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अजगर और रसेल वाइपर का रेस्क्यू:वन विभाग की जिम में था 12 फीट का अजगर, नोवा नेचर की टीम ने राजनांदगांव के जंगल में छोड़ा; कुम्हारी के एक घर से रसेल वाइपर को पकड़ा

भिलाई5 महीने पहले
दुर्ग में वन विभाग की जिम से अजगर सांप का रेस्क्यू नोवा नेचर की टीम ने किया।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अलग-अलग दो जगहों पर दो खतरनाक सांपों का रेस्क्यू किया गया है। दुर्ग के वन विभाग की जिम में ट्रेडमिल मशीन पर कुंडली मारकर बैठे 12 फीट के अजगर व कुम्हारी से रसेल वाइपर सांप को घर से पकड़ा गया। दोनों सांपों को नोवा नेचर की टीम ने सफलता पूर्वक काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया। अजगर सांप को राजनांदगांव के जंगल में व रसेल वाइपर को खारुन नदी पास छोड़ा गया।

दुर्ग के वन विभाग के आवासीय परिसर की जिम लॉकडाउन के कारण बंद है। जिम की सफाई करने के लिए उसे जब खोला गया। ट्रेडमिल मशीन को चालू करके देखा गया, लेकिन वह चालू नहीं हुई। जब पट्टे की तरफ नीचे झुककर देखा गया, तो उसमें अजगर सांप दिखा, जो मशीन में कुंडली मार कर बैठा हुआ था। उसके बाद नोवा नेचर की टीम को बुलाया गया। नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार ने बताया कि जब हम मौके पर पहुंचे और मशीन के मोटर की जगह को खोला तो वहां करीब 12 फीट का अजगर था। अजगर को वन विभाग के सहयोग से राजनांदगांव के जंगल में छोड़ा दिया गया है।

दुर्ग वन विभाग की जिम से अजगर का नोवा नेचर टीम ने रेस्क्यू किया।
दुर्ग वन विभाग की जिम से अजगर का नोवा नेचर टीम ने रेस्क्यू किया।

रसेल वाइपर का सफल रेस्क्यू
दुर्ग जिले के लोटस सिटी फेस-1 कुम्हारी परसदा रोड पर रहने वाले रविंद्र जैन के घर में बाइक पर सांप बैठा हुआ मिला। जब वो रात में चैनल दरवाजा बंद कर ताला लगाने लगे तो उन्हें प्रेशर कुकर की सीटी की आवाज सुनाई दी। यह आवाज सुनते ही उन्हें एहसास हुआ कि यह आवाज बाइक के पास से आ रही है। वहां जाकर देखा तो बाइक के सामने चक्के के पास सांप नीचे उतरते हुए दिखा। नोवा नेचर की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर रसेल वाइपर को पकड़ा। फिर उसे खारून नदी के किनारे सही जगह देखकर छोड़ दिया गया।

कुम्हारी से रसेल वाइपर सांप का घर से रेस्क्यू कर उसे खारुन नदी के पास छोड़ा गया।
कुम्हारी से रसेल वाइपर सांप का घर से रेस्क्यू कर उसे खारुन नदी के पास छोड़ा गया।

ऐसे होते हैं अजगर और रसेल वाइपर
जानकारी के मुताबिक अजगर सांप यह अत्यंत विशाल व सुस्त होते हैं। कुंडली मारकर बैठने में दक्ष, जो पेड़ों पर चढ़ सकते हैं। ऊपरी सिर का हिस्सा हल्का लाल होता है। इसके ऊपरी होंठ पर ताप संवेदी गड्ढे होते हैं। जिसे यह अपने शिकार खोजने के काम लाता है। यह पीले से भूरे रंग की पीठ जिस पर गहरे भूरे काले किनारे वाले धब्बे होते हैं। यह शुष्क झाड़ीदार वनों में, वर्षावन, चारागाहों, नदियों के किनारे पाए जाते हैं। इनका शिकार चूहे से लेकर जंगली सूअर व हिरण छोटे आकार के जानवर होते हैं।

वहीं रलेस वाइपर बहुत जहरीला सांप होता है। इसके काटने से खून की नलियां जगह-जगह पंक्चर हो जाती है। सबसे पहले इसका असर किडनी, हार्ट व फेफड़े की खून की नलियों पर पड़ता है।

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