नृत्य दिवस:शास्त्रीय नृत्य में छात्राओं ने धरती मां व जन्मभूमि का बताया महत्व

भिलाई6 महीने पहले
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  • गर्ल्स कॉलेज की पूर्व और वर्तमान छात्राओं ने ऑनलाइन दी प्रस्तुति
  • गोष्ठी भी हुई: जीवन व नृत्य को जोड़ती कविता सुनाई

अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस पर गर्ल्स कॉलेज की पूर्व और वर्तमान छात्राओं ने ऑनलाइन शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें भूमि वंदना के जरिए जहां जमीन और धरती माता का महत्व बताया। वहीं मातृ वंदना के माध्यम से जन्मभूमि का महत्व बताया। साथ ही कोविड-19 के संक्रमण से बचने के उपाय भी बताए।

संस्था के नृत्य विभाग की ओर से हुए कार्यक्रम में स्वर, लय, ताल और पद मुद्रा का छात्राओं ने अद्भुत संगम दिया। इसमें दीपिका साहू ने जीवन और नृत्य को जोड़ते हुए कविता पाठ किया। शेफाली सेन ने नृत्य दिवस की अवधारणा प्रस्तुत की। साथ ही नृत्य को आत्मा से जोड़ने वाली कला बताई। शारदा एवं काजल ने कोविड-19 से बचाव का संदेश देने वाला नृत्य की प्रस्तुति दी। इसे वृहद रूप में तैयार करने और वेबसाइट पर डालने की जानकारी दी।

पूर्व छात्र निकिता पांडेय ने छोटे बच्चों को नृत्य सिखाने की बात कही तो विभा कसेर भरत नाट्यम सीखते समय खुद के अनुशासन की अनुभूति बयान की। रिया टेंभुरकर ने कहा कि शास्त्रीय नृत्य से उन्हें नृत्य की बारीकियों को समझने में आसानी हुई। वह कोरियोग्राफी करना चाहती हैं। जम्मू में बच्चों को शास्त्रीय नृत्य भरत नाट्यम का प्रशिक्षण देने वाली कीर्ति कश्यप ने कहा कि महाविद्यालय में प्राथमिक तौर पर भरत नाट्यम सीखना उनके जीवन का सबसे अच्छा अनुभव रहा। वे भी नृत्य सिखा रहीं।

छात्राओं ने अपने नृत्य के हुनर को बनाए रखा, यह उपलब्धि: डॉ.तिवारी

संस्था प्राचार्य डॉ. सुशीलचंद्र तिवारी ने कहा, यह गौरव की बात है कि अंचल में सिर्फ गर्ल्स कॉलेज में ही नृत्य में स्नातक तक का कोर्स है। छात्राओं में सीखने की अधिक रुचि है। विभाग की पूर्व छात्राएं अपने स्थानों पर नृत्य का हुनर बनाए और रुचि बनाए रखे हैं। यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसमें पीजी क्लास खोलने की पहल शासन से की जाएगी। इसके लिए प्रयास होगा।

अपने अनुभवों को जीवन में उतारने का प्रयास करें, यह अलग अनुभव: ऋचा

विभागाध्यक्ष डाॅ. ऋचा ठाकुर ने कहा कि स्नातक स्तर पर हर तरह की छात्राएं आती हैं। कुछ जल्दी सीखती हैं तो कुछ देरी से, लेकिन दोनों ही तरह की छात्राएं यहां के अनुभव को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करती हैं और पढ़ाई पूरा करके जाने के बाद भी जुड़ाव महसूस करती हैं। इतिहास की सहायक प्राध्यापिका शबीना बेगम ने कहा कि नृत्य के माध्यम से छात्राएं अपना करियर भी बना सकती हैं। इसके उदाहरण भी हैं। ऑनलाइन आयोजन में अन्य वक्ताओं ने भी छात्राओं को आगे भी अपने जीवन में नृत्य कला को जीवंत रखने प्रेरित किया। कहा कि यह विधा केवल एक मनोरंजन का साधन ही नहीं, इसमें एक अच्छा करियर, अपनी संस्कृति को संजोए रखने की ललक भी जागती है। आज ऐसी कई महिलाएं जिन्होंने नृत्य की विधा से एक बेहतर करियर बनाया है।

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