बीएसपी:जूनियर अफसरों की वेतन विसंगति नहीं हुई दूर, कमेटी की रिपोर्ट शून्य

भिलाई2 महीने पहले
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बीएसपी सहित सेल के 2008 और 2010 बैच के जूनियर अफसरों को वेतन विसंगति का निराकरण होने के लिए और इंतजार करना होगा। इस समस्या के निराकरण के लिए सेल प्रबंधन ने जो सब कमेटी का गठन किया था, उसे लेकर सहमति नहीं बन पाने की वजह से रिपोर्ट को शून्य घोषित कर दी गई है।

बीएसपी सहित सेल में 2008 और 2010 में तीन हजार से अधिक कर्मचारी प्रमोशन के बाद अधिकारी बन गए। लेकिन जिस अवधि में वे पदोन्नत हुए, उन्हें पे रिवीजन का लाभ नहीं मिल पाया। इसकी वजह से वेतन विसंगति की स्थिति निर्मित हो गई। इस समस्या के निराकरण के लिए जूनियर अफसर बीते 12 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। सेफी भी इस दिशा में लगातार प्रयास करती रही है लेकिन अब तक नतीजा सिफर ही रहा है।

सेफी के पहल पर सेल प्रबंधन ने सब कमेटी का गठन किया। कमेटी ने रिपोर्ट प्रबंधन को सौंप भी दी। लेकिन उसने वेतन विसंगति को दूर करने के लिए जो अनुशंसा की, उस पर कार्पोरेट आफिस में पदस्थ सीनियर अफसरों के बीच ही सहमति नहीं बन पाई। जिसके कारण सब कमेटी की रिपोर्ट एक तरह से शून्य हो गई है। इसके बाद जूनियर अफसरों का वेतन विसंगति दूर होने का इंतजार अब और लंबा हो गया है।

सेफी चेयरमैन ने जूनियर अफसरों को दी जानकारी, नहीं बन पाई सहमति
आक्रोशित जूनियर अफसर जब मामले की जानकारी लेने बीते रविवार को सेफी चेयरमैन और ओए अध्यक्ष नरेंद्र बंछोर से मिलने पहुंचे तो उन्होंने साफ किया कि एसओटी और 2018 से 2008 और 2010 बैच के अधिकारी जो तुलना कर रहे हैं, उसे छोड़ दिया जाए क्योंकि उस पर सहमति नहीं बन पाई है। प्रबंधन के अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन पाने से सब कमेटी की रिपोर्ट भी शून्य कर दी गई है अब उसके अनुशंसा का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

एसओटी बैच के अधिकतम बेसिक से गणना, एरियर्स भी स्पष्ट नहीं हो पाया
बैठक में जूनियर अफसरों को बताया गया कि एसओटी के बैच से बेसिक का कैलकुलेशन किया जाएगा। उसमें जो अधिकतम अंतर होगा उसे आधार बनाते हुए जूनियर अफसरों एक जनवरी 2016 से एरियर्स का भुगतान किया जाएगा। हालांकि एक जनवरी 2016 से नोशनली गणनी की जाएगी, उसका एरियर्स दिया जाएगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। सेफी और ओए द्वारा एसओटी के बैच वाइज केवल बेसिक को लेकर एक्सरसाइज की जा रही है।

सेफी प्रबंधन को समझाने में रहा असमर्थ, आंदोलन की राह पर जूनियर अफसर
नाराज जूनियर अफसरों ने कहा कि वर्तमान कार्यकारिणी को 10 साल से वोट दे रहे हैं, लेकिन वेतन विसंगति पर अब तक सहमति नहीं बना पाए। कमजोरी हमारी हो या किसी और कि लेकिन हम उसे समझाने में असमर्थ हो गए हैं। जबकि संगठन के दबाव के कारण 2016 को पे अनामली देने के लिए प्रबंधन को तैयार होना पड़ा और अधिकारी को 3 हजार से 9 हजार तक दिया गया।

जानिए, वेतन विसंगति को लेकर दिक्कत, क्यों अटका है मामला
2008 और 2010 में कर्मचारी प्रमोट होकर अफसर बन गए। इसके बाद 2012 को हुए कर्मियों के वेतन समझौते में 17 प्रतिशत एमजीबी के लाभ से वे वंचित हो गए। वेतन समझौते की अवधि 5 साल थी। वहीं प्रमोट होने के बाद उन्हें अधिकारी के वेतन वृद्धि के साथ समाहित किया जाना था जो नहीं किया गया।

सेफी चेयरमैन ने कहा- प्रबंधन जल्द करेगा समाधान, इस पर चर्चा जारी
सेफी चेयरमैन नरेन्द्र कुमार बंछोर ने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में सेल चेयरमैन के साथ बैठक की। जिसमें वेतन विसंगति वाले मुद्दे को लेकर की गई पहल की विस्तार से जानकारी दी। सेफी चेयरमैन नाराज जूनियर अफसरों को बताया कि सेफी द्वारा लगातार इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

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