भिलाई स्टील प्लांट दे रहा सांसे:कोरोना मरीजों के लिए यहां से सप्लाई हो रहा ऑक्सीजन, हर रोज 265 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन

भिलाई7 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ समेत देशभर में कोरोना संक्रमण के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। लेकिन छत्तीसगढ़ हर दिन न केवल प्रदेश के अस्पतालों में बल्कि देश के दूसरे राज्यों को भी ऑक्सीजन पहुंचा रहा है। इसमें BSP (भिलाई स्टील प्लांट) की अहम भूमिका है।

राज्य के ऑक्सीजन आपूर्ति के नोडल अधिकारी डॉक्टर अय्याज फकीर भाई तंबोली ने दैनिक भास्कर को बताया कि छत्तीसगढ़ ऑक्सीजन उत्पादक राज्य है। यहां से तेलांगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों को ऑक्सीजन की निर्बाध सप्लाई की जारी है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 388 मीट्रिक टन प्रतिदिन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ केवल 160 मीट्रिक टन का ही उपयोग कर रहा है। शेष ऑक्सीजन निर्बाध रूप से अन्य राज्यों को भेजी जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऑक्सीजन बनाने वाले 29 प्लांट हैं। इनमें से 27 प्लांट में जहां ऑक्सीजन सिलेंडर भरा जाता है। कुछ हवा लेकर बनाते हैं और कुछ BSP और उसके साझेदारी वाले उपक्रम प्रैक्सेयर प्लांट से लिक्विड ऑक्सीजन लेकर सिलेंडरों में भरते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 210 मीट्रिक टन उत्पादन करने की है और स्टोरेज क्षमता 4007 मीट्रिक टन की है। लेकिन सर्वाधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन ‌BSP और उसकी साझेदारी वाले एक उपक्रम प्रैक्सेयर प्लांट में होता है।

यह भिलाई स्टील प्लांट है, जिसकी नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी।
यह भिलाई स्टील प्लांट है, जिसकी नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी।

ऑक्सीजन का उत्पादन के आंकड़े
‌BSP पिछले साल अगस्त से लेकर 31 मार्च 2021 तक 13002 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति कर चुका है, जो देश के अन्य राज्यों के अस्पतालों में हो रहा है। इसमें सबसे अधिक तेलंगाना को 5921 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन दिया जा चुका है। मध्य प्रदेश को 2640 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई हुई है। छत्तीसगढ़ को 1955 मीट्रिक टन, महाराष्ट्र को 999 मीट्रिक टन, आंध्र प्रदेश को 665 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश को 389 को मीट्रिक टन, ओड़िशा को 190 मीट्रिक टन, गुजरात को 154 मीट्रिक टन, कर्नाटक को 89 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है।

भिलाई स्टील प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है।
भिलाई स्टील प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है।

डिमांड के आधार पर आपूर्ति

1 अप्रैल को भिलाई इस्पात संयंत्र में 279.35 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ था। जबकि आपूर्ति केवल 75.60 मीट्रिक टन थी। लेकिन सप्ताह भर बाद 7 अप्रैल को आपूर्ति का आंकड़ा 142.35 तक पहुंच गया। देश भर में जैसे-जैसे ऑक्सीजन की मांग बढ़ती गई, आपूर्ति के आंकड़े भी बढ़ते चले गए। 10 अप्रैल को भिलाई से करीब 294 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। 21 अप्रैल को अकेले भिलाई से 365 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए BSP ने अब बचे हुए ऑक्सीजन को विभिन्न राज्यों को देना शुरू कर दिया है। ताकि जितना ज्यादा हो सके लोगों को ऑक्सीजन मिल जाए और जान बचाई जा सके।

भिलाई स्टील प्लांट ने बिना रुके लिक्विंड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है।
भिलाई स्टील प्लांट ने बिना रुके लिक्विंड ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है।

ऑक्सीजन पर सियासत
प्रदेश में ऑक्सीजन को लेकर विपक्षी दल के पास कई सवाल हैं। पूर्व सीएम रमन सिंह ने कहा कि BSP हिंदुस्तान का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ के मरीज बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं। ये व्यवस्था की चूक है। इसका कारण है कि मुख्यमंत्री एक दिशा में चल रहे हैं और स्वास्थ्य मंत्री एक दिशा में चल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव कहते हैं कि रमन सिंह के 15 सालों के कार्यकाल में ऑक्सीजन की सुविधा वाले बिस्तरों की संख्या केवल 1242 थी। दिसंबर 2018 के बाद इनमें तेजी से इजाफा हुआ और अब 7042 ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तर प्रदेश के अस्पतालों में है।

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