कोरोना की तीसरी लहर:सुपर स्प्रेडर का काम कर रहे एंटीजेन में निगेटिव आने वाले, ट्रू-नॉट जरूरी

भिलाई4 महीने पहले
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रैपिड एंटीजेन टेस्ट में निगेटिव आने वाले कोरोना संदिग्ध सुपर स्प्रेडर बन रहे हैं। इनके खुद को निगेटिव मान लेने की गलती करने से संक्रमण फैल रहा है। आईसीएमआर गाइडलाइन के मुताबिक ऐसे लोगों का रैपिड एंटीजेन टेस्ट में निगेटिव मिलने पर ट्रू-नॉट या आरटीपीसीआर टेस्ट में कोई एक जरूर होना चाहिए, लेकिन इनकी इच्छा पर निर्भर करता है।

अगर वह ट्रू-नॉट या आरटीपीसीआर टेस्ट का सैंपल स्वेच्छा से दे रहे हैं तो आगे उनका ट्रू-नॉट या आरटीपीसीआर का सैंपल लिया जा रहा है, नहीं तो कोई दबाव नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोज लिए जा रहे अलग-अलग सैंपलों की संख्या से इसकी पुष्टि हो रही है। ट्रू-नॉट और आरटीसीआर सैंपलों के दो-गुने से ज्यादा सैंपल रैपिड एंटीजेन के लिए गए हैं। जबकि एक्सपर्ट के अनुसार रैपिड एंटीजेन टेस्ट केवल स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिनमें वॉयरल लोड ज्यादा होता है। वही इस टेस्ट में पकड़ में आते हैं। यह जिनमें कम होता है, वह संक्रमित होते हुए भी इस टेस्ट में पॉजीटिव नहीं मिलते हैं। इसीलिए रैपिड टेस्ट में निगेटिव आने ट्रू-नॉट व आरटीपीसीआर जरूरी है।

आईसीएमआर ने दी है इन तीनों को मान्यता, लेकिन सभी के लिए चिकित्सकीय परामर्श जरूरी, गाइडलाइन भी तय

1- रैपिड एंटीजेन
इसका इस्तेमाल केवल स्क्रीनिंग के लिए किया जाना है। मरीज में सिमटम होता है, उन्हीं का यह टेस्ट होना है। वॉयरस जब शरीर में डेवलप हो जाता है, तभी इस टेस्ट में आता है। उसे खुद को डेवलप करने में कम से कम 7 दिन लगते हैं। इसीलिए इस टेस्ट में अर्ली समय का संक्रमण पकड़ में नहीं आता। पॉजीटिव रहते हुए भी मरीज निगेटिव आ जाता है।

2- ट्रू-नॉट टेस्ट
यह कार्टराइज बेस आरएनए टेस्ट होता है। इसमें एक दिन का संक्रमण भी पकड़ में आ जाता है। इसकी पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले में कोरोना फेमिली की पहचान और दूसरे में स्पेशली कोविड-19 को डिटेक्ट किया जाता है। इसमें पीड़ित में वॉयरस की संख्या का पता नहीं चलता है। निगेटिव आने वाले आरटीपीसीआर टेस्ट में भी निगेटिव आते हैं।

3- आरटीपीसीआर
कोरोना की पहचान के लिए यह सबसे भरोसेमंद टेस्ट है। इसमें भी एक दिन का संक्रमण ट्रेस हो जाता है। ट्रू-नॉट और इसमें अंतर यह कि आरपीसीआर में संक्रमित के शरीर में वॉयरस की संख्या का भी पता चलता है। इलाज में इस टेस्ट से ज्यादा मदद मिलती है। इसमें ट्रू-नाट से ज्यादा समय लगता है। खर्च भी दोनों टेस्ट से ज्यादा होता है। दोनों ही टेस्ट आवश्यक बताए गए हैं।

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