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मुक्तांजलि निशुल्क शव वाहन योजना में गड़बड़ी:टेंडर में तय वाहन के बजाय छोटा हाथी से शव ढोया बावजूद कर दिया 33 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

भिलाई11 दिन पहलेलेखक: संजय पाठक
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नियम विरुद्ध टाटा एस (छोटा हाथी) का उपयोग हो रहा। - Dainik Bhaskar
नियम विरुद्ध टाटा एस (छोटा हाथी) का उपयोग हो रहा।
  • टाटा एस में चालक सहित सिर्फ दो व्यक्तियों के बैठने की अनुमति, जबकि शासन ने जिन वाहनों के लिए अनुबंध किया उसमें 5 लोगों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए
  • छग की जगह इंदौर के आरटीओ से कराया गया वाहनों का रजिस्ट्रेशन

मुक्तांजली निशुल्क शव वाहन योजना के तहत शवों को ढोने के मामले में बड़ी धांधली सामने आई है। शर्तों के अनुसार टाटा वेंचर या मारुति ईको वाहन का उपयोग मॉडिफाई करके एम्बुलेंस के रूप में किया जाना था, लेकिन इसके स्थान छोटा हाथी यानी टाटा एस को मॉडिफाई करके राज्य के 27 जिलों में चलाई गई। ऐसे करीब 104 वाहन चलाए गए। इसमें से 40 वाहन खनिज संस्थान न्यास से दिए गए। 64 वाहन अनुबंध करने वाली कंपनी की है। अनुबंध दिसंबर 2018 में हुआ। हर महीने करीब एक करोड़ रुपए का भुगतान स्वास्थ्य विभाग ने किया। यह भुगतान अब भी जारी है। इस तरह अब तक करीब 33 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

लोगों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने मुक्तांजलि निशुल्क शव वाहन योजना शुरू की। इसके लिए दिसंबर 2018 में भोपाल की कंपनी कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटी प्रो कैंप से अनुबंध किया गया। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक शवों को ढोने के लिए मारुति ईको या फिर पैसेंजर वाहन टाटा वेंचर का उपयोग करना था। लेकिन इसके स्थान पर अनुबंधित कंपनी ने टाटा एस यानी छोटा हाथी का उपयोग किया। शासन से इसकी अनुमति नहीं दी थी। राज्य के सभी 27 जिलों में टाटा एस का ही संचालन किया गया। शिकायत के बाद मामला सामने आया।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से हुई शिकायत, जांच नहीं हो रही

  • 2018 दिसंबर में शवों को ढोने के लिए हुआ अनुबंध
  • 33 करोड़ का अभी तक किया जा चुका है भुगतान
  • 104 गाड़ियां राज्य के सभी जिलो में चलाई जा रही

टाटा एस में बैठने की सिर्फ दो को अनुमति, अनुबंध वाले में 5 की मंजूरी
जिन वाहनों का मुक्तांजलि निशुल्क शव वाहन योजना के तहत उपयोग किया जा रहा है, उसका पंजीयन इंदौर आरटीओ में कराया गया है। इसमें सिर्फ दो को बैठने की अनुमति है। वहीं अनुबंध की शर्तों के मुताबिक किसी भी डेड बॉडी के साथ 5 लोग वाहन में बैठाना है। इसमें डेड बॉडी, दो अटेंडर, एक ड्राइवर और एक हेल्पर शामिल है।

सार्वजनिक स्थानों पर सिर्फ खनिज न्यास से मिली गाड़ियां ही रख रहे
बड़े अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर खनिज संस्थान न्यास के तहत संचालित वाहनों को रखा जा रहा है। इसे सीजी 02 सीरिज दिया गया है। यह गाड़ियां मारुति ईको है। वहीं एजेंसी से मोडिफाई कराई गई गाड़ियों को एमपी 09 सीरिज दिया गया है। यह टाटा एस यानी छोटा हाथी वाहन है। इसमें सामान ढोना है। इन वाहनों को ग्रामीण या फिर दूरस्थ इलाकों में रखा गया है।

सीधी बात;एम अमित गर्ग, प्रबंधक, कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटी प्रो कैंप सीएफ
अनुबंध की शर्तों के अनुसार कर रहे काम, कंपनी ने ऐसी गाड़ी अभी लांच की

मुक्तांजलि योजना के चल रहे वाहन अनुबंध की शर्त के अनुसार नहीं हैं?
नहीं, चल रही गाड़ियां अनुबंध की शर्तों के अनुसार है।
टाटा वेंचर या मारुति ईको के स्थान पर टाटा एस चल रही है?
जो गाड़ियां लिखी है उसका उपयोग कर रहे हैं। टाटा एस का फेब्रिकेशन किया गया है। कंपनी से ही मोडिफाई कराया है।
जब टाटा वेंचर या मारुति ईको लेना था तो टाटा एस क्यों लिए?
टाटा वेंचर सवारी गाड़ी है। तब कंपनी के शव ले जाने वाली गाड़ी नहीं थी। कंपनी ने अभी ऐसी गाड़ी लांच की है।

अभी मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है शिकायत मिलने पर निश्चित जांच होगी
अभी मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। न ऐसे किसी प्रकरण की जांच चल रही है। जब जांच के लिए मामला आएगा या किसी की शिकायत आएगी, तब उसकी जांच की जाएगी। अभी मेरे संज्ञान में किसी ने ऐसे मामले को सामने नहीं लाया है।
-डॉ. आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग छग

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