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बदलेगा पैटर्न:फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स में मिले अंकों के आधार पर इंजीनियरिंग में मिलेगा प्रवेश

भिलाई2 महीने पहले
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  • पीईटी की जगह 12वीं के अंकों के आधार पर सीटों के आवंटन के लिए तैयार हो रहा सॉफ्टवेयर

तकनीकी शिक्षा संचालनालय बीटेक, बी फार्मेसी समेत अन्य प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग की तैयारी में जुट गया है। इस बार प्रतियोगी परीक्षा नहीं हुई है, इसके कारण काउंसिलिंग के लिए नया सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसके लिए एक पोर्टल बनाया जाएगा। इसमें छात्रों के जैसे ही आवेदन आएंगे, उनमें उनके फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स में मिले अंकों को मिलाया जाएगा।

इसके आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी। इसी आधार पर छात्रों को भिलाई समेत राज्य में संचालित सभी शासकीय और निजी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में प्रवेश दिया जाएगा। अफसरों का कहना है कि यदि दो या से दो से अधिक छात्रों के समान अंक होते हैं तो यह देखा जाएगा कि उसे फिजिक्स और मैथ्स में कितने अंक मिले हैं। इसमें देखा जाएगा कि मैथ्स में किसे अधिक अंक मिला है और किसे फिजिक्स में। इसके आधार पर प्राथमिकता तय की जा सकती है।

सीएसवीटीयू भिलाई ने नहीं भेजी है संबद्ध कॉलेजों और सीटों की पूरी जानकारी
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ने संबद्ध कॉलेजों और वहां ब्रांचवाइज उपलब्ध सीटों की जानकारी संचालनालय तकनीकी शिक्षा को नहीं भेजा है। इस संबंध में कुलसचिव डॉ. केके वर्मा का कहना है कि शासन के आदेश के अनुसार सभी शासकीय और निजी कॉलेजों को 15 अगस्त तक ब्रांचवाइज सीटों की जानकारी देने के लिए कहा गया है। जैसे ही कॉलेजों से जानकारी आ जाएगी, उसे मिलाकर करके फौरन डीटीई को भेज दिया जाएगा। फिलहाल हमें भी कॉलेजों से सीटों के संबंध में आने वाली जानकारी का इंतजार है।

सीटों की जानकारी के बाद ही काउंसिलिंग की तारीख
डिप्टी डायरेक्टर तकनीकी शिक्षा संचालनालय अजय गर्ग का कहना है कि काउंसिलिंग से संबंधित हमारी सारी तैयारी शुरू हो गई है। सॉफ्टवेयर में फेरबदल करने के लिए शुक्रवार को ही सॉफ्टवेयर एजेंसी के साथ बैठक हुई है। इसमें आवश्यक बदलाव किया जा रहा है। अभी तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों और ब्रांचवाइज सीटों की जानकारी नहीं मिली है। इसके बिना काउंसिलिंग नहीं होगी।

छग में इंजीनियरिंग की 38 कॉलेज में 15,500 सीटें
राज्य में इंजीनियरिंग की पढ़ाई 38 कॉलेजों में हो रही है। यहां करीब साढ़े 15 हजार सीटें हैं। पिछली बार करीब पांच हजार सीटों पर प्रवेश हुआ था। इस बार बारहवीं के नंबरों के आधार पर प्रवेश होने से ज्यादा सीटों पर एडमिशन की संभावना है। इसी तरह फार्मेसी के लिए करीब चार हजार सीटें हैं। पिछली बार 35 सौ सीटों पर प्रवेश हुआ था। पॉलिटेक्निक की करीब 10 हजार सीटें हैं।

इससे ड्रॉपर स्टूडेंट्स को हो सकता है ज्यादा नुकसान
निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की सीटें भले ही खाली रहती हैं, लेकिन सरकारी कॉलेजों की डिमांड अब भी है। राज्य में तीन इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। यहां 852 सीटें हैं। पिछली बार 844 सीटों पर प्रवेश हुआ। पीईटी में अच्छा रैंक पाने वालों को ही इन कॉलेजों की सीटें मिलती है। इसके लिए कई छात्र साल ड्रॉप कर पीईटी की तैयारी करते हैं। इस बार प्रवेश परीक्षा नहीं हुई, इसका असर इन छात्रों पर सबसे अधिक पड़ेगा। अत: मांग उठी है कि साल ड्रॉप कर तैयारी करने वालों के लिए कोई रास्ता निकाला जाए। अभी काउंसिलिंग समिति की दो दौर की और बैठक होनी है, इसमें काउंसिलिंग से संबंधित अन्य पहलुओं पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।

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