ऐसी लापरवाही:डीयू के पास प्रवेश लेने वालों की जानकारी नहीं, नामांकन अटका

भिलाई18 दिन पहले
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  • 4 बार डीयू ने भेजा रिमाइंडर, कॉलेजों ने नहीं दी एडमिशन की जानकारी

चार बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी हेमचंद यादव विवि से संबद्ध शासकीय और निजी महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने प्रवेशित छात्रों की जानकारी नहीं भेजी है। अब डीयू ने 9 अक्टूबर तक सारे कॉलेजों को अपडेट जानकारी देने के लिए अल्टीमेटम जारी किया है। इस वजह से पहले चरण में करीब 10 हजार छात्रों का नामांकन अटक गया है।

प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कुछ कॉलेजों में विभिन्न विषयों और कक्षाओं की सीटों में वृद्धि हुई। वहीं प्रवेश की प्रक्रिया में स्टॉफ लगा रहा। इसकी वजह से पोर्टल में प्रवेशित छात्रों की जानकारी कॉलेजों ने अब तक नहीं भेजी है। प्राचार्यों से जानकारी नहीं मिलने की वजह से विद्यार्थियों के नामांकन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा ने बताया कि सभी शासकीय और निजी महाविद्यालयों के प्राचार्यों और उनके प्रतिनिधियों को प्रवेशित छात्रों की जानकारी फौरन अपडेट करने को कहा गया है। प्रवेश प्रक्रिया और सीटों की स्थिति की उच्च शिक्षा विभाग भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। लगातार प्रवेशित छात्र-छात्राओं की जानकारियां भी मंगाई जा रही है। साथ ही प्रवेश की प्रक्रिया पूर्ण होते ही छात्रों का नामांकन भी किया जाना है। इसमें छात्रों के सारे अकादमिक रिकार्ड रखे जाएंगे।

उच्च शिक्षा विभाग भी कर रहा मॉनिटरिंग

1. साइंस, गर्ल्स व दिग्विजय कॉलेज ने पोर्टल बंद करने दिया आवेदन
महाविद्यालयो में रिक्त सीटों की स्थिति को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने 9 अक्टूबर तक छात्रों को प्रवेश देने का आदेश जारी किया था। करीब 5 गुना अधिक आवेदन आने की वजह से साइंस कॉलेज दुर्ग, गर्ल्स कॉलेज दुर्ग और दिग्विजय कॉलेज राजनांदगांव ने पहले ही पोर्टल बंद करने का आग्रह किया था। साथ ही संबद्ध अधिकांश शासकीय महाविद्यालयों ने भी पोर्टल पुन: नहीं खोलने को कहा था।

2. छात्रों के पास अब निजी महाविद्यालयों में है एडमिशन का विकल्प
उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार 9 तक प्रवेश लेने का मौका है। यह ऑनलाइन प्रवेश लेने का अंतिम अवसर होगा। फिलहाल अधिकांश शासकीय महाविद्यालयों की करीब 90 फीसदी से अधिक सीटें भर गई हैं। आरक्षण रोस्टर की वजह से ही कुछ सीटें बची हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के पास अब निजी महाविद्यालयों में प्रवेश लेने का विकल्प बचा है। क्योंकि शासकीय कॉलेजों में पोर्टल बंद हैं।

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