बंद फैक्ट्री में कट रही थीं चोरी की गाड़ियां:पुलिस ने पूछताछ की तो बताई झूठी कहानी, मगर पकड़ा गया; एक आरोपी फरार

भिलाई8 महीने पहले
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बंद फैक्ट्री के अंदर अवैध रूप से लोहा काटने का काम किया जा रहा था। - Dainik Bhaskar
बंद फैक्ट्री के अंदर अवैध रूप से लोहा काटने का काम किया जा रहा था।

भिलाई में सालों से बंद पड़ी आयरन फैक्ट्री में दिल्ली से आकर कुछ लोगों ने रहना शुरू किया और उसे चोरी की गाड़ियों को काटने की फैक्ट्री बना डाला। हर दिन इस फैक्ट्री में कई चोरी के वाहन कटने के बाद भी पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसका खुलासा तब हुआ जब शनिवार सुबह सीएसपी छावनी कौशलेंद्र देव पटेल कुछ सामान खरीदने निकले और उन्हें सालों से बंद इस फैक्ट्री को देखकर संदेह हुआ। सीएसपी ने जब जामुल पुलिस को बुलाकर फैक्ट्री के अंदर देखा तो वहां का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। यहां चोरी की साइकिल, दो पहिया वाहन से लेकर चार पहिया और ट्रक जैसे वाहन के स्क्रैप का जखीरा लगा था।

पुलिस ने यहां से एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया है। वहीं एक आरोपी फरार हो गया है। पुलिस ने जब आरोपी से पहले पूछताछ की तो उसने झूठी कहानी बताई थी। मगर जब पुलिस ने उसे फैक्ट्री के कागजात मांगे तो वह गुमराह करने लगा था। कहने लगा बंद पड़ी फैक्ट्री उसके पिता की है। पिता की मौत के बाद से वह बंद पड़ी है और वह लोग उसी के अंदर रहते आ रहे हैं। उसने बताया कि वह सालों से इसी फैक्ट्री में स्क्रैप का कारोबार करते आ रहे हैं। उन्होंने इसका एक छोटा प्लांट भी लगाया है और बिजली कनेक्शन भी ले रखा है। लेकिन पुलिस ने जब उनसे कंपनी के संबंध में दस्तावेज मांगे तो उनके पास नहीं थे। जिसके बाद ही पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा है।

कटिंग के लिए पड़ी चोरी की पुरानी साइकिलें।
कटिंग के लिए पड़ी चोरी की पुरानी साइकिलें।

सीएसपी छावनी कौशलेंद्र देव पटेल ने बताया कि वह जामुल क्षेत्र में कुछ सामान खरीदने के लिए गए थे। इस दौरान उन्हें सालों से बंद पड़ी फैक्ट्री आरडी स्टील दिखी। पूछने पर पता चला कि यहां पुरानी गाड़ियों को काट कर उसे बेचा जाता है। सीएसपी ने तुरंत जामुल थाना टीआई गौरव पांडेय को टीम के साथ बुलाया। पुलिस ने अंदर देखा तो बड़े पैमाने पर गाड़ियों का स्क्रैप, फैक्ट्री में डंप था। पुलिस को देखते ही रियाज नाम का एक आरोपी वहां से भाग खड़ा हुआ, जबकि दानिश नाम का युवक पकड़ा गया।

फैक्ट्री के अंदर कटिंग होने के लिए खड़ा ट्रक
फैक्ट्री के अंदर कटिंग होने के लिए खड़ा ट्रक

कट जाती हैं गाड़ियां, खोजता रहता है परिवहन विभाग

RTO सूत्रों के मुताबिक जिले में बड़े पैमाने पर चोरी की गाड़ियां बिना बिक्री कबाड़ के दाम पर बेच दी जाती हैं। वाहन मालिक लाखों रुपए टैक्स बकाया रहने वाली गाड़ियों को कबाड़ के भाव बेच देते हैं। कबाड़ी भी सस्ते दर पर मिलने के कारण उस गाड़ी के बिक्री का परिवहन विभाग से एनओसी भी नहीं लेते हैं। ऐसे में परिवहन विभाग टैक्स वसूली के लिए गाड़ियों को खोजता रहता है और गाड़ियां स्क्रैप के भाव बिक जाती हैं। इसी धंधे की आड़ में कबाड़ी चोरी की गाड़ियों को भी खरीद कर उसका स्क्रैप बनाकर बेच रहे हैं।

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