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दुर्ग जिले में दो बुजुर्गों ने कोरोना से जीती जंग:92 और 90 साल की महिलाएं स्वस्थ्य होकर लौटीं घर, ढोल नगाड़ों की धुन पर परिजन ने किया गया स्वागत

दुर्गएक महीने पहले
भिलाई के जामुल में रहने वाली 92 साल की तीजबती साहू ने 12 दिनों में जबकि 90 साल की राधिका बाई ने 5 दिनों में कोरोना से जंग जीत ली।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के प्यारे श्री राधा कृष्ण कोविड सेंटर और जिला अस्पताल से सुखद खबर आई है। यहां पर 92 और 90 साल की बुजुर्ग महिलाओं ने कोरोना को पटखनी दी है। परिजन ने उनकी जीत का जश्न ढोल नगाड़ों के साथ मनाया। 92 साल की तीजबती साहू को जब श्री राधा कृष्ण सेंटर लाया गया था तब उनका ऑक्सीजन लेवल 74 था। सीटी स्कोर 14/25 शुगर लेवल हाई व ब्लड प्रेशर लो था, वो बातचीत करने की स्थिति में नहीं थी। वहीं जिला अस्पताल में 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधिका बाई का भी ऐसा ही हाल था, लेकिन उन्होंने 5 दिन में ही कोरोना से जंग जीत ली।

92 साल की तीजबती साहू की कहानी
जामुल नगर की रहने वाली 92 वर्षीय तीजबती साहू की तबीयत बिगड़ी तो 20 अप्रैल को उनका RT-PCR टेस्ट कराया। 24 अप्रैल को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी। इसके बाद उनका नाती उन्हें कोविड केयर सेंटर जामुल ले गया। यहां स्क्रीनिंग के दौरान 92 साल की तीजबती साहू का ऑक्सीजन लेवल 74 था। सीटी स्कोर 14/25 शुगर लेवल हाई व ब्लड प्रेशर लो था, बातचीत करने की स्थिति में नहीं थी। उन्हें तत्काल भर्ती कर डाक्टरों ने उन्हें तुरंत ऑक्सीजन देने का निर्देश दिया। उसके बाद इसे स्पेशल केस मानकर डाक्टरों की टीम बनाई गई। जिनकी विशेष देख रेख में महिला का इलाज हुआ। 12 दिनों के इलाज के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो कर वो अपने घर लौट गईं। डॉक्टर शाहिद अनवर ने बताया कि दादी का बेहतर इलाज व बेहतर देखरेख हमारी जिम्मेदारी थी। इन्हें हम स्पेशल केस के रूप में मान कर इलाज कर रहे थे।

90 साल की राधिका बाई की कहानी
जिला अस्पताल दुर्ग में 90 साल की राधिका बाई इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो गई है। उनको जिला अस्पताल में पांच दिन रखा गया। उन्हें हल्का इंफेक्शन था। किसी तरह की मार्बिडिटी नहीं थी। जब वे डिस्चार्ज हुईं तो पूरी तरह स्वस्थ थीं। और ऑक्सीजन लेवल 98 था। राधिका बाई का इलाज कर रहे डाक्टरों ने बताया कि अच्छी इम्यूनिटी होने की वजह से और मेडिसिन प्लान की वजह से उनकी रिकवरी तेजी से हुई है। राधिका बाई के परिजनों ने बताया कि जिला अस्पताल में बहुत अच्छा इलाज हुआ। हम लोग बहुत खुश हैं, और इन्हें घर ले जा रहे हैं।

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