नई सुविधा:हिमोफीलिया के मरीजों को जिला अस्पताल से अब मुफ्त लगेगा इंजेक्शन, मिलेगी राहत

भिलाई2 महीने पहले
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  • एक मरीज को हर माह 30 से 40 हजार रुपए खर्च लगता है

हिमोफीलिया के मरीजों को अब जिला अस्पताल से जरूरी इंजेक्शन निशुल्क मिलेगा। जिले में मौजूद 13 मरीजों के लिए संचालनालय को मांग-पत्र भेजा गया है। वहां से बजट मिलने के बाद सीजीएमएससी इस जरूरी इंजेक्शन की खरीदारी करेगा। आगे जिले के 13 मरीजों के लिए इंजेक्शन की खेप जिला अस्पताल में उपलब्ध हो जाएगी। बता दें कि यह इंजेक्शन पीड़ित हर मरीज को हर महीने लगती है, जिसकी कीमत 30-40 हजार रुपए तक होती है। राज्य हिमोफीलिया सोसाइटी ने ने तीन दिन पहले सीएमएचओ से मिलकर आवेदन किया था।

जानिए इंजेक्शन नहीं लगने से क्या परेशानी
इंजेक्शन नहीं लगने से मरीजों के मुंह में या मसूड़ों में ब्लीडिंग हाेना, वैक्सीनेशन या इंजेक्शन के बाद खून निकलना, जोड़ों में ब्लीडिंग होने से सूजन या दर्द हाेना, मल- मूत्र में ब्लड आना, बार-बार नाक से खून बहना, मुश्किल डिलीवरी के बाद नवजात के सिर से ब्लड निकलना, दिमाग में ब्लीडिंग के कारण सिरदर्द झेलना पड़ता है।

इंजेक्शन लगने से मरीजों को यह फायदा
हिमोफीलिया के मरीजों को ही फैक्टर इंजेक्शन लगाया जाता है। इस इंजेक्शन में वही तत्व होता हैं, जिसकी कमी से मरीज को खून बहने की अलग-अलग परेशानियां होती है। जिस मरीज में जितनी कमी होती है, उतनी मात्रा में इस इंजेक्शन को देते हैं। इसके लगने के कुछ घंटे बाद ही असर शुरू हो जाता है। यह बहुत जरूरी होता है।

जानिए, यह बीमारी क्या और क्यों होती है...
हीमोफीलिया को ब्लीडिंग डिसऑर्डर (रक्तस्राव विकार) कहते हैं। यह जेनेटिक बीमारी है जो बहुत कम लोगों में पाई जाती है। यह देश में जन्मे प्रत्येक 5,000 पुरुषों में से 1 पुरुष को होती है। देश में हर साल लगभग 1300 बच्चे हीमोफीलिया के साथ जन्‍म लेते हैं। इस रोग में शरीर के बाहर बह रहा खून जल्दी नहीं रुकता।

संचालनालय को पत्र लिखा, मिलते ही लगाएंगे
जिले में हिमोफीलिया के कुल 13 मरीज है। फैक्टर इंजेक्शन ही इनका इलाज है। एक मरीज को औसतन महीने में 30 से 40 हजार रुपए को इंजेक्शन लगता है। सभी इस इंजेक्शन का वहन नहीं कर सकते हैं। इसलिए संचालनालय से मदद मांगी गई है।
-डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ, दुर्ग

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