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प्लानिंग हो रही फेल:स्कूलों को बनाया क्वारेंटाइन सेंटर, नहीं बन रहा मध्यान्ह भोजन, सूखा राशन भी नहीं बांटा

भिलाई4 महीने पहले
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  • जिले के 72 स्कूलों के करीब 24 हजार बच्चों को राशन नहीं दिया जा सका

जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को 45 दिन का सूखा राशन दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक जिले के 72 स्कूलों के करीब 24 हजार बच्चों को राशन नहीं दिया जा सका है। इसमें कुम्हारी, चरोदा, भिलाई-3 समेत धमधा, पाटन और दुर्ग के विभिन्न स्थानों के बच्चे शामिल हैं। यहां राशन नहीं बंट पाने का सबसे बड़ा कारण है कि या तो यहां के स्कूलों को बाहर आए श्रमिकों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है या फिर इन दिनों कोरोना संक्रमण के कारण रेड जोन घोषित कर दिया गया है। स्कूल बंद होने के कारण इन दिनों बच्चों को मध्याह्न भोजन के स्थान पर सूखा राशन दिया जा रहा है। इसमें चावल, दाल आदि चीजें शामिल हैं। अप्रैल में पहली बार राशन बांटा जा चुका है। अभी दूसरी बार राशन दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य शासन से निर्देश आया है। इसके तहत दुर्ग जिले के 973 शासकीय प्राइमरी स्कूल और मिडिल स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा 1ली से 8वीं तक के बच्चों को सूखा राशन दिया जा रहा है। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों और अक्षय पात्र को एजेंसी बनाया गया है। इसके माध्यम से राशन का वितरण किया जा रहा। 

परेशानी: बच्चों को देना है 45 दिन का सूखा राशन, स्कूल बंद होने की वजह नहीं मिला 

एक नजर इन आंकड़ो पर..  
89,000 : बच्चे हैं जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में
65,000 : बच्चों को बांटा जा चुका है दूसरी बार का राशन
24,000 : बच्चों का राशन अभी तक नहीं दिया जा सका
216 : स्कूलों को श्रमिकों के लिए बनाया गया है क्वारेंटाइन सेंटर।

तीनों ब्लाक का यह क्षेत्र हैं क्वारेंटाइन या रेड जोन में
कोरोना पॉजिटिव मिल रहे मरीजों के कारण कुम्हारी में तीन, चरोदा में दो, खुर्सीपार में एक कैंप में दो, कोहका में दो, नेहरू नगर में एक, टाउनशिप में एक, रूआबांधा में एक, दुर्ग में तीन, अमलेश्वर में दो, अंडा में दो, धमधा में दो, छावनी में दो समेत जिले में 24 स्थानों को रेड जोन बनाया गया है। 

राशन के साथ देना है स्कूल के बच्चों को अंकसूची
पिछले दिनों संयुक्त संचालक दुर्ग शिक्षा संभाग ने दुर्ग, बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव और बालोद के जिला शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली थी। इसमें उन्होंने विभिन्न कार्यों की समीक्षा की। बैठक में में उन्होंने सभी डीईओ को प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों की अंकसूची भी वितरित करने को कहा। इसके पीछे उनका तर्क था कि बच्चों के अभिभावक जब राशन लेने आएंगे तो अंकसूची भी लेकर चले जाएंगे।

स्कूलों में मार्कशीट का भी नहीं हो पा रहा है वितरण
जिले में क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए स्कूलों में अभी किसी को भी आने जाने की अनुमति नहीं है। इसकी वजह से वहां पढ़ रहे बच्चों की मार्कशीट का वितरण भी शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि कुछ स्कूलों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाए जाने के पहले ही कक्षा 1ली से लेकर 8वीं तक के बच्चों को अंकसूची दी जा चुकी है, लेकिन अधिकांश स्कूलों में इसकी शुरुआत नहीं हो पाई है। इसमें तीनों दुर्ग, पाटन और धमधा में संचालित प्राइमरी और मिडिल स्कूल शामिल हैं। अफसरों का कहना है कि स्कूलों में रहने वाले श्रमिक जैसे ही अपने घरों में चले जाएंगे, वैसे ही स्कूलों को सैनिटाइज किया जाएगा। 

जिले के इन स्कूलों में बांटा जा रहा है राशन 
विकासखंड  प्राथमिक    मिडिल  

दुर्ग    245    165
पाटन    182    100
धमधा    185    96
महायोग    612    361

अब तक नहीं कोई गंभीर
सामने आई परेशानी को लेकर अब तक प्रशासनिक महकमें में कोई गंभीर नहीं है। न ही इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। 

मध्याह्न भोजन के बदले दिया जा रहा राशन
लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को मध्याह्न भोजन के बदले अनाज दिया गया था। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा था कि बच्चे एक वक्त का भोजन स्कूल में कर लेते हैं। अभी स्कूल बंद हैं और बच्चे घरों में रह रहे हैं। ऐसे में उनके हिस्से का भोजन सूखे राशन के रूप में वितरित किया जाए। 

अभी बचे हैं क्वारेंटाइन सेंटर और रेड जोन एरिया
पिछले बार की तरह इस बार भी बच्चों को 45 दिन का सूखा राशन दिया जा रहा है।  हजार बच्चों को राशन बांटा जा चुका है। जिन स्कूलों को क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है या फिर जिस क्षेत्र को अभी रेड जोन घोषित किया गया है, वहां राशन का वितरण करने में दिक्कतें हो रही हैं।
प्रवास सिंह बघेल, डीईओ दुर्ग

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