कोर्ट का फैसला:भिलाई निगम के साथ संपत्ति कर विवाद को लेकर बीएसपी की याचिका खारिज

भिलाईएक महीने पहले
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बीएसपी क्षेत्र के संपत्तिकर का विवाद हाईकोर्ट में पहुंच गया है। पिछले साल भिलाई निगम ने गलत संपत्तिकर का ब्यौरा देने को लेकर बीएसपी प्रबंधन को नोटिस जारी किया था। एक के बाद एक दो नोटिस मिलने पर निगम के खिलाफ बीएसपी मैनेजमेंट ने शासन में अपील की। प्रकरण के करीब सालभर तक लंबित रहने पर बीएसपी प्रबंधन हाईकोर्ट पहुंच गया। मामले में फिलहाल दो बार की सुनवाई हो चुकी है। निगम ने कोर्ट में बीएसपी द्वारा शासन के फैसले का इंतजार किए बिना कोर्ट में पहुंचने की जल्दबाजी करने का जवाब दाखिल किया है।

वर्ष 2019-20 के संपत्तिकर का वास्तविक स्वविवरणी प्रस्तुत नहीं करने को लेकर 10 अगस्त 2020 में भिलाई निगम ने बीएसपी प्रबंधन को नोटिस जारी किया। इसमें निगम ने अंतर की राशि का पांच गुना व अधिभार सहित कुल 1 अरब 72 करोड़ 49 लाख 59 हजार 122 रुपए संपत्तिकर चुकाने का आदेश दिया। निगम का कहना था कि कि प्रबंधन ने कारखाना क्षेत्र की बहुत सी संपत्तियों भूमि, भवनों एवं कारखानों का पूर्ण विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। इसके बाद उन्होंने दूसरा नोटिस 16 अक्टूबर को जारी कर दिया। इस पर बीएसपी ने शासन में अपील कर दी। साथ ही निगम व शासन की लंबित जांच को निरस्त करने की अपील की। इस पर सुनवाई करते हुए 23 अक्टूबर को नगरीय प्रशासन के उपसचिव एचआर दुबे ने बीएसपी के आवेदन को अग्राह्य कर दिया।

कोविड की वजह से शासन स्तर पर सुनवाई में हुई देरी
प्रकरण की शासन में सुनवाई इस वर्ष 6 सितंबर को हुई। इस दौरान बीएसपी की ओर डीजीएम मिश्रा और निगम की ओर उपायुक्त सुनील अग्रहरि पहुंचे। इसके बाद 15 सितंबर को तर्क प्रस्तुत करने के दौरान बीएसपी ने निगम द्वारा किए नोटिस को निरस्त करने की मांग की। इस पर निगम अधिकारियों का कहना है कि शासन के पास मामले की सुनवाई लंबित होने के बीच बीएसपी प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। निगम ने कहा कि कोविड की वजह शासन स्तर पर चल रहे प्रकरण की सुनवाई में देरी हुई। अब इस शुक्रवार 29 अक्टूबर को कोर्ट सुनवाई होनी है।

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