कोरोना से बचाव की तैयारियों का सच:आरटीपीसीआर के लिए वायरोलॉजी लैब अटका, जिला अस्पताल में 18 उपकरण, मेडिकल कॉलेज में 16 मशीनों के लिए फंड नहीं

भिलाई3 दिन पहले
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जिला अस्पताल में हर रोज कोरोना की जांच के लिए लग रही लंबी कतारें, आरटीपीसीआर जांच नहीं हो पा रही। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल में हर रोज कोरोना की जांच के लिए लग रही लंबी कतारें, आरटीपीसीआर जांच नहीं हो पा रही।
  • निजी लैब पर निर्भर सरकारी सिस्टम, 3150 से ज्यादा सैंपलों की जांच रिपोर्ट अटकी

दुर्ग जिले के तीन ट्रू-नॉट सेंटरों में 1750 और रायपुर में भेजे 1400 सैंपलों की रिपोर्ट पेंडिंग स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही कोरोना संक्रमण के इस दौर में सामने आई है। जिला अस्पताल में केंद्र से मिले फंड के आधार पर करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से आरटीपीसीआर जांच के लिए वॉयरोलॉजी लैब तैयार की गई है। यहां करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से 18 उपकरणों की जरूरत है, जिसे नहीं लगाए जाने की वजह से लैब शुरू नहीं की जा सकी। इतना ही नहीं हेल्थ विभाग ने इसे शुरू करने में गंभीरता दिखाने के बजाए अधिग्रहित सरकारी मेडिकल कॉलेज के वॉयरोलॉजी लैब पर रुचि दिखाई।

बताया गया कि वहां की लैब पूरी तरह से तैयार है, अब खुलासा हुआ है कि वहां की लैब में भी करीब 22 लाख रुपए की लागत से 16 उपकरणों की जरूरत है। इस वजह से लैब को शुरू नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार तीसरी लहर की तैयारियों में बड़ी लापरवाही हेल्थ विभाग ने बरती। अब आनन-फानन में इसे शुरू करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। खबर है कि स्वास्थ्य विभाग के पास इतना फंड नहीं है कि वह दोनों में से किसी एक लैब को तत्काल शुरू करा सके। इस वजह से शासन से फंड जुटाए जाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

कोरोना संक्रमितों को इस बार सात दिन का होम आइसोलेशन दिया गया है, लेकिन दिक्कत यह है कि आरटीपीसीआर रिपोर्ट आने में 8 से 10 दिन लग रहे हैं। इसकी वजह से संक्रमितों को यह पता नहीं चल रहा है कि वे कोरोना पॉजिटिव थे या नहीं। अकेले दुर्ग जिले में ऐसे 3150 लोगों की रिपोर्ट नहीं आई है। तीसरी लहर की तैयारियों को लापरवाही सामने आई है।

डॉक्टरों व स्टॉफ पदस्थ किया, हर महीने 4.65 लाख खर्च
सालभर पहले जब जिला अस्पताल में वॉयरोलॉजी लैब शुरू किया गया तभी तीन डॉक्टर की पदस्थापना कर दी गई। डॉ. दामले सालभर पहले पदस्थ किए गए। तीन महीने पहले डॉ शशिकांत स्वर्णकार को पदस्थ कर नोडल अधिकारी बनाया गया। आशीष साहू सांइटिस्ट के तौर पर पदस्थ हुए। इनके अलावा चार लैब टेक्नीशियन वायरोलॉजी लैब के लिए पदस्थ किए गए। साइंटिस्ट व डॉक्टरों के हर महीने के वेतन पर 2 लाख 65 हजार रुपए खर्च हो रहे। टेक्नीशियनों का हर महीने का वेतन पर करीब 2 लाख रुपए। इस तरह 4.65 लाख खर्च हो रहे।

वॉयरोलॉजी लैब शुरू करने में यह लापरवाही : जिला अस्पताल में वायरोलॉजी लैब के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने सीजीएमएमसी के माध्यम से भवन निर्माण करवाया है। मशीनें सेंट्रल से आनी है। इसमें से कई मशीनें आ चुकी है। कुछ मशीनों की सप्लाई नहीं होने की वजह से यह रूका पड़ा है। सरकारी मेडिकल कालेज कचांदुर का सरकार ने अधिग्रहण कर लिया है। यहां पहले से ही वायरोलॉजी लैब हैं। कचांदुर लैब उपलब्ध होने की बात कह दी। यहां डॉक्टर और स्टाफ भी भेज दिए।

जांच की पेंडेंसी बढ़ी तो दो निजी लैब भेजे जा रहे सैंपल : कोरोना संक्रमण इस तेजी से बढ़ गया है कि अब एम्स व रायपुर मेडिकल कालेज ने भी दुर्ग जिले का सैंपल लेना बंद कर दिया है। 10 जनवरी से दुर्ग जिले का सैंपल रायपुर के लाइफ वर्थ लैब में सीधे भेजना शुरू किया गया है। उसके बाद भी सैंपल ज्यादा होने की वजह से श्रीशंकराचार्य हॉस्पिटल भिलाई के वायरोलॉजी लैब में आरटीपीसीआर भेजना शुरू किया गया है। इसके पहले 6 से 9 जनवरी तक के सैकड़ों सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है।

दस दिनों में 28945 लोगों ने दिए सैंपल
पिछले दस दिनों में बढ़ते संक्रमण के साथ ही लोग टेस्ट करवाने भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। 10 दिन में 28945 ने सैंपल दिए। जिसमें से 4225 संक्रमित निकले हैं।

हमारे पास तीन टू नाॅट मशीनें लेकिन यहां भी दिक्कतें, जानिए
दुर्ग भिलाई में पिछले पीक पर सरकार ने तीन टू नॉट मशीनें दी। यहां भी रिपोर्ट की पेंडेंसी 1750 सैंपल हैं। जिला अस्पताल टू नॉट सेंटर में 490, सेक्टर 6 सेंटर में 250 और सुपेला अस्पताल सेंटर में 990 सेंपल पेंडिंग हैं। यहां स्टॉफ की कमी है इसलिए केवल दुर्ग अस्पताल में दो शिफ्टों में जांच हो रही है। बाकी दोनों सेंटर में एक शिफ्ट में जांच हो पा रही है।

रायपुर भेजे जा रहे सैंपल, वहां पेंडेंसी ज्यादा, निजी की मदद ली

आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आठ-दस दिनों में भी नहीं आ रही है?
रायपुर में पेंडेसी ज्यादा थी। दुर्ग जिले के लिए एक निजी लैब को भेजने के निर्देश मिले हैं।
सात दिन का होम आइसोलेशन है और रिपोर्ट आए बिना मरीज खत्म कैसे मान लें?
इस समय का संक्रमण खतरनाक नहीं है। रिपोर्ट नहीं आया है तो भी सात दिन में संक्रमण समाप्त हो जाता है। उसके बाद यदि मरीज में लक्षण है तो तीन दिन और रह सकते हैं।
तीसरी लहर की चेतावनी के बाद भी वायरोलॉजी लैब शुरू नहीं कर पाए?
सीएम मेडिकल में वायराेलॉजी लैब पहले से था इसलिए वहां डॉक्टर व स्टॉफ भेजे। आज दौरा किया तो वहां भी उपकरणों की लिस्ट दी गई।

लगातार दूसरे दिन दो की मौत

सीएम हाउस में 24 स्टॉफ मेडिकल अफसर, तीन डॉक्टर सहित 813 केस

जिले में शुक्रवार को कोरोना संक्रमित दो लोगों की मौत हो गई। लगातार दूसरे दिन कोरोना संक्रमित की मौतें हुईं। तीसरी लहर में यह पांचवीं मौत है। इसके पहले तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 813 लोग कोरोना पॉजीटिव मिले हैं। जिसमें बीएसपी हॉस्पिटल के तीन डॉक्टर, निजी अस्पताल के तीन डॉक्टर शामिल हैं। भिलाई तीन स्थित मुख्यमंत्री निवास के 24 अधिकारी व कर्मचारी भी कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। भिलाई के 11 सीआईएसएफ जवान भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। नए मरीज मिलने के बाद जिले में तीसरी लहर 27 दिसंबर से अब तक कुल 5362 कोरोना मरीज मिल चुके हैं।
एक्टिव केस की संख्या 6102 हो गई, संक्रमण की रफ्तार भी बढ़ी
नए मरीज मिलने के बाद जिले में एक्टिव केस की संख्या 6102 पहुंच गई है। गुरुवार को एक्टिव केस 4216 थे। नए मरीज मिलने और 74 मरीज के स्वस्थ्य होने के बाद यह संख्या 6102 हो गई है। कोरोना से हुई दोनों मौत जिला अस्पताल में हुई है। 58 साल के शांतिनगर दुर्ग निवासी को कोरोना के इलाज के लिए दाखिल किया गया था। इसी तरह 43 वर्षीय बजरंग चौक भिलाई निवासी पुरूष की भी मौत हो गई। दुर्ग में छह पुलिस कर्मी कोरोना संक्रमित हो गए हैं।

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