बीएसपी:तैयार पटरियों की पहली खेप रेलवे को भेजी गई, 14 साल पहले की गई थी ट्रायल रोलिंग

भिलाईएक महीने पहले
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पटरियों को लोड कर भारतीय रेलवे को भेजा गया पहला रैक। - Dainik Bhaskar
पटरियों को लोड कर भारतीय रेलवे को भेजा गया पहला रैक।
  • 14 वैगन्स में रेल पटरियों को लोड करके भारतीय रेलवे को उपयोग के लिए किया रवाना

बीएसपी द्वारा तैयार की गई एंड-फोर्ज्ड थिक वेब एसिमेट्रिक रेल्स को भारतीय रेल की पटरियों के क्रॉस ओवर पॉइंट्स में उपयोग के लिए झंडी दिखाकर रवाना किया। भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता द्वारा 20 सितंबर को संयंत्र के कार्यपालक निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों और रेल और स्ट्रक्चरल मिल बिरादरी और इससे जुड़े विभागों के सदस्यों की उपस्थिति में रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल द्वारा लगभग 815 टन एंड-फोर्ज्ड थिक वेब ऐसेमेट्रिक (टीडब्ल्यूए) रेल के 429 जोड़े रेल्स को 14 वैगनों में लोड कर एक रेक डिस्पैच किया गया।

यह भारतीय रेलवे को सीधे बीएसपी द्वारा भेजी गई टीडब्ल्यूए रेलों की सबसे बड़ी खेप है। यह महत्वपूर्ण उत्पाद भारतीय रेलवे द्वारा पटरियों के साथ स्विच पॉइंट के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है। यह उत्पाद ट्रेनों को तेज गति से ट्रैक बदलने में सक्षम बनाता है। अपने नेटवर्क में इन उन्नत स्विच पॉइंट रेल की तैनाती ने रेलवे की मांग को पूरा किया है। जो आधुनिक है।

बीएसपी के अलावा तीन देशों में होता है उत्पादन

भिलाई इस्पात संयंत्र की रेल और स्ट्रक्चरल मिल भारतीय रेलवे के लिए एक विशेष ग्रेड रेल, थिक वेब ऐसेमेट्रिक (टीडब्ल्यूए) रेल की सफलतापूर्वक रोलिंग की है। इसका रेलवे पटरियों के साथ क्रॉस-ओवर पॉइंट्स में उपयोग किया जाता है। इस ग्रेड की रेल अब तक आयात की जाती रही है। कोई भी घरेलू स्टील कंपनी इसका व्यावसायिक उत्पादन नहीं करती है। विश्व में कोरस, यूके, ऑस्ट्रिया, फ्रांस की कंपनियां ही इसका उत्पादन करती हैं। इसकी लगातार डिमांड भी है।

14 साल पहले की गई थी ट्रायल रोलिंग

संयंत्र ने पहली बार वर्ष 2006 में थिक वेब ऐसेमेट्रिक रेल का ट्रायल रोलिंग शुरू किया था। सेल द्वारा रेलवे बोर्ड के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल में एक नया एंड फोर्जिंग प्लांट स्थापित किया गया था। यह प्लांट एक संयुक्त उपक्रम हाइड्रोलिकों, डेनमार्क और बीके इंजीनियरिंग, भिलाई द्वारा 48 करोड़ रुपए की लागत से वर्ष 2009 में लगाया गया। यहां बनने वाली रेल पटरियां पूरी तरह से आधुनिक हैं, जो ट्रेन की स्पीड के लिए मददगार है।

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