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मां ढाई साल पहले ही छोड़ गई:पिता ने चार बच्चों को कुछ पैसे देकर सड़क पर छोड़ा, चाइल्ड लाइन ने चाचा को सौंपा

भिलाईएक महीने पहले
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पिता के इंतजार में बच्चे अपने चाचा के घर। - Dainik Bhaskar
पिता के इंतजार में बच्चे अपने चाचा के घर।
  • पुलिस ने बच्चों को चाइल्ड लाइन पहुंचाया, इसके बाद बच्चों को चाचा के सुपुर्द किया गया, पुलिस की कोशिशों के बाद भी नहीं मिले पिता

गरीबी से बेहाल एक पिता अपने बच्चों को बीती रात दुर्ग थाना अंतर्गत तहसील कार्यालय के सामने स्थित यात्री प्रतीक्षालय में छोड़ गया। बच्चों में एक लड़का और तीन लड़कियां हैं। सभी की उम्र 9 वर्ष से कम है। पिता ने गुरुवार की रात करीब साढ़े 10 बजे अपने 9 वर्षीय बेट के 450 रुपए दिए।

बाकी की तीनों छोटी बेटियों को 5-5 रुपए का सिक्का दिया और यह कहकर निकल गया कि गाड़ी छोड़कर आता हूं। यह पिता फिर नहीं लौटा। शुक्रवार को पूरे दिन इन बच्चों और पुलिस ने पिता का इंतजार किया। पिछले करीब डेढ़ साल से इस पिता को शहर में भीख मांगकर गुजर-बसर करते देखा गया। वह में बच्चों के साथ कभी बस स्टैंड तो कभी रेलवे स्टेशन में नजर आता। एक बार तो चाइल्ड लाइन की टीम ने इन बच्चों का रेस्क्यू भी किया, बाद में पिता को फटकार लगाते हुए छोड़ भी दिया।

जानिए, आखिर क्या कहकर बच्चों को छोड़ चला रहा पिता
बात गुरुवार रात करीब 10.30 बजे की है। तहसील कार्यालय के चार बच्चे फुटपाथ पर टीन शेड के नीचे यात्री प्रतीक्षालय में सो रहे थे। बारिश हो रही थी। इस दौरान ब्राहम्ण पारा के रितेश शर्मा वहां पहुंचे। उन्होंने बच्चों के बारे में जानकारी ली। कुछ पता नहीं चला तो टीआई राजेश बागड़े को खबर दी। इसके बाद चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंची। इस बीच बच्चों से पहले घुलने-मिलने का प्रयास किया गया।

पापा बोले... कहीं जाना मत मैं अभी गाड़ी छोड़कर वापस आता हूं
हाथ में बिस्किट का पैकेट,कमर से नीचे लटकती जींस पहने 9 साल का करण शुक्रवार सुबह बाल कल्याण समिति के बाहर बने चबूतरे पर बैठा था। इसी दूसरे भाई-बहन बैठे थे। करन ने बताया कि रात को पापा उमेश (परिवर्तित नाम) तहसील के सामने छोड़ गए। कहा कही जाना मत मैं गाड़ी छोड़कर आता हूं। इसी दौरान पुलिस वाले आ गए। हम सभी को गाड़ी में बैठाया और थाने ले आए।

पिछले डेढ़ साल से सड़कों पर ही गुजार बसर कर रहे चारों बच्चे
बाल कल्याण समिति के सामने चारों भाई बहन के चाचा ने बताया कि वह और बच्चों के पिता साथ में रहते थे। भाई उमेश की पत्नी करीब तीन साल पहले दो छोटे बच्चों को लेकर घर छोड़कर चली गई। इसके बाद भाई ने अपने हिस्से की संपत्ति बेच दी। चारो बच्चों के लेकर निकल गया। शुक्रवार को डेढ़ साल बाद बच्चों को देखा है। चारो बच्चों के साथ उनके पिता डेढ़ साल से इसी तरह सड़कों पर घूम रहे हैं।

चाचा की कस्टडी में बच्चे
बच्चों को अस्थाई तौर पर चाचा को सौंप दिया गया। बच्चों के परिजन की आर्थिक और सामाजिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
-श्रेष्ठा जोशी, अध्यक्ष सीडब्ल्यूसी

पिता की तलाश कर रहे
बच्चों के साथ कोई अनहोनी न हो। इसलिए चाइल्ड लाइन को खबर दी। पिता को तलाश रहे हैं।
-राजेश बागड़े, टीआई दुर्ग कोतवाली

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