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बढ़ रहे मामले:10 महीने में 7 नवजात बच्चों के शव मिले, एक का भी खुलासा नहीं

भिलाईएक महीने पहले
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  • हर बार अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज करती है पुलिस, इसके बाद थाने में धूल खाते रहती है जांच के फाइल, जांच के दावे जरूर लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंचे

पूरा देश जब देवी की अराधना में डूबा हुआ है। बेटियों को देवी का दर्जा कर पूजा-अराधना कर रहा है। वहीं जिले में सोमवार की सुबह करीब 9 बजे जेवरा पुलिस चौकी अंतर्गत डांडेसरा के करीब शिवनाथ नदी तट पर करीब 9 माह की बच्ची का शव मिला। पिछले 10 महीनों में जिले के 5 थाना क्षेत्रों में ऐसे 7 लावारिस नवजात बच्चे मिले हैं। उनमें 3 बेटियां हैं। खास बात यह है कि इन मामलों में से किसी एक में भी पुलिस परिजनों तक नहीं पहुंच पाई, न ही इन बच्चों की पहचान हो सकी। सभी मामलों में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर फाइल को थाने के किसी कोने में फेंक दिया गया। ऐसे सभी मामलों को लेकर लंबे समय से पुलिस द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई गई। यहां तक जिम्मेदारों द्वारा जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही।

इन थाना क्षेत्रों में सामने आए मामले
जिले के छावनी, दुर्ग कोतवाली, पद्भनाभपुर, पाटन, रानीतराई, पुलगांव और जेवरा सिरसा इलाके में नवजात बच्चों के शव मिलने की मामला सामने आया। भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इनमें से किसी में भी पुलिस दोषियों तक नहीं पहुंच पाई। पिछले दिनों पाटन में चौराहे पर नवजात का शव मिला। पुलिस ने घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग चेक की। पता चला कि पन्नी में भरकर युवती ने नवजात का शव फेंका।

पीएम रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा
डांडेसरा के करीब नदी तट पर मिली बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा। बच्ची करीब 9 महीने की बताई गई है। ग्रामीणों ने बच्ची के शव को पानी में बहते देखा, इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई। अब पुलिस मामले में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पतासाजी कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से ही बच्ची को फेंका गया।

हर बार केस दर्ज, फिर फाइल बंद
नवजात लावारिस बच्चे मिलने की घटनाएं पुलिस के लिए नई नहीं है। ऐसे सारे मामले में जांच के नाम पर हमेशा से खानापूर्ति हुई। शव को पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस की जांच बंद कर दी जाती है। पिछले दिनों हुए लगभग सभी मामलों में ऐसा किया गया। हालांकि पिछले 7 मामलों में अब तक खात्मा नहीं हुआ है। प्राय: पुलिस में सामने आने वाली सभी ऐसे मामलों में पुलिस मर्ग कायम करने के बाद फाइल को बंद कर देती है।

गर्भपात को छिपाने फेंका जाता है शव
पुलिस का मानना है कि लावारिस नवजात के मामलों में गर्भपात को छिपाने के लिए भ्रूण या नवजात के शव को फेंक दिया जाता है। इसके अलावा अब भी कई जगहों पर लड़कियां होने के बाद उसे फेंक दिया जाता है। जिले में पिछले 7 मामलों में 3 लड़कियों के शव मिले हैं, जिनके बारे में पुलिस अब भी जांच कर रही है। अब तक पुलिस को इन मामलों में कहीं किसी प्रकार का सुराग नहीं मिला है।

"यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे मामलों में दोषियों की पहचान हो। इसके लिए अधिकारियों व थाना प्रभारियों को निर्देशित किया जाएगा। मामला गंभीर है, जरूर पुलिस के तरफ से इस दिशा में प्रयास होंगे।"
-विवेकानंद सिन्हा, आईजी दुर्ग

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