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कोरोना के बाद सिस्टम की मार:दुर्ग में मरच्यूरी से शव लेना हो या फिर अस्पताल में ऑक्सीजन, बेड और वेंटिलेटर, हर जगह करना पड़ रहा इंतजार

भिलाई6 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिला कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है। इस बीच कोरोना संक्रमित मरीजों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही है। कोरोना की टेस्ट कराओ तो इंतजार, अस्पताल में बेड मिल जाए तो ऑक्सीजन, वेंटिलेटर का इंतजार और अगर मरीज की मौत हो जाए तो फिर मरच्यूरी से शव लेने का इंतजार। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों अब इस नई मुश्किल से दो-दो हाथ कर रहे हैं।

मरच्यूरी में जुट रही लोगों की भीड़

जिले में मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। हालात यह है कि कोरोना से मौत के बाद परिजनों को शव लेने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। जिले में अपनों के शव लेने के लिए परिजन को दर-दर भटकने को मजबूर है। आलम यह है कि दुर्ग मरच्यूरी में परिजनों की भारी भीड़ है। जहां हर दिन कोविड गाइडलाइन के नियमों का पालन भी हो पा रहा है।

दुर्ग मरच्यूरी के बाहर अपनों के शव लेने के लिए भीड़ जुट रही है।
दुर्ग मरच्यूरी के बाहर अपनों के शव लेने के लिए भीड़ जुट रही है।

जिले में करीब 23 से ज्यादा मौत हर रोज

हर रोज तकरीबन 1500 से ज्यादा लोग संक्रमित और 23 से ज्यादा की मौत हो रही है। हालात ऐसे हैं कि मरच्यूरी से मुक्तिधाम तक शव ले जाने के लिए परिजनों को इंतजार करना पड़ रहा है। मरच्यूरी के बाहर मौजूद अपनी पत्नी के शव को लेने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे बेबस पति ने बताया कि पहले कचांदुर अस्पताल में भर्ती कराया था, उसके बाद दुर्ग लेकर आए और 10 मिनट में ही जान चली गई। उन्होंने सही इलाज नहीं होने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि सरकारी अस्पताल में लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है और प्राइवेट अस्पताल वाले मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं।

वहीं मौजूद दूसरे परिजन अपनी बेटी के शव के लिए इंतजार में हैं। मृतक के परिजन सुरेंद्र देशपांडे बताते हैं कि हम घंटों से गिड़गिड़ा रहे हैं। मेरी बेटी की मौत कोरोना से हो गई थी। उसे किस गाड़ी से ले जाना है, कोई कुछ बताने को तैयार नहीं।

जिला अस्पताल के कोविड सेंटर में हर रोज मरीज भर्ती हो रहे हैं।
जिला अस्पताल के कोविड सेंटर में हर रोज मरीज भर्ती हो रहे हैं।

मरच्यूरी से शवों को भेजने की व्यवस्था
दुर्ग के नायब तहसीलदार नीलमणि दुबे ने बताया कि व्यवस्था पूरी है। 9 से 10 गाड़ियां पहले अस्पताल से शव लेकर आती हैं। उसके बाद यहां से मुक्तिधाम के लिए भेजा जाता है। अलग-अलग रूट में अलग-अलग गाड़ियां लगी है। इसलिए थोड़ा समय लगता है। दरअसल शवों की संख्या ज्यादा है। इसलिए हम एक साथ चार से पांच शव भेजते हैं। परिजन अकेले शव भेजने की मांग करते हैं। लेकिन हम रूट के हिसाब मुक्तिधाम भेजते हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा परिजनों के शव मुक्तिधाम पहुंच सके। परिजन दुखी हैं, पर व्यवस्था बनाने की कोशिश जारी है।

दुर्ग मरच्यूरी से एक साथ 3 से 4 शवों को भेजा रहा है। जिला प्रशासन ने व्यवस्था की है।
दुर्ग मरच्यूरी से एक साथ 3 से 4 शवों को भेजा रहा है। जिला प्रशासन ने व्यवस्था की है।

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन
दुर्ग जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर बाल किशोर ने बताया कि मरच्यूरी में अब शवों की संख्या ज्यादा नहीं है। लेकिन औसतन हर रोज 20 से ऊपर शव वहां पहुंचते हैं। पहले तो 30 से 40 शव मरच्यूरी में जाते थे। पिछले एक से दो दिन में थोड़ी राहत है।

जिले में कोरोना से मौत का आंकड़ा
कोरोना संक्रमण से जिले में मौत के आंकड़े डरा रहे है। पिछले 7 दिनों में 155 लोगो की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई है। यहां संक्रमण की दर 30 प्रतिशत है जो काफी अधिक है। कोरोना का संक्रमण शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रहा है। यह आंकड़े जिला प्रशासन हर रोज जारी करता है।

तारीखकोरोना से मौत
17 अप्रैल24
18 अप्रैल22
19 अप्रैल23
20 अप्रैल23
21 अप्रैल16
22 अप्रैल24
23 अप्रैल23
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