पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

नक्सली गतिविधियों का प्रोजेक्ट पर असर:नक्सलियों के विरोध बाद रावघाट में पेड़ों की कटाई ठप, अंजरेल से सितंबर तक खनन शुरू करने टारगेट

भिलाईएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रावघाट में फरवरी महीने में रास्ता तैयार करने के बाद खनन शुरू किया गया, जो अब बंद है। - Dainik Bhaskar
रावघाट में फरवरी महीने में रास्ता तैयार करने के बाद खनन शुरू किया गया, जो अब बंद है।
  • फरवरी में सांकेतिक खनन के बाद से काम है बंद
  • काम बाकी: रावघाट के पहाड़ियों के नीचे में 21 हजार पेड़ काटना है

रावघाट इलाके में एक बार फिर नक्सली गतिविधियां तेज हो गई है। जिसका असर बीएसपी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट रावघाट पर पड़ रहा है। नक्सली खौफ की वजह से माइनिंग एरिया में पेड़ों की कटाई ठप है। जिसकी वजह से प्रोजेक्ट के आगे का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। फरवरी के पहले हफ्ते में सांकेतिक रूप से खनन शुरू किया गया। करीब 300 टन का खनन किया गया है।

इसे सड़क मार्ग से अंतागढ़ पहुंचाया गया। इसके बाद से काम रुका हुआ है। रावघाट अंतर्गत ब्लॉक ए में वर्तमान में एक्सप्लोरेशन के लिए ड्रिलिंग का काम चल रहा है। जिसके परिणाम आने के बाद विस्तृत कार्य योजना (डीपीआर) तैयार की जाएगी और फिर उसके आधार पर माइनिंग प्लान बनाई जाएगी। ब्लॉक ए में अब तक 30 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं एवं लगभग 125 हेक्टेयर एरिया को साफ किया जा चुका है। इसके अलावा रावघाट के पहाड़ियों के नीचे (फुटहील) में लगभग 21 हजार पेड़ विदोहन योजना अंतर्गत काटे जाने है। इसके लिए बीएसपी प्रबंधन की ओर से वन विभाग को 3.6 करोड़ रुपए जमा कराने के बाद कटाई का काम शुरू किया गया, तभी नक्सली समर्थक एक संगठन ने उसका विरोध शुरू कर दिया। संगठन का कहना है कि पेड़ों की कटाई बंद की जाए। इस दौरान इलाके में नक्सली कई वारदात को भी अंजाम दे चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीते महीने भर से पेड़ों की कटाई का काम ठप है।

एक नजर में रावघाट प्रोजेक्ट को जानिए

  • 06 लौह अयस्क के ब्लॉक
  • 712.48 मिलियन टन अयस्क
  • 14 एमटी का माइनिंग प्लांट
  • 5000 लोगो को मिलेगा रोजगार

सुरक्षा के लिए 19 कैंप बीएसपी को हैंडओवर
माइनिंग एरिया में काम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को दी गई है। इनके लिए रावघाट और अंजरेल एरिया में प्रबंधन की ओर से कैंप स्थापित किए जा रहे हैं। अभी तक 21 सिक्योरिटी कैंप बीएसएफ को हैंड ओवर कर दिया गया। यह कैंप ब्लॉक ए में स्थित है।

ए ब्लाक में माइनिंग शुरू होने में अभी भी 3 साल
ए ब्लाक में माइनिंग शुरू करने के पूर्व की तैयारियों को देखते हुए जानकार बता रहे हैं कि अभी भी यहां माइनिंग शुरू होने में दो से तीन साल का समय लगेगा। ए ब्लाक में माइनिंग के लिए अभी तक डीपीआर नहीं बना है। उसके बनने के बाद ही माइनिंग से जुड़े मशीनरी प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

हालात के कारण प्रबंधन का फोकस अंजरेल पर
रावघाट की स्थिति को देखते हुए बीएसपी प्रबंधन ने अपना पूरा फोकस अंजरेल में अंतरिम माइनिंग शुरू करने की ओर कर दिया है। प्रबंधन ने माइनिंग से जुड़ी सारी अनुमतियां प्राप्त कर ली है। पहुंच मार्ग का निर्माण पहले ही पुरा किया जा चुका है। माइनिंग शुरू होने पर यहां से अंतागढ़ तक आयरन ओर की ट्रांसपोर्टिंग सड़क से की जाएगी।

फरवरी में की गई टोकन माइनिंग
फरवरी के पहले सप्ताह अंजरेल में टोकन माइनिंग की गई। करीब 300 टन आयरन ओर का खनन किया गया। जिसे सड़क मार्ग से अंतागढ़ तक पहुंचाया गया। यहां लोडिंग यार्ड तैयार किया जा रहा है। यहीं से रेल मार्ग से आयरन ओर की सप्लाई दल्ली राजहरा और फिर क्रशिंग और वाशिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएसपी प्लांट पहुंचाई जाएगी।

रेल लाइन बिछाने का काम भी धीमा
राजहरा से रावघाट तक रेल लाइन परियोजना अंतर्गत 0 से 60 किमी रेल लाइन बिछाने के बाद अंतागढ़ तक रेल लाइन की टेस्टिंग की जा चुकी है। 60 से 80 किमी एवं 93 से 95 किमी में रेल लाइन बिछाने का काम प्रगति पर है। 80 से 93 किमी के दौरान पेड़ काटने का काम एवं जमीन हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रिया चल रही है। इसलिए रेल लाइन नहीं बिछ पाई है।

9 साल पीछे चल रहा है यह प्रोजेक्ट
बीएसपी में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए जब प्लांट में आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण परियोजना पर काम शुरू हुई, उसी समय से आयरन ओर की बढ़ती डिमांड को ध्यान में रखते हुए रावघाट में भी माइनिंग के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। वर्ष 2008 में लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया होने के बाद 2012 तक माइनिंग शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन विभिन्न कारणों से स्थानीय ग्रामीणों का विरोध, नक्सलियों घटनाएं और पर्यावरण क्लियरेंस में देरी की वजह से प्रोजेक्ट करीब 9 साल पिछड़ गया। और परेशानी बढ़ रही।

खबरें और भी हैं...