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  • Made The Schedule Of The Whole Family At Home Isolation, Took Medicines On Time, Did Not Let The Morale Fall, All The Members Recovered In 20 Days

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:होम आइसोलेशन में ही पूरे परिवार का शेड्यूल बनाया, समय पर दवाइयां ली, मनोबल को गिरने नहीं दिया, 20 दिन में ही ठीक हो गए सभी सदस्य

भिलाई7 महीने पहले
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सुरेश साहू | कोरोना वॉरियर - Dainik Bhaskar
सुरेश साहू | कोरोना वॉरियर
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • पढ़िए आज पांचवी कड़ी- 85 वर्षीय बुजुर्ग को बचाया, आइसोलेशन में रहा पूरा परिवार

मेरा परिवार आजाद चौक कसारीडीह में रहता है। मैं बीएसपी कर्मी हूं। 30 मार्च को मेरे छोटे भाई दीपक साहू (48 साल) को हल्का बुखार आने लगा। वह टेस्ट करवाने गया तो एंटीजन टेस्ट पॉजीटिव आया। उसके बाद मैं और परिवार के पूरे सदस्यों ने टेस्ट करवाया। आरटीपीसीआर टेस्ट चार दिन बाद आना था। इसलिए हम सभी होम क्वारेंटाइन हो गए। रिपोर्ट आई तो मैं सुरेश साहू (57 साल), मेरी बहू ममता साहू (42 साल), बेटा पुष्पेंद्र (22 साल), भतीजा विनीत (17 साल) कोरोना संक्रमित निकले।

मेरी पत्नी त्रिवेणी 52 साल और 82 साल के पिता भैय्याराम साहू ही संक्रमित होने से बचे थे। मेरे और परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती 85 साल के बुजुर्ग पिता भैय्याराम साहू को बचाना था। हम सभी लोग संक्रमित थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव थी। इस उम्र में दूसरी बीमारी से भी ग्रसित हैं। इसलिए सुबह का नाश्ते से लेकर रात तक खाने पीने का इंतजाम करने और नियमित दवाई खिलाने के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदारी सौंपी।

वे पूरे दिन अलग कमरे में रहते। हम सभी से दूर रखकर पूरे 20 दिन तक नहीं मिले। कोरोना से आए दिन जान-पहचान और नाते रिश्तेदारों की मौत की खबरें सुनते तो हमारा दिल बैठ जाता। इसलिए पहले तो लगा कि अस्पताल में भर्ती होना ठीक रहेगा लेकिन हम लोगों ने आपस में समन्वय बनाकर होम आइसोलेशन में रहने का रिस्क उठाया। परिवार के पांचों संक्रमित सदस्य अलग-अलग कमरे में रहे। बुजुर्ग पिता को भी अलग रूम में रखवाया।

इस निर्णय की वजह से यह हुआ कि परिवार के लोगों के लिए कमरे कम पड़ गए। इसकी वजह से मेरी पत्नी किचन में सोती। बंद कमरे में हम लोग एक दूसरे से फोन पर ही स्वास्थ्य की जानकारी लेते। सभी ने सेप्रेट प्लस ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर का उपयोग किया। हर दिन प्लस, ऑक्सीजन लेबल और बुखार की जांच खुद करते। हर दिन हम स्वास्थ्य विभाग के आइसोलेशन टीम के डॉक्टरों के संपर्क में रहे। तीन दिन तक बुखार नहीं उतरा। बहू को सिर दर्द और चक्कर की शिकायतें तक आई। हमारा शरीर टूट चुका था। ऐसा लगता कि जैसे जान ही न हो। खाना तक नहीं खिलाता। उसके बाद भी किसी भी सदस्य ने हिम्मत नहीं हारी।

हम यह ठान चुके थे कि अस्पताल में नहीं घर में स्वस्थ्य होकर दिखाएंगे। लगातार डॉक्टरों के निर्देश का पालन करते हुए किट की दवाई ली। हम लोगों ने घर पर खुद से भी उपाय किए जिसकी वजह से अस्पताल की नौबत नहीं आई। सुबह, दोपहर और शाम भांप लिया। गले से संक्रमण फेफड़े में फैलने से बचाने के लिए गर्म पानी का गार्गल करते रहे। तुलसी, नीम, गिलोय, अदरक, कालीमिर्च और दालचीनी की थोड़ी-थोड़ी मात्रा लेकर काढ़ा बनाया। खाली पेट इस काढ़े के सेवन से फायदा पहुंचा। हल्दी डालकर गरम पानी पिया।

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