VVIP गांवों की हकीकत:छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के एक गांव में सब ठीक तो दूसरे में कोरोना से 9 मौतें, दोनों में अभी तक नहीं बने अस्पताल

दुर्ग7 महीने पहलेलेखक: सुरेंद्र सिंह

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दुर्ग जिले में दो गांव हैं। एक उनका जन्मस्थान कुरुदडीह और दूसरा जहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई बेलौदी। दोनों गांवों में मुख्यमंत्री के परिवार की जमीनें हैं और पिता-भाई व अन्य परिजन रहते हैं। इन दोनों VVIP गांवों की कोरोनाकाल में स्थिति का जायजा लेने भास्कर की टीम पहुंची।

बेलौदी में 9 मौतें
1500 से कुछ अधिक की जनसंख्या वाली छोटी सी पंचायत बेलौदी की चमचमाती सड़कें आपको बता देगी कि आप किसी खास इलाके में हैं। गांव की गलियों में हर तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा है। गांव के चौक-चौराहों पर भी कोई नहीं दिख रहा है। अंदर की ओर कुछ दूर चलने के बाद एक बरगद के पेड़ के नीचे कुछ ग्रामीण बैठे मिलते हैं। कोरोना की जागरूकता इस गांव में पूरी है। सभी ग्रामीण मास्क या गमछा बांधे हुए हैं। थोड़े प्रयास के बाद ये लोग बात करने के लिए राजी हुए।

गांव में कुछ इस कदर सन्नाटा पसरा है।
गांव में कुछ इस कदर सन्नाटा पसरा है।

बरगद के नीचे मौजूद सरपंच प्रतिनिधि रामाधार वर्मा ने बताया कि हमारी पंचायत में पिछले एक महीने में 14 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए और 9 लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है। इनमें से अधिकतर युवा थे। इनको दुर्ग के अस्पताल तक भेजा गया, पर जान नहीं बची। इसके बाद महामारी को लेकर यहां सभी सतर्क हो गए हैं।

हमने गांव में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए गांव के ही प्राथमिक स्कूल में कोविड सेंटर बनाया है। जो लोग बाहर से आए हैं, यहां उनके रुकने की वहां व्यवस्था की गई। जो लोग वहां नहीं रुकते, उन्हें होम आइसोलेट कराया जाता है। गांव को 4 बार सैनिटाइज किया जा चुका है। शासन की ओर से पूरे गांव में काढ़ा, दवाओं की किट बांटी गई है।

मुख्यमंत्री का बेलौदी गांव में कोरोना का संक्रमण पहुंचा।
मुख्यमंत्री का बेलौदी गांव में कोरोना का संक्रमण पहुंचा।

अस्पताल अभी भी नहीं

यहां मौजूद दूसरे ग्रामीण कहते हैं हमारा गांव मुख्यमंत्री का गांव है, जिससे यहां सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, लेकिन अस्पताल अभी भी नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाएं मितानिन के भरोसे है। बीमार होने के बाद गांव से करीब 6 किमी दूर स्थित गाड़ाडीह के अस्पताल दवाई लेने के लिए जाना पड़ता है। नहीं तो पाटन व झीट के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जाना पड़ता है। कोरोना से बचने के लिए हम सभी मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करते हैं और ज्यादातर घर में ही रहते हैं। पंच बलदाऊ प्रसाद ने बताया कि कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए कई ग्रामीण सुबह व शाम को भाप भी ले रहे हैं। सुरक्षा उपायों को लेकर कोटवार की मुनादी और मितानिन का सर्वे चल रहा है। अब गांव में नए मरीज नहीं मिल रहे हैं।

बेलौदी गांव के ग्रामीण कुछ इस तरह से कोरोना संक्रमण के समय को काट रहे हैं।
बेलौदी गांव के ग्रामीण कुछ इस तरह से कोरोना संक्रमण के समय को काट रहे हैं।

कुरुदडीह में संक्रमण और जागरूकता दोनों कम

मुख्यमंत्री का यह गांव खम्हरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। यहां भी बेहतर सड़कें, स्कूल, पंचायत और दूसरे सरकारी भवनों को देखकर समझा जा सकता है कि ये इलाका भी कुछ खास है। गांव में चौक चौराहों पर लोग नहीं दिखें, लेकिन गांव के ही एक तालाब में मछली पकड़ने वालों की भीड़ थी। इसमें से कई लोगों ने मुंह पर मास्क भी नहीं पहना था।

जब इस संबंध में इन लोगों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सभी उपाय कर रहे हैं। गांव में मितानिन में घर-घर जाकर मितानिन जागरूक और सर्वे कर रही हैं। हम सभी लोग घर से बाहर कम ही निकलते हैं। वहीं मौजूद गांव के पंच दुष्यंत ठाकुर ने बताया कि गांव में कोटवार के द्वारा मुनादि कराई गई है। गांव की सरपंच शैल बाई बंजारे बताती हैं कि हमारे गांव में कोरोना का संक्रमण न के बराबर है। यहां पर लोग सोशल डिस्टेसिंग व अन्य शासन के बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन कर रहे हैं। इस गांव में भी अस्पताल नहीं है और ग्रामीणों को इलाज, दवाओं के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है।

कुरुदडीह गांव में ग्रामीण मछली पकड़ रहे हैं, लेकिन किसी ने मास्क नहीं लगाया है।
कुरुदडीह गांव में ग्रामीण मछली पकड़ रहे हैं, लेकिन किसी ने मास्क नहीं लगाया है।

प्रशासन के रिकार्ड में 6 मौतें कम

पाटन विकासखंड के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉक्टर आशीष शर्मा के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में बेलौदी गांव में 3 लोगों की मौत हुई और 14 पॉजिटिव पाए गए थे। अभी इस गांव में एक मरीज ही एक्टिव है बाकी सभी ठीक हो गए हैं। वहीं कुरुदडीह में कोरोना संक्रमण से 1 की मौत हो चुकी है और 4 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। वहां सभी एक्टिव 4 मरीजों को होम आइसोलेट कर इलाज किया जा रहा है।

कुरुदडीह में भी कोरोना का संक्रमण काफी कम है।
कुरुदडीह में भी कोरोना का संक्रमण काफी कम है।

CMHO व स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। CMHO डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में हमारी पूरी तैयारी है। लगातार मॉनिटरिंग के साथ-साथ एक अनुपात के हिसाब से टेस्टिंग की जा रही है। गांवों में आइसोलेशन की पूरी तैयारी है। जिले के तीनों विकासखंडों में 20 बिस्तर का ऑक्सीजन सुविधा वाला सेंटर तैयार किया गया है। पाटन विकासखंड में 40 बिस्तर वाले झीट सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अब केवल 10 से 12 मरीज ही भर्ती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में धीरे-धीरे कोरोना के मरीज कम होने शुरू हो गए हैं।

क्या कहते हैं नेता

जिले के पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय बताते हैं कि कोरोना का संक्रमण गांव की तरफ बढ़ रहा है। बड़े गांवों में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। लॉकडाउन से कोरोना की चेन तो टूटती है, लेकिन इस समय में राज्य सरकार को अपनी तैयारियों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। दुर्ग शहर के कांग्रेस विधायक अरुण वोरा कहते हैं कि लॉकडाउन लगाने का फायदा तो दिख रहा, एक्टिव केस कम हुए हैं। वहीं वो सलाह भी दे रहे हैं कि उन क्षेत्रों को जहां ज्यादा मरीज हैं वहां कंटेनमेंट जोन बनाने चाहिए और सतत निगरानी होनी चाहिए।

कोरोना का संक्रमण गांव की दहलीज तक पहुंच रहा है।
कोरोना का संक्रमण गांव की दहलीज तक पहुंच रहा है।

दुर्ग जिले में कोरोना की स्थिति
जिले में अब तक 94 हजार 57 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की पहचान हुई है। इसमें से मरीज 88 हजार 741 डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। जिले में अब तक1,673 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में तबाही दुर्ग जिले से शुरू हुई थी। अप्रैल में यहां सबसे ज्यादा करीब 632 लोगों की मौत हुई थी।

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