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प्रदेश के औसतन 150 लोगों को रोशनी मिलती रही:मौत के 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी, इसलिए नेत्रदान हुआ कम

भिलाई14 दिन पहले
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  • नेत्रदान से हर साल 150 से ज्यादा को मिलती रही रोशनी, कोरोनाकाल में यह घटकर सिर्फ 8 रह गई, जिन लोगों ने अस्पताल में दम तोड़ा उन्हीं के नेत्र हो पाए दान, पहले से हो चुका था कोरोना टेस्ट

वर्ष 2020 से पहले तक कार्निया ट्रांसप्लांट कर हर साल प्रदेश के औसतन 150 लोगों को रोशनी मिलती रही, लेकिन मार्च 2020 में आई कोरोना महामारी की वजह इसकी सालाना औसत संख्या 4 पर पहुंच गई है। क्योंकि कोरोना आने के बाद आई डोनेशन के लिए नेत्रदाता की मौत से 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट जरूरी कर दी गई है। ऐसे में उन्हीं नेत्र दाताओं का डोनेशन हो पाया है, जिनकी अस्पतालों में भर्ती के दौरान ही म़ृत्यू हुई है। जिन नेत्र दाताओं ने अपने घर पर दम तोड़ा है, पंजीकरण के बाद भी उनका आई डोनेशन नहीं कराया जा सका है। क्योंकि मौत होने पर 6 घंटे के भीतर ही नेत्रदान किया जा सकता है। 2020-21 में अस्पतालों भर्ती के दौरान दम तोड़ने वाले दानदाताओं की संख्या मात्र 17 रही है।

50 % आंखों को दूसरी जरूरतों में भी उपयोग में लाया जाता है
रोशनी के लिए उपयोग होने वाली आंखों के बाद बची हुई 50% आंखें दूसरी जरूरतों में उपयोग की जाती हैं। क्योंकि कार्निया ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकृत कुछ मरीजों में थोड़ा डिफेक्ट होता है, जिसे बची आंखों का यूज कर दूर किया जाता है। विशेषज्ञ शत-प्रतिशत आंखों का यूज होना बताते हैं।

आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए प्रदेश में कोई नियम ही नहीं बना है
छत्तीसगढ़ में आर्गन ट्रांसप्लांट का अब तक नियम ही नहीं बना है, इसलिए कोविड की वजह उनमें बाधा आने की कोई बात ही नहीं है। देहदान रेगुलर होता रहा है। लेकिन इसमें कोविड के आरटीपीसीआर टेस्ट की कोई परेशानी नहीं होती है। रिपोर्ट आने तक बॉडी को प्रिजर्व कर सकते हैं।

कार्निया ट्रांसप्लांट के लिए प्रदेश मे मेकाहारा को मिली जिम्मेदारी
कार्निया ट्रांसप्लांट के लिए प्रदेश में मेकाहारा को जिम्मेदारी दी गई है। यहां आई बैंक होने से मरणोपरांत नेत्र दाताओं की आंखें प्रदेश भर से इस जगह पर रखी जाती है। लोगों का पंजीयन भी होता है। आंखें मिलने पर प्रतीक्षा सूची के अनुसार उन्हें बुलाकर यहीं भर्ती रखा जाता है।

300 डोनेशन होता रहा, 2 वर्षों में मात्र 17 नेत्रदान हो पाए
^प्रदेश में हर साल औसतन 300 आंखें डोनेट की प्रक्रिया होते रही है। जिसमें 50 % का हम सीधे ताैर पर रोशनी देने में, बची 50 % आंखों को दूसरी परेशानी में इस्तेमाल करते हैं। पिछले दाे वर्षों में मात्र 17 आंखें प्राप्त हुई है। क्योंकि हर दानदाता का मौत के बाद आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी है।
-डॉ. सुभाष मिश्रा, राज्य प्रोग्राम ऑफिसर

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