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बीएसपी:पोस्ट कोविड बीमारियों के इलाज के लिए नहीं मिल रहा अवकाश; कोरोना से इलाज के लिए अधिकतम 30 दिन तक छुट्‌टी का प्रावधान

भिलाई4 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

बीएसपी प्रबंधन ने कोरोना प्रभावित होने पर उसका इलाज कराने के लिए कर्मियों को भले ही 30 दिन तक का स्पेशल लीव देने का प्रावधान किया है, लेकिन कोरोना से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए इस तरह का प्रावधान नहीं किया गया। इस वजह से प्रभावित कर्मियों को अपने जमा अवकाश में से एडजस्ट करना पड़ रहा है।

शहर के साथ-साथ प्लांट में कार्यरत कर्मियों के भी कोरोना की चपेट में आने के बाद बीएसपी प्रबंधन ने इलाज के लिए स्पेशल लीव का प्रावधान कर रखा है। इसमें इलाज के लिए प्रभावित कर्मी 15 दिनों से लेकर एक महीने तक अवकाश ले सकता है। इस अवकाश को उनके जमा अवकाश से नहीं काटा जा रहा।

इतना ही नहीं प्रबंधन ने यह भी प्रावधान कर रखा है कि यदि परिवार का कोई सदस्य कोरोना प्रभावित होने पर कर्मी को क्वारेंटाइन के लिए भी स्पेशल लीव दिया जा रहा है। कोरोना के बाद 4 महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे, बावजूद 30 दिन अवकाश मिला।

दिक्कत ऐसी भी:जमा अवकाश से करना पड़ रहा समायोजन
प्रबंधन ने अब तक नहीं किया स्पष्ट, कर्मी परेशान

पोस्ट कोविड में ब्लैक फंगस जैसी बीमारी शामिल है। जिसके इलाज की लंबी प्रक्रिया है और उसके लिए प्रबंधन खुद ही प्रभावित कर्मियों को बाह इलाज के लिए रेफर कर रहा है। ऐसे में जब कर्मी इलाज के दौरान अवकाश के लिए प्रबंधन से स्पेशल लीव दिए जाने का आवेदन कर रहे हैं तो उन्हें यह कहकर लौटाया जा रहा है कि स्पेशल लीव का प्रावधान केवल कोरोना इलाज के लिए है। पोस्ट कोविड बीमारियों की इलाज के लिए नहीं। फिलहाल वे अपने जमा अवकाश में से ही छुट्टी के लिए आवेदन करें।

संदिग्ध मरीज स्पेशल लीव से वंचित किए जा रहे
स्पेशल लीव को लेकर पोस्ट कोविड मरीजों के साथ-साथ वे कर्मी भी परेशान है जिनका इलाज तो पूरा कोरना का किया गया लेकिन रिपोर्ट में संदिग्ध कोरोना मरीज होने का उल्लेख कर दिया गया। इस वजह से उन्हें भी स्पेशल लीव का लाभ नहीं मिल पा रहा। इलाज के दौरान ली गई छुट्टियां अपने जमा अवकाश में समायोजित करना पड़ रहा है। कर्मियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि जब उनका इलाज कोरोना का किया गया तो प्रबंधन द्वारा स्पेशल लीव स्वीकृत क्यों नहीं की जा रही?

आश्रितों का सोसाइटी ने भी रोक दिया भुगतान
इधर कोरोना से मृत कर्मियों के आश्रितों की परेशानियां कम नहीं हो रही। अनुकंपा नियुक्ति का पेंच अभी भी फंसा हुआ है। जिसके कारण फाइनल पेमेंट की प्रक्रिया अटकी हुई है। वहीं कई आश्रितों की परेशानियां सोसाइटियों के कारण बढ़ गई है। बताया गया कि जो मृत कर्मी सोसाइटी में किसी साथी कर्मी को लोन दिलाने के लिए गारंटर बने थे, उनकी मौत के बाद सोसाइटी संचालक कर्ज लिए कर्मी से नया गारंटर लाने कह रहे है। नहीं ला पाने की स्थिति में सोसाइटी संचालक मृत कर्मियों के खाते से भुगतान रोक दिया है।

बीएसपी से दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पाने से इंश्योरेंस क्लेम में भी परेशानी
इसके अलावा जिन कर्मियों ने अपने खर्च पर अलग से इंश्योरेंस कराया है, उसके क्लेम के लिए भी आश्रितों को बीमा कंपनी और बीएसपी के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बताया गया कि यदि मृत कर्मी का इलाज बीएसपी के सेक्टर-9 अस्पताल में हुआ है तो उस स्थिति में बीमा कंपनी क्लेम सेटलमेंट से जुड़े दस्तावेजों में सेल-बीएसपी का सील लगाए जाने पर ही भुगतान करने की बात कह कर आवेदकों को लौट रहे हैं। जबकि दस्तावेजों में मृत कर्मी जिस विभाग में कार्यरत रहा है, उसके पर्सनल विभाग की सील लगाकर दी जा रही है।

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