सेंटरों में धूल खा रही मशीनें:कोविड से इलाज के लिए 12 अस्पतालों के लिए 85 वेंटिलेटर खरीदे, उसे ऑपरेट करने चिकित्सक नहीं

भिलाई10 महीने पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर।

कोरोना के नए स्ट्रेन ओमिक्रॉन को लेकर पूरे देश में दहशत की स्थिति है। दुर्ग जिले में इसका असर देखने को मिल रहा है। इसके चलते तीसरी लहर की आशंका बढ़ गई है। बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने राज्यों को इलाज के सभी इंतजाम दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

लेकिन दुर्ग में विशेषज्ञ डॉक्टरों व ट्रेंड स्टाफ की कमी है। पहली लहर के बाद यहां कोरोना के इलाज के लिए दो सरकारी अस्पताल बने, दूसरी लहर के बाद उनके लिए जरूरी मशीनें खरीदी गईं थीं।

सबसे बड़े सेंटर का दूसरा प्लांट अब भी शुरू नहीं
कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए जिले का सबसे बड़ा अस्पताल सरकारी मेडिकल कॉलेज, कचांदुर में बना है। यहां एक ही छत के नीचे बड़े व बच्चों के इलाज की सभी सुविधाएं की गई है। इसके लिए दो-दो ऑक्सीजन प्लांट लगाना तय हुआ था, लेकिन अब तक एक ही चालू हुआ है। दूसरे बड़े प्लांट का काम अभी अधूरा है।

सेंटरों में धूल खा रही मशीनें, देखरेख भी नहीं

कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बने इस सेंटर में पिछले तीन महीने से एक भी मरीज नहीं है। लेकिन कैजुअल्टी को रनिंग हाल में रखा गया है। इसके लिए स्टाफ की रेगुलर ड्यूटी भी लगाई गई है। मशीनें धूल खा रही हैं।

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