विकास कार्य / पाटन के 9 नालाें में चेक डेम कम डाइक निर्माण के लिए मिली स्वीकृति

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दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:02 AM IST

पाटन. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, घुरवा, गरवा बारी योजना अब धरातल पर दिखने लगा है। सीएम के गृह विधानसभा पाटन में ही बड़ी संख्या में नरवा में कार्य किए जाने की स्वीकृति मिली है। 
अब पाटन के 9 स्थानों पर नरवा (नाला) में बोल्डर चेक डेम, लूज बोल्डर चेक डेम, सिल्ट ट्रेप, कंटूर ट्रैप, चेक डेम बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें आरईएस के एसडीओ अंश चतुर्वेदी लगातार गांवों में जाकर कार्यस्थल पर दिशा निर्देश दे रहे हैं। इन नालों में  विभिन्न 110 कार्यों के लिए 286. 741 लाख रुपए की स्वीकृति भी मिल चुकी है। 
इससे किसानों को फसलों के लिए पानी की कमी नहीं होगी। पाटन विधानसभा में भूपेश बघेल के तत्कालिक राजस्व मंत्री रहते तुलसी नाला योजना, राजीव गांधी जलग्रहण योजना, गुजरा नाला अपर व गुजरा नाला लोवर के तहत दो दर्जन से अधिक गांवों में जल प्रबंधन  का कार्य किया गया। उसका परिणाम आज भी देखने को मिलता है।  प्रदेश में सरकार बनी तो इसी सफलता को देखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने योजना बनाई गई। योजना के लागू होने के बाद ग्रामीणों और किसानों को काफी राहत मिलेगी। गांव में पानी और अन्य मूलभूत सुविधओं  पर भी ध्यान दिया जाएगा।
जानिए पाटन के इन नालों पर होंगे ये कार्य
नरवा डीपीआर अंतर्गत जो जानकारी मिली है उनमें कई कार्य है। इनमें पौहा नाला, भन्सुली आर से चुलगहन के बीच का नाला, बोहरडीह से छाटा के बीच नाला, सांतरा से खम्हरिया नाला, रुही से उफरा नाला, लोहरसी से खुड़मुड़ी के बीच नाला, बोरवाय से कुर्मीगुंडरा के बीच, लोहरसी से ठकुराइन टोला के बीच, कुर्मीगुंडरा से डंगनिया  नाला के बीच काम होंगे।
नालों में रुकेगा पानी, जलस्रोत भी बढ़ेगा  
ज्यादातर नालाें में काम शुरू हो गया है। इससे गांव लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।  इसके अलावा ब्लाक के जिन 9 नाला में अभी काम शुरू हुआ है, वहां पर बारिश का पानी रुकेगा ही। इसके साथ ही जलस्रोत भी बढ़ेगा।  नरवा कार्य में पाटन में सुबह से ही टीम  वर्क शुरू हो जाता है। आरईएस के अधिकारी सुबह की मीटिंग के बाद काम शुरू कर रहे। जल्द ही कार्य होंगे।
पाटन में अभी नालों में निर्माण कार्य शुरू हुआ
:पाटन ब्लॉक में अभी नालों में निर्माण कार्य शुरू हुआ है। जल  संग्रहण, जल प्रबंधन सहित जल स्रोत बढ़ेगा, जिससे कि ग्रामीणों सहित किसानों को फायदा होगा। निर्माण कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं।"
-अंशु चतुर्वेदी, एसडीओ आरईएस पाटन

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