंकड़ा देखें तो हाल-फिलहाल यहां जितने मरीज भर्ती किए जाते हैं, उनसे कई गुना ज्यादा ऑब्जरवेशन में रखे जा रहे हैं। इसका परिणाम यह कि 2 साल पहले तक अस्पताल के सारे बेड भरे रहते थे, लेकिन आज उसके 95% बेड खाली हैं।

जबकि ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं
मरीजों को भर्ती किए बिना ऑब्जरवेशन में रखा जा रहा है, लेकिन ट्रीटमेंट प्रोटोकोल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मरीजों को भर्ती करने के बाद ही ऑब्जरवेशन में रखा जाता है। भर्ती मरीजों को दो बार (सुबह-शाम) राउंड के दौरान देखना पड़ता है। लेकिन आने वाले लगभग सभी मरीजों को पहले ऑब्जरवेशन में रखा जा रहा। स्थिति गंभीर होने के बाद ही उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जा रहा। कमोवेश हर मामले में ऐसा हो रहा।

सीधी बात
डॉ. अविनाश नागदेवे, प्रभारी शास्त्री अस्पताल सुपेला

सवाल - दो साल से कभी ऐसा नहीं हुआ कि सुपेला में एक साथ 10 मरीज या इससे अधिक भर्ती रहे हों, क्यों?
- मुझे ज्वाइन किए अभी करीब 1 महीना हुआ है। भर्ती इस लिए नहीं दिख रहा, क्योंकि हमारे डॉक्टरों ने ज्यादातर मरीजों को भर्ती की बजाय आब्जरवेशन में रखा है।
सवाल - बिना भर्ती मरीज को आब्जरवेशन में रखना तो गलत है, ऐसा क्यों हो रहा?
- जानकारी मिलते ही मैने इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया है। अब भर्ती लायक मरीज को भर्ती कराना है। आब्जरवेशन की परंपरा मैने खत्म कर दिया है, इसका असर दिखेगा।
सवाल - भर्ती करने के बाद मरीज को दो टाइम देखना न पड़े, ऐसा तो नहीं है?
- भर्ती मरीज को विशेषज्ञ दो बार देखते हैं। लेकिन हमारे यहां विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है, इसलिए मैने भर्ती मरीज को शाम में देखने की जिम्मेदारी कैजुअल्टी डॉक्टर को दी है। जल्द ही परिणाम सामने आएंगे। भर्ती रहने के बाद मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज होगा।

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