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लापरवाही:जिले में मौत के केस में भी एंटीजेन टेस्ट करा रहे जिम्मेदार

भिलाई6 दिन पहले
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कोरोना संदिग्ध डेड बॉडी का टेस्ट कराने में लापरवाही हो रही है। रैपिड एंटीजेन टेस्ट कराकर ही संदिग्ध डेड बॉडी को पॉजिटिव या निगेटिव बताया जा रहा है। जबकि मौत के केस में स्पष्ट तौर पर ट्रू-नॉट/आरटीपीसीआर या आरटीपीसीआर टेस्ट कराने के निर्देश हैं। ताज्जुब यह कि इसी गलती तब भी की जा रही, जब एंटीजेट टेस्ट से निगेटिव आने वाली डेड बॉडी ट्रृ-नॉट या आरटीपीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव आ चुकी है। जिले के दोनों प्रमुख अस्पतालों में 10 दिनों के भीतर ब्राड डेड पहुंचे मरीजों का आंकड़ा देखें तो 5 से ज्यादा शवों को जिम्मेदारों ने एंटीजेन टेस्ट से निगेटिव बताकर डेड बॉडी, परंपरागत तरीके से अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपी है। तीन दिनों पहले जिम्मेदारों ने रैपिड एंटीजेन किट से जांच कराकर जिला अस्पताल के वार्ड ब्वाय की डेड बॉडी परिजनों को सौंप दी थी।

अभी कितने टेस्ट हो रहे, किसका क्या रोल
रैपिड किट एंटीबॉडी टेस्ट: यह टेस्ट ब्लड सैंपल से होता है। इससे स्क्रीनिंग की जाती है। जो पहले कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं, उनमें एंटीबॉडी बनी की नहीं, इससे यह जाना जाता है। इसकी रिपोर्ट 10 से 15 मिनट में आ जाती है। निगेटिव आने वाले पॉजिटिव आ सकते हैं।
रैपिड किट एंटीजेन टेस्ट: यह टेस्ट स्वाब से किया जाता है। पॉजिटिव आने के केस में यह टेस्ट कंफरमेट्री माना जाता है। लेकिन जिसे यह निगेटिव बता दे, आगे के टेस्ट में उनके पॉजिटिव की संभावना रहती है। लेकिक पॉजिटिव आने वाले आगे के अन्य टेस्ट में पॉजिटिव ही आते हैं।
ट्रू-नॉट टेस्ट: ट्रू-नॉट टेस्ट को अब कंफरमेंट्री टेस्ट मानते है। अंतर यह कि इससे पहले स्क्रीनिंग की जाती है। उसमें जो पॉजिटिव मिलते हैं, उन्हें कंफर्म करते हैं।

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