उपलब्धि / अब हाई स्पीड और हैवी लोड वाली ट्रेनों के संचालन में होगी आसानी, बीएसपी ने नए ग्रेड की रेल पटरी की पहली खेप को किया रवाना

नए ग्रेड की रेल पटरी की पहली खेप को सीईओ ने किया रवाना नए ग्रेड की रेल पटरी की पहली खेप को सीईओ ने किया रवाना
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नए ग्रेड की रेल पटरी की पहली खेप को सीईओ ने किया रवानानए ग्रेड की रेल पटरी की पहली खेप को सीईओ ने किया रवाना

  • आर-260 ग्रेड रेल्स” की पहली खेप एमपी के खन्ना बंजारी के लिए हुई रवाना

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

भिलाई. देश में अब हाई स्पीड और हैवी लोड वाली ट्रेनों का संचालन आसानी से किया जा सकेगा। इसके लिए बीएसपी में नई आर-260 ग्रेड की रेल पटरी का उत्पादन शुरू हो गया है। मंगलवार को इसकी पहली खेप रेलवे के लिए सीईओ व डायरेक्टर प्रोजेक्ट अनिर्बान दासगुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
भारतीय रेलवे की रिसर्च, डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा “आर-260 ग्रेड रेल्स” के लिए बेहद कड़े तकनीकी मापदंड का ड्राफ्ट जारी किया। यूरोपियन नार्मस् ईएन-13674 से कहीं अधिक कड़े व कई मायनों में अलग हैं।

इसलिए यह पटरी होगी मजबूत
वेनेडियम एक सख्त सिल्वर रंग का धातु है। इस पर आघात का असर भी कम होता है। वेनेडियम का शुद्ध किया जाए तो इसके उपर एक पतली आक्साइड की परत बन जाती है, जिससे भीतर की धातु सुरक्षित रहती है और घर्षण कम होता है। जिससे सामान्य पटरी से इसकी लाइफ अधिक होगी। 

ऐसे शुरू हुआ पटरी का उत्पादन
27 जून को वेनेडियम एलॉय स्टील के हीट का उत्पादन प्रारंभ किया और जिसके तहत एसएमएस-3 में इस नए ग्रेड के कुल 14 हीट में 2430 टन वेनेडियम एलॉय स्टील का उत्पादन किया गया। इस स्टील से बने ब्लूम्स का उपयोग 28 जून को बीएसपी के अत्याधुनिक यूनिवर्सल रेल मिल द्वारा “आर-260 रेलपांत की रोलिंग की रोलिंग की गई।

यूरोपियन स्पेसिफिकेशन से कहीं ज्यादा कठोर
उद्घाटन अवसर पर सेल के निदेशक (प्रोजेक्ट्स) व बीएसपी के सीईओ दासगुप्ता ने कहा कि आर-260 रेलपांत का स्पेसिफिकेशन यूरोपियन देशों के स्पेसिफिकेशन से कहीं ज्यादा कठोर है। आरडीएसओ, इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों तथा सेल की टीम ने विकसित करने में 2 महीने में मेहनत की है। 

आसान नहीं था नए ग्रेड के रेलपांत का उत्पादन
नए ग्रेड के रेलपांत का उत्पादन करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। भारतीय रेलवे द्वारा निर्धारित नॉर्मस् के तहत इस विशेष स्टील में हाइड्रोजन की मात्रा 1.6 पीपीएम तक की सीमा में रखना आवश्यक है। जबकि यूरोपियन नॉर्म्स में हाइड्रोजन की मात्रा 2.5 पीपीएम तक रखा जा सकता है। इसलिए इस कड़े टेक्नीकल स्पेसिफिकेशन को प्राप्त करने के लिए स्टील मेकिंग से लेकर रोलिंग प्रक्रिया तक बेहद कड़े प्रचालनिक अनुशासन का पालन किया जाना आवश्यक है। यह बड़ी उपलब्धि है।

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