बड़ी समस्या:कोयले के परिवहन के लिए रेलवे ने बढ़ाए वैगन इधर बीएसपी में आयरन ओर की सप्लाई प्रभावित

भिलाईएक महीने पहले
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  • वैगन की कमी के कारण दल्ली माइंस से बीएसपी मांग के अनुरूप नहीं पहुंच पा रहा आयरन ओर

देश में कोयला संकट से निपटने के लिए रेलवे ने कोल माइंस से बिजली संयंत्रों तक कोयले की सप्लाई बढ़ाने के लिए वैगनों की संख्या बढ़ा दी है। इसका असर बीएसपी में आयरन ओर की सप्लाई पर पड़ा है। वैगन के शार्टेज से दल्ली राजहरा माइंस से बीएसपी के डिमांड के अनुरूप आयरन ओर की सप्लाई नहीं हो पा रही है।

बीएसपी में ओर हैंडलिंग प्लांट में राॅ मटेरियल का रिजर्व स्टाक तक खत्म हो चुका है। आयरन ओर का ही स्टाक सामान्य परिस्थितियों में एक सप्ताह के लिए रिजर्व रखा जाता है। अभी स्थिति यह है कि रिजर्व स्टाक पूरा तरह खत्म हो चुका है। नौबत यहां तक आ चुकी है कि प्लांट में जो वैगन आती भी है तो उसके अनलोड होते ही आयरन ओर की फर्नेस में सप्लाई करनी पड़ रही है।

डिमांड से तीन रैक की कम सप्लाई, पहले 9 रैक होती थी
बीएसपी में प्रतिदिन 9 रैक आयरन ओर की डिमांड रहती है। जबकि दल्ली राजहरा से वर्तमान में 6 रैक आयरन ओर की सप्लाई की जा रही है। इस तरह तीन रैक की कमी का बीएसपी प्रबंधन को सामना करना पड़ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए आरएमडी की झारखंड स्थिति खदान प्रबंधन से भी संपर्क किया गया लेकिन भी पहले बारिश और अब वैगन की कमी के कारण नियमित सप्लाई संभव नहीं हो पा रहा।

पानी की वजह से भी लोडिंग का टाइमिंग बढ़ा
बताया गया कि झारखंड में जोरदार बारिश की वजह से वहां की आयरन ओर माइंस में पानी जमा हो गया। इस वजह से भी माइनिंग के साथ-साथ लोडिंग और अनलोडिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यानि वैगन की कमी और उस पर लोडिंग-अनलोडिंग में लग रहे अधिक समय से भी सिस्टम प्रभावित हो रहा है। यही वजह है कि बोकारो प्लांट को भी आयरन ओर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए बीएसपी से दो रैक आयरन ओर की डिमांड किया है।

तीन दिन से दल्ली राजहरा में अनलोडिंग का काम बंद
वैगन की कमी की वजह से दल्ली में 24 अक्टूबर से वैगन नहीं आने की वजह से आयरन ओर की लोडिंग बंद है। यही स्थिति माइंस को लेकर भी है। पहले किसी तरह वैगनों की व्यवस्था कर सप्लाई की व्यवस्था की जा रही थी।

मंडला से आ रही डोलोमाइट वैगन के कारण प्रभावित
बीएसपी में फ्लक्स राॅ मटेरियल के रूप में डोलोमाइट का इस्तेमाल किया जाता है। नंदिनी माइंस में इतना उत्पादन नहीं होता कि वह बीएसपी की डिमांड पूरी कर सके। लिहाजा मध्यप्रदेश के मंडला के खदानों से मंगाई जा रही। वैगन की कमी से इस पर भी प्रभाव पड़ा है।

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