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  • Age 82 Years; Despite Heart Surgery, Corona Did Not Give Up, Boosted Morale Of Son, Daughter in law, Wife And Granddaughter With Herself, All Is Well Now

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:उम्र 82 साल; हार्ट सर्जरी के बाद भी कोरोना से नहीं माने हार, खुद के साथ बेटे, बहू, पत्नी व नातिन का मनोबल बढ़ाया, अब सब ठीक हैं

भिलाई6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज तीसरी कड़ी- ऑक्सीजन लेवल 50 तक पहुंचा, फिर जीत गए कोरोना से जंग

मेरे पिता की उम्र 82 साल है। पहले ही उनके हार्ट सर्जरी और घुटने का ऑपरेशन हो चुका है। हाई बीपी और शुगर की शिकायत हर समय बनी रहती है। ऐसे में मेरे पिता को कोरोना का संक्रमण हुआ। उन्होंने कोरोना से हार नहीं मानी। उनकी सेवा करते हुए मै भी संक्रमित हो गया। मेरे बाद घर के सभी पांच सदस्य पॉजीटिव हो गए।

कोरोना ने हम सबको चपेट में ले लिया। अब घर के सारे सदस्य स्वस्थ हैं। इसमें मेरे पिता एसपी श्रीवास्तव ने खुद तो हार नहीं मानी। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों का भी उत्साह वे बढ़ाते रहे। मेरी उम्र 58 वर्ष है। मेरे पिता में सबसे पहले लक्षण दिखाई दिए। उन्हें हल्की खांसी और बुखार आने लगा। मैं उन्हें एंटीजन टेस्ट के लिए अस्पताल लेकर गया। आधे घंटे बाद रिपोर्ट पॉजीटिव आई। पिता को बताने के बाद उन्हें चक्कर सा आने लगा। हम दोनों वहीं बैठ गए। उसके बाद उनके संपर्क में आने की वजह से मेरा टेस्ट करवाने कहा गया।

मेरा भी टेस्ट पॉजीटिव आया। मैं यह सोचकर घबरा गया कि अब पिता को कैसे संभालूंगा। मैं खुद भी संक्रमित हो चुका हूं। हम दोनों जैसे-तैसे घर पहु़ंचे। यहां जब मेरी 77 वर्षीय मां शकुंतला और पत्नी व 15 साल की बेटी को पता चला तो पूरा परिवार सदमे में चला गया। दो दिन तक हम यहीं सोचते रहे कि हॉस्पिटल में एडमिट हो या नहीं। नाते-रिश्तेदारों को भी बता पा रहे थे कि हमें कोरोना निकला है। कई लोगों से राय लिया। तब मुझे लगा कि पिता जी को गंभीर बीमारी है इसलिए हॉस्पिटल में एडमिट करना जरूरी है।

हमने बीएम शाह अस्पताल में जान-पहचान के व्यक्ति से बात करवाई। उन्हें यह कहकर राजी किया कि दोनों के बेड अगल-बगल में होंगे तो एक दूसरे की देखभाल भी होगी और हिम्मत भी बनी रहेगी। अस्पताल में हमें ऐसे ही बेड उपलब्ध करवाया। सात दिन तक दोनों अस्पताल में रहे। उसके बाद दोनों स्वस्थ्य होकर घर लौटे।

इस बीच अस्पताल में दाखिला होने के बाद परिवार के बाकी सदस्यों का टेस्ट लिया गया। मेरी मां, पत्नी और बेटी भी कोरोना पॉजिटिव निकली। इस खबर से तो मानों पहाड़ सा टूट पड़ा। उम्रदराज मां को भी दूसरी बीमारियां हैं। इसलिए ज्यादा सावधानी की जरूरत थी। मैंने पत्नी और बेटी को दिलासा दिया। उनकी हिम्मत बढ़ाई। अस्पताल में डॉ राजेश ने मेरा और मेरे पिता का इलाज किया। पिता को पहले दिन रेमडेसिविर के दो इंजेक्शन लगे। उसके बाद बाकी तीन दिन एक–एक इंजेक्शन लगा। ऑक्सीजन लेवल 50 तक आ पहुंचा। सीटी स्कोर 20 था।

सबसे बड़ी दिक्कत बीपी कभी लो तो कभी हाई हो जाता। इन्हें कंट्रोल करने की दवाइयां चली। फीवर भी हाई था। इधर परिवार होम क्वारेंटाइन में रहा। मेरे घर के कोरोना संक्रमित तीनों सदस्यों का जिला स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने बेहद हेल्प की। रोज सुबह और शाम फोन करते। हम लोगों न पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर से जांच करते रहे। दवाइयों का किट मिला। दवा खाई, अब सभी ठीक हो गए।

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