चुनावी चर्चा:भैय्या प्रचार के लिए पैसे तो आ रहे, लेकिन प्रत्याशी ही दबा रहे

भिलाईएक महीने पहले
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चुनाव में शिकायती लालों की कमी नहीं है। पिछले चुनावों में उनकी सभी स्थानों पर लगातार आवभगत होती रही। जो चाहते मंगाकर खाते-पीते रहे। प्रत्याशी भी उनके खर्चों में किसी तरह की टोका-टाकी नहीं करते थे, लेकिन इन दिनों हो रहे चुनाव में दोनों ही राजनीतिक दल हाथ खींचे रखे हैं।

खर्च करने में काफी किफायत बरती जा रही है। ऐसे में प्रचार सामग्री तो दूर चाय नाश्ता के लिए भी टोटे पड़ गए हैं। ऐसे में एक कार्यकर्ता को पता चला कि पार्टी कार्यालय से तो फंड जारी किया जा चुका है, लेकिन प्रत्याशी हैं कि अपनी अंटी ढीली नहीं कर रहे। इस पर एक बड़े नेता के मुंह लगे कार्यकर्ता ने शिकायत कर दी कि भैय्या प्रचार के लिए पैसे आ रहे, लेकिन प्रत्याशी सारी रकम दबा रहे हैं। आप ही बताएं ऐसे में चुनाव कैसे जीतेंगे। कार्यकर्ता इससे खासे नाराज भी नजर आ रहे।

थानेदार पोस्टिंग के लिए बिजनेस एक्जीक्यूटिव से की सांठगांठ
निकाय चुनाव में उम्मीदवार जीत के लिए बड़़े नेताओं का सहारा ले रहे हैं। इसी चुनावी रणनीति के तर्ज पर दो थानेदार भी काम कर रहे हैं। दोनों थानेदारों ने दो बिजनेस एक्जीक्यूटिव का सहारा ले लिया है। एक्जीक्यूटिव का मुख्यालय के बड़े अफसरों के उठना बैठना है। अधिकारी एक्जीक्यूटिव के सुझाव को आदेश मानकर काम करते हैं। यही वजह है कि दोनों थानेदारों ने जामुल और सेक्टर एरिया के एक्जीक्यूटिव का सहारा ले लिया है। इतना ही नहीं दोनों थानेदार काफी रंगीले हैं और उनकी रासलीलाओं के चर्चे पूरे पुलिस महकमें में किसी से नहीं छिपे हैं। इसके कारण ही बड़े अफसरों ने दोनों से किनारा कर रखा है। इसी वजह से दोनों की मलाईदार थाने मेें पोस्टिंग नहीं हो पाई है। अब दोनों थानेदार मुख्यालय से जुगाड़ जमाकर पोस्टिंग के लिए डटे हुए हैं।

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