39 सरकारी अस्पतालों में दवा का टोटा:बीपी, शुगर के साथ बच्चों की खांसी का सीरप भी नहीं, फार्मासिस्टों ने इंट्री किए बिना बांट दी दवाएं, नतीजा- ऑनलाइन स्टॉक फुल

भिलाईएक महीने पहले
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अस्पताल में दवाओं के लिए खड़े मरीज। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में दवाओं के लिए खड़े मरीज।

जिले के 40 सरकारी अस्पतालों में से 39 में बीपी, शुगर, गैस की दवा के साथ ही बच्चों की खांसी का सीरप भी नहीं है। जिला अस्पताल लोकल परचेज कर मरीजों की जरूरत पूरी कर रहा है। शेष अस्पतालों से इन दवाओं के लिए मरीजों को निजी मेडिकल जाना पड़ रहा है। जरूरी दवाओं की ऐसी किल्लत एक दो दिन की नहीं बल्कि पिछले तीन महीने से बरकरार है। वीआईपी जिले के लिए यह जितना चौकाने वाला है, इसकी वजह उससे ज्यादा चौकाने वाली है। क्योंकि इसके लिए कोरोना की दूसरी लहर और उस दौरान फार्मासिस्टों का काम-काज का तरीका है।

जिला अस्पताल छोड़ शेष 39 अस्पतालों के फार्मासिस्टों ने अपने यहां की दवाओं की ऑनलाइन इंट्री किए बगैर बांट दी है, जिससे उनके स्टोर में तो दवाएं खत्म हो गई है, लेकिन उनका आनॅलाइन स्टॉक दिखा रहा है। चूंकि दवाओं की खरीदी प्रक्रिया इसी से जुड़ी हुई है, इसलिए ऑनलाइन उपलब्धता दिखने के कारण खरीदी की प्रक्रिया भी नहीं हो पा रही है। इससे मरीजों को भटकना पड़ रहा है। इधर अस्पतालों में दवाएं मंगाने के लिए शासन से आए आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। रोजाना सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बिना दवाई दिए लौटाया जा रहा। इससे विवाद भी हो रहा।

ऑनलाइन स्टॉक शून्य का आदेश, पर अमल अब तक नहीं
जरूरी दवाओं की खरीदारी प्रक्रिया शुरू करने के लिए राज्य से सभी अस्पताल प्रभारियों को अपने यहां के ऑनलाइन स्टॉक को शून्य करने का आदेश भी जारी किया है। पर उस पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। ऐसे में ग्राउंड पर खत्म इन दवाओं के खरीदारी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।

केस-1 : बुखार की दवा मिली, बीपी की खरीदनी पड़ी
खुर्सीपार निवासी डोमेंद्र साहू ने बताया कि वह बीपी व शुगर के मरीज हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुर्सीपार से दोनों की दवा लेते रहे हैं। लेकिन सोमवार को उन्हें बीपी की दवा नहीं दी गई है। दवा बांटने वाले कर्मी ने बताया कि बीपी की दवा खत्म हो गई है। बुखार की दवाएं मिली हैं। इसी तरह अस्पताल में दिनभर पहुंचे सभी मरीजों काे दवाएं नहीं होने की जानकारी देकर लौटा दिया गया। सभी ने निजी मेडिकल से दवाइयां खरीदी।

केस-2 : बच्ची को खांसी आ रही, सीरप उपलब्ध नहीं था
कांट्रेक्टर कॉलोनी की रहने वाली सरस्वती ने बताया कि उनके 5 वर्षीय बेटे को पिछले तीन दिनों से खांसी आ रही है। सुपेला में दिखाई तो डॉक्टर ने कुछ दवाओं के साथ ही खांसी का सीरप भी लिखा। दवा स्टोर लेने गई तो बताया गया कि सीरप आना बंद हो गया है। ऐसे में मैंने उसे निजी मेडिकल से खरीदा है। इसी तरह अस्पताल आने वाले दूसरे मरीजों की भी यही शिकायत रही। मरीजों ने बताया कि यह स्थिति बीते कई महीने से बनी हुई है।

अस्पतालों में दवाएं नहीं होने से डॉक्टर भी रोज हा रहे भी परेशान
जरूरी दवाएं नहीं होने से डॉक्टर भी परेशान हैं। खांसी के जिस मरीज को एमोक्सिलीन की जरूरत है, उसे सिप्रोफ्लेक्सेसिन देकर काम चलाया जा रहा है। गैस के लिए जिसे रेनीटिनीडिन देना है, उन्हें ओमिप्राजोल देना पड़ रहा है। बच्चों के लिए सीरप नहीं होने से उन्हें टैब्लेट, टुकड़ों में देने पड़ रहे हैं।

शिकायत नहीं आई है, यदि ऐसी स्थिति है तो दवाएं खरीदेंगे
अस्पतालों में दवाओं की कमी को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। कल ही मैं इसे दिखवाता हूं। यदि ऐसा है तो जांच करवाकर व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। जीवनदीप समिति के बजट से खरीदी की जा सकती है। -डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ, दुर्ग

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