विरोध प्रदर्शन:हड़ताल पर जाने वाले यूनियनों को दी समझाइश, नहीं बनी बात

भिलाईएक महीने पहले
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वेतन समझौता और ग्रेच्युटी सीलिंग के विरोध में 16 दिसंबर की हड़ताल की सूचना देने वाले यूनियनों को मंगलवार को बीएसपी प्रबंधन ने तलब किया। प्रबंधन ने यूनियनों को यह कहते हुए समझाने की कोशिश की कि दोनों ही मुद्दों को लेकर प्रबंधन विचार विमर्श कर रहा है लिहाजा हड़ताल वापस ले लें। यूनियनों ने प्रबंधन के प्रस्ताव को ठुकराते हुए हड़ताल में करने पर अडिग रहने का निर्णय लिया।

वेतन समझौता और ग्रेच्युटी सीलिंग के विरोध में प्रस्तावित हड़ताल को लेकर प्रबंधन ने चर्चा के लिए सीटू उसके ठेका प्रकोष्ठ और इस्पात श्रमिक मंच के प्रतिनिधियों को तलब किया था। इसमें सीटू के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। ठेका प्रकोष्ठ संगठन से योगेश सोनी और मंच से महासचिव राजेश अग्रवाल उपस्थित रहे। इस्पात श्रमिक मंच ने वर्तमान वेतन समझौते को 1997 से भी बदतर वेतन समझौता करार दिया है।

यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों को 1997 की तरह 40 महीने के एरिया के साथ-साथ भत्तों के बकाया से वंचित होना पड़ा। वहीं ग्रेच्युटी सीलिंग और सीमित पे स्केल जैसे कर्मचारी विरोधी फैसले लिए गए हैं। आज बीएसपी कर्मचारियों को अधिकारियों की तुलना में 2 प्रतिशत कम एमजीबी, 8.5 प्रतिशथ कम पर्क्स सहित 18 महीने के पर्क्स के एरियर्स के मद में लाखों रुपए कम मिले है। मंच ने डिप्लोमा इंजीनियर्स (डेब) के 9 दिसम्बर के आंदोलन को समर्थन दिया है। यूनियन ने डेब के हड़ताल के निर्णय को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।

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