ऑक्सीजन प्लांट में 157 सिलेंडरों की कमी:कोविड अस्पताल से 157 नग ऑक्सीजन सिलेंडर गायब, इमरजेंसी में गड़बड़ाएगी सप्लाई व्यवस्था

राजनांदगांव6 दिन पहले
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  • लापरवाही }जिले के कोविड हॉस्पिटल के ऑक्सीजन प्लांट में कुल 278 सिलेंडर थे पर थर्ड वेव में 121 सिलेंडर का ही रिकॉर्ड मिल रहा
  • ऑक्सीजन रीफिलिंग करने वालों ने सेकंड वेव के दौरान सिलेंडर का इस्तेमाल किया... अब कहां गए? जवाब नहीं दे रहे

जिले में कोविड-19 कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य महकमे को मरीजों के इलाज के लिए मौजूद संसाधनों को तत्काल अपडेट करने की भी जरूरत पड़ रही है ताकि इमरजेंसी में व्यवस्था न लड़खड़ाए। कोविड हॉस्पिटल में भी मौजूद संसाधनों की सूची तैयार कर मिलान किया जा रहा ताकि पता चल सके कि आपातकाल में किन संसाधनों की कमी से व्यवस्था बिगड़ सकती है।

खबर है कि कोविड हॉस्पिटल के ऑक्सीजन प्लांट में 157 सिलेंडरों की कमी है जबकि यहां पर 278 सिलेंडर दिए गए थे। सिलेंडरों को रीफिलिंग करने वाले फर्मों ने उपयोग में लाया है पर तीसरी लहर आने के बाद भी सिलेंडर लौटाए नहीं गए हैं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से पेंडिंग राशि का भुगतान करने के साथ ही रिकॉ‌र्ड से गायब सिलेंडर को लौटाने के निर्देश दिए पर सप्लायर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सीजीएमएससी से मिले 30 और सिलेंडर

इधर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से कोविड हॉस्पिटल में 150 सिलेंडरों की सप्लाई की जानी है। सीएमएचओ कार्यालय की ओर से 30 सिलेंडर की खेप पहुंचाई गई है। शेष सिलेंडर भी जल्द दिए जाएंगे। हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से इमरजेंसी से निपटने के लिए सिलेंडरों का स्टॉक रखा जा रहा है पर पुराने सिलेंडर की गायब बताए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की डीन डॉ रेणुका गहने ने बताया कि रीफिलिंग करने वाले फर्म को पेंडिंग राशि का भुगतान कर दिया गया है। सिलेंडर की कमी के संबंध में अधीक्षक ही बता सकते हैं।

नए सिलेंडर दिए जाएंगे
अस्पताल प्रबंधन से सप्लायरों का पेंडिंग भुगतान भी कर दिया गया है। हाल ही में दोनों फर्मों को पेंडिंग राशि जारी कर दी गई है पर इनकी ओर से रिकॉर्ड से गायब सिलेंडर लौटाए नहीं गए हैं। दोनों फर्मों ने पेंडिंग राशि मिलने के बाद आश्वास्त किया है कि जल्द नए सिलेंडर खरीदकर कमी दूर करेंगे।
रिकॉर्ड ही नहीं रखा गया
दोनों फर्म को ही हॉस्पिटल में उपलब्ध सरकारी सिलेंडर सौंप दिया गया था ताकि समय पर ऑक्सीजन की सप्लाई करते रहे पर दोनों फर्मों की ओर से सरकारी सिलेंडर का िरकॉर्ड ही नहीं रखा गया है। अब जब कोविड की तीसरी लहर आई है तब हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से सिलेंडरों का रिकॉर्ड खंगाला गया तब पता चला है कि प्लांट में मौजूद 278 सरकारी सिलेंडरों में केवल 121 सिलेंडर ही उपलब्ध हैं और 157 सिलेंडर का कोई हिसाब-किताब सप्लायरों के पास नहीं है।

उपयोग में लाते जा रहे थे
कोविड की दूसरी लहर के दौरान जिले में ऑक्सीजन को लेकर आपाधापी की स्थिति बन गई थी। संक्रमित पाए जा रहे हर मरीज को ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ रही थी। कोविड हॉस्पिटल में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही थी। खपत को देखते हुए हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से एक नहीं बल्कि दो फर्मों को रीफिलिंग के लिए टेंडर दिया गया था। दोनों फर्मों की ओर से रीफिलिंग कर ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही थी। अब हिसाब-किताब खंगाल रहे हैं।

जेनरेटर फेल होने पर अतिरिक्त सिलेंडर की होती है जरूरत

कोविड हॉस्पिटल परिसर में ऑक्सीजन प्लांट संचालित हो रहे हैं। ऐसे में मैनुअल तरीके से ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ रही है। प्लांट से तैयार हो रहा ऑक्सीजन सीधे सेंट्रल सिस्टम से मरीजों के बेड तक पहुंच जा रहा है पर कोविड के केस बढ़ने और भर्ती मरीजों की संख्या में इजाफा होने पर प्लांट में भरे हुए अतिरिक्त सिलेंडर को रखना जरूरी है। दरअसल प्लांट के बंद हो जाने, जेनरेटर के फेल होने की स्थिति में अतिरिक्त सिलेंडर की ही जरूरत पड़ती है ताकि मरीज को समय पर ऑक्सीजन मिल सके। इसे ध्यान में रखते हुए पूरी सुविधाएं अपडेट की जा रही है।

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