विशेषज्ञों की राय:इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक ने जारी की सलाह कहा-जिले में संक्रमण दर कम तो भेज सकते हैं स्कूल

भिलाई20 दिन पहले
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  • स्कूलों से दूर रहने के कारण बच्चों के व्यवहार में आ रहा असामान्य परिवर्तन

35 दिनों से जिले की कोरोना संक्रमण की दर 1 % से भी कम है। सरकारी और निजी स्कूल 2 सिंतबर से खुल गए हैं। लेकिन निजी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति अब भी नहीं के बराबर है। बच्चे स्कूल नहीं जा रहा हैं, इसे लेकर आईएपी (इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक) ने एडवाइजरी जारी की है।

इसमें कहा गया है कि 17 महीने से हम उम्र के बच्चे स्कूल नहीं जा रहे। वे स्कूल से दूर हैं। ऐसे में बच्चों में मानसिक परेशानियां सामने आने का खतरा बढ़ गया है। उनके व्यवहार में असामान्य परिवर्तन हो रहा है। वे अकेले रहने, लोगों से बात नहीं करने, अपने में मगन रहने लगे हैं। आईपीए ने बच्चों को स्कूल भेजने की सलाह जारी की है। इसमें कहा गया है कि संक्रमण दर 15 दिनों से 5 % से नीचे है। एक लाख जनसंख्या पर मात्र 20 कोरोना मरीज मिले हैं। 60 % से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेशन हो गया है। वहां स्कूल भेज सकते हैं।

आईपीए ने स्कूल व पालकों के लिए जारी की गाइडलाइन

  • स्कूल टीचर, स्टॉफ को वैक्सीन की एक डोज लगी हो।
  • 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के युवाओं को वैक्सीन की एक डोज लगी हो।
  • स्कूल जाने वाले बच्चों के परिजनों को भी वैक्सीन लगी हो।
  • बीपी, शुगर आदि से पीड़ित स्टॉफ को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हो।
  • बीपी, शुगर आदि से पीड़ित बच्चों को डॉक्टरों की सलाह पर स्कूल भेजा जाए।

विशेषज्ञ डॉक्टरों से जाने बच्चों में होने वाली परेशानियां
हाईपर एक्टिविटी : इस बीमारी से पीड़ित बच्चे ज्यादा सक्रिय दिखते हैं। लेकिन उनका बरताव असामान्य हो जाता है। जो उनको अच्छा लगता है, वही करते हैं। पालकों के समझाने पर भी उनकी नहीं सुनते हैं।
डिप्रेशन : इसकी चपेट में आने वाले बच्चे गुमसुम रहते हैं। हाईपर एक्टिव में खुद में खुश रहते हैं, लेकिन इसमें वे हमेशा उदास रहते हैं। 17 महीने से अकेले रहने से बच्चों मेंं ऐसी परेशानी हो रही है।
3- ऑटिज्म : इस बीमारी से पीड़ित बच्चे किसी से बात नहीं करते हैं। नए व्यक्ति के आने पर डर से जाते हैं। परिवार के सदस्यों से तो बात करते हैं, लेकिन नया कोई भी आ जाता है, तो उनकी बातचीत रुक जाती है।
नोट : जैसा कि बाल रोग विशेष डॉ. एपी सावंत, डॉ. डी ज्ञानी, डॉ. रुपेश अग्रवाल ने बताया।

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