नया फरमान:अब शोध में नकल पर रोकी जाएगी वेतन वृद्धि, अब तक केवल शोध करने वाले स्टूडेंट्स पर ही होती थी कार्रवाई

भिलाई6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • अब निदेशक पर भी रहेगी नजर

शोध में नकल पकड़े जाने पर अभी तक सिर्फ शोधार्थी पर ही कार्रवाई होती थी। उसका शोध निरस्त कर दिया जाता था, लेकिन अब गाइड (शोध निदेशक) पर भी कार्रवाई की जाएगी। गाइड पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा। प्रतिबंध के दौरान गाइड किसी भी शोधार्थी का मार्गदर्शन नहीं कर पाएगा। यदि गलती करने वाला किसी शासकीय या निजी संस्था में सेवाएं दे रहे हैं तो ऐसे शोधार्थी और गाइड की दो वार्षिक वेतन वृद्धि भी रोकी जाएगी। पीएचडी में होने वाले नकल की रोकथाम के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने नए नियम जारी किए हैं। सोमवार को डीयू की ओर से इसकी जानकारी दी गई।

पेनल्टी में शोधार्थी का शोध भी होगा वापस
शोधार्थियों और शोध निदेशकों से कहा गया है कि प्रथम स्तर की पेनल्टी में शोधार्थी के शोध कार्य को वापस किया जाएगा। एक साल तक शोध के निष्कर्षों का प्रकाशन नहीं कर सकेगा। दूसरे स्तर पर शोधार्थी की ओर से प्रकाशन के लिए उपलब्ध कराए गए शोध कार्यों को वापस लेने के साथ दो साल तक कोई भी शोधकार्य नहीं कर पाएंगे। यदि वह किसी शैक्षणिक या प्रशासनिक संस्थान में कार्यरत हैं तो उनकी एक साल की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जाएगी। साथ ही शोध निदेशक दो साल तक किसी भी शोधार्थी का मार्गदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा।

यूजीसी ने किया है पीडीए का गठन, करेंगे निरीक्षण
शोध में नकल रोकने के लिए यूजीसी ने प्रत्येक शोध संस्थानों को प्लेजियारिज्म डिसीप्लीनरी अथॉरिटी (पीडीए) का गठन करने को कहा है। इससे शोध संबंधी नई अवधारणा सामने आ पाएगी। यह अथॉरिटी शोधकार्य के मुख्य बिंदुओं में शारांश, संक्षेपिका हाइपोथीसिस, अवलोकन, शोध परिणाम एवं शोध निष्कर्ष, सुझावों आदि में नकल की सूक्ष्मता से जांच करेगी। नकल का पता लगाने यूजीसी से अनुमोदित साफ्टवेयर भी उपलब्ध है। शोध संस्थानों में एकेडेमिक मिसकंडक्ट पैनल (एएमपी) का भी गठन करना अनिवार्य होगा।

कुलपति ने सभी रिसर्च स्कॉलर्स की ली थी क्लास
कुलपति डॉ अरुणा पल्टा ने नकल रोकने और नए टॉपिक के संदर्भ में पिछले दिनों शोधार्थियों और शोध निदेशक की क्लास ली थी। उन्होंने कहा था कि जिस संदर्भ का उपयोग शोध ग्रंथ में किया जा रहा है, उसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए। साथी टॉपिक ऐसा हो जो लोगों के काम आए। ऐसा कोई भी सब्जेक्ट ना लें जो सिर्फ लाइब्रेरी की शोभा बढ़ाएं। अतः टॉपिक सोच समझकर और लोगों के उपयोग में आने वाले विषयों को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए। इससे शोधार्थी और शोध निदेशक दोनों को लाभ होगा। अन्य जरूरी जानकारी भी दी गई।

डीयू ने जारी किया नया आदेश, पालन आवश्यक
डीयू ने इसे लेकर आदेश जारी किया है। साथ ही कहा है कि वरिष्ठ प्राध्यापकों और डीयू से इस बारे में नियमित जानकारी ली जाए। ताकि शोध की प्रक्रिया को और अधिक बेहतर बनाया जा सके। छात्रों भी गंभीरता पूर्वक रूचि लें। पहले भी इसे लेकर गाइडलाइन तय की गई, लेकिन उनका पालन नहीं हो पा रहा था। इसे देखते हुए डीयू ने नियमित रूप में ऐसे सभी शोधार्थियों के शोध उनके निदेशक से जुड़ी जानकारी को लेकर निरीक्षण किए जाने का निर्णय लिया है। इसे लेकर आगामी दिनों में निरीक्षकों की टीम भी गठित किया जाना तय किया गया है।

खबरें और भी हैं...