बड़ी उपलब्धि:रेलवे ने फिर उच्च क्षमता वाले रेलपांत की रखी डिमांड, यूआरएम में उत्पादन हुआ शुरू

भिलाई7 महीने पहले
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बीएसपी के यूआरएम में नए ग्रेड के रेलपांत का उत्पादन शुरू हो गया है। - Dainik Bhaskar
बीएसपी के यूआरएम में नए ग्रेड के रेलपांत का उत्पादन शुरू हो गया है।
  • 260 ग्रेड रेल्स की है मांग, पुरानी लाइनों को उखाड़कर नई लगाने की है रेलवे की योजना
  • नई तकनीक पर भरोसा : रेलवे में छोटी व सामान्य रेलपांत का इस्तेमाल बंद

भारतीय रेलवे ने बीएसपी से एक बार फिर उच्च क्षमता वाले आर-260 ग्रेड रेल्स की डिमांड रखी है जिसका इस्तेमाल पुराने रेल्स को निकालकर को नए रेल्स बिछाने में किया जाएगा। बीएसपी के यूनिवर्सल रेलवे (यूआरएम) में इस स्पेशल ग्रेड के रेल का उत्पादन भी शुरू हो गया है।

भारतीय रेलवे ने छोटी रेलपांत के साथ-साथ सामान्य रेलपांत का इस्तेमाल अब लगभग बंद ही कर दिया है। अब वह बीएसपी के एक्सक्लूसिव उत्पाद आर-260 ग्रेड के रेल्स का ही इस्तेमाल कर रहा है। बीते वर्ष 30 जून को इस ग्रेड के रेल्स के पहले खेत की सप्लाई खन्ना बंजारी (मध्यप्रदेश) में की गई थी। उसके बाद वित्त वर्ष 2020 21 समाप्त होते तक करीब 12000 टन आर-260 ग्रेड रेल्स की सप्लाई की गई। इस वर्ष भी रेलवे ने बीएसपी के नए ग्रेड के रेल की डिमांड की है। जिसके बाद अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से उत्पादन भी शुरू कर दिया गया है। बीएसपी प्रबंधन भारतीय रेलवे की समय-समय पर मिलने वाली डिमांड को समय पर पूरा करने प्रयासरत है।

बीएसपी में उत्पादों की इसलिए भी बढ़ रही डिमांड

  • भारतीय रेलवे पुराने सामान्य रेल्स को निकाल कर नए रेल्स बिछाने की योजना पर काम कर रहा है। 2 वर्ष पूर्व शुरू हो चुका।
  • भारतीय रेलवे अपने ट्रेनों की स्पीड को बढ़ाने जा रहा है। इसके लिए सामान्य रेल्स के मुकाबले बीएसपी का नया उत्पाद भरोसेमंद साबित हो रहा है।
  • इसके अलावा देश के जिन हिस्सों में अभी तक रेल सेवा नहीं पहुंची है भारतीय रेलवे की योजना वहां तक रेल लाइन बिछाने की है।

जानिए, यूरोपियन नॉर्म्स से भी बेहतर हमारी रेल्स
भारतीय रेलवे द्वारा निर्धारित नॉर्मस् के तहत इस विशेष स्टील में हाइड्रोजन की मात्रा 1.6 पीपीएम तक रखना आवश्यक है। जबकि यूरोपियन नॉर्म्स में हाइड्रोजन की मात्रा 2.5 पीपीएम तक रखा जा सकता है। इस कड़े टेक्नीकल स्पेसिफिकेशन को प्राप्त करने स्टील मेकिंग से लेकर रोलिंग प्रक्रिया तक बेहद कड़े प्राचलिक अनुशासन का पालन करना जरूरी है। इस ग्रेड में वेनेडियम एलॉय स्टील की आवश्यकता होती है।

बदल गया यूरोपियन स्टैंडर्ड, क्वालिटी भी बदली गई
रेल्स की क्वालिटी को सर्टिफाई करने यूरोपियन स्टैंडर्ड का पालन किया जाता है। इसमें भी काफी ग्रेड्स होते हैं। बीते साल तक बीएसपी यूरोपियन में स्टैंडर्ड के यूआईसी -60 के तहत यूटीएस-90 ग्रेड की रेल्स सप्लाई कर रहा था। हाल ही में यूरोपियन स्टैंडर्ड में भी बदलाव आया है। अब 60-ई-1 स्टैंडर्ड रेल्स की क्वालिटी का पैमाना हो गया है।

रेल मिल में भी नए ग्रेड का उत्पादन, कर रहे हैं अपग्रेड
भारतीय रेलवे द्वारा बीएसपी के नए ग्रेड आर-260 की बढ़ती डिमांड को देखते हुए प्रबंधन ने उसके उत्पादन बढ़ाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। अभी तक इस ग्रेट की रेल्स का उत्पादन यूआरएम में ही हो रहा है। उसकी योजना अब इस ग्रेड के रेल्स का उत्पादन रेल मिल में भी करने की है। इसके लिए रेल मिल में जरूरी अपग्रेड किए जा रहे हैं। इस पर अभी काम जारी है। जल्द अपग्रेड होने के बाद रेल मिल में भी उत्पादन शुरू होगा।

वेनेडियम युक्त एलॉय स्टील से किया जाता है निर्माण
आर-260 ग्रेड रेल्स का निर्माण वेनेडियम युक्त एलॉय स्टील से किया जाता है। जिससे इसे उच्च क्षमता प्रदान की जा सके। आर-260 ग्रेड रेल्स 550 एमपीए का न्यूनतम यील्ड हासिल होता है। इस प्रकार इस ग्रेड के रेल्स से उच्चतम यील्ड क्षमता प्राप्त होती है। इसी प्रकार आर-260 ग्रेड रेल्स के निर्माण के लिए अत्यधिक शुद्ध इस्पात की जरूरत होती है जिसमें कुल ऑक्सीजन की एक निर्धारित मात्रा होना आवश्यक है।

रेलवे ने पिछले साल 10 लाख टन रेल्स की खरीदी की थी
बीते वर्ष भारतीय रेलवे ने बीएसपी से करीब 10 लाख टन रेल्स की खरीदी की थी। जिसमें से करीब साढे 7 लाख टन रेल्स का उत्पादन यूआरएम में किया गया था। बाकी के ढाई लाख टर्न रेल का उत्पादन रेल मिल में हुआ। इस बार भी लगातार उत्पादन किया जा रहा है।

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