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कोरोना से जंग में परेशानी:इलाज के अभाव में फिर 4 मरीजों की मौत, 20 वेंटिलेटर किसी काम के नहीं

राजनांदगांव10 दिन पहले
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  • इधर अधीक्षक कह रहे- महंगी दवाओं व स्टाफ की कमी
  • आईसीयू के अलावा सामान्य वार्ड में भर्ती मरीज भी दम तोड़ रहे
  • बसंतपुर अस्पताल में मृत मरीज की रिपोर्ट भी आई पॉजिटिव
  • कोरोना संक्रमितों की लगातार हो रही मौत से थर्राया जिला

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खुलने लगी है। कोविड अस्पताल में मरीज भगवान भरोसे हैं। यहां कृत्रिम सांस देने के लिए 20 वेंटिलेटर मशीनें हैं पर ये भी किसी काम के नहीं। इन्हें ऑपरेट करने एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी है। इमरजेंसी में मरीजों को वेंटिलेटर में रखा भी जा रहा है पर रिकवरी नहीं हो रही है। ये दम तोड़ दे रहे हैं। बुधवार को जिले में 224 नए मरीज मिले, वहीं 131 डिस्चार्ज हुए। वहीं बुधवार को ही कोविड अस्पताल में फिर चार कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। इनमें तीन नगर निगम सीमा क्षेत्र के रहने वाले हैं तो वहीं एक डोंगरगांव ब्लॉक का निवासी है। वहीं बसंतपुर अस्पताल में इलाज के दौरान मृत मरीज की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। लगातार हो रही मौत पर अधीक्षक डॉ प्रदीप बेक ने महंगी दवाइयों की कमी और स्टॉफ नहीं होने का रोना रोया। कोरोना संक्रमितों की मौत पर परिजनों की ओर लगातार डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है। परिजन हैरान हैं कि आखिर मरीजों की हालत कोविड अस्पताल में जाने के बाद कैसे बिगड़ रही है। बल्देवबाग निवासी एक महिला को उल्टी की शिकायत होने पर परिजनों ने 6 दिन पहले बसंतपुर अस्पताल में भर्ती कराया था। सैंपल जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टरों ने कोविड अस्पताल शिफ्ट कर दिया। यहां भर्ती होने के बाद महिला का दो दिन तक इलाज चला और बुधवार सुबह मौत की खबर आ गई।

डॉक्टर ध्यान नहीं दिए हालत बिगड़ती गई
रिद्धि सिद्धि कॉलोनी निवासी बुजुर्ग के कोरोना संक्रमित होने पर कोविड अस्पताल में इलाज चल रहा था। इनकी भी मौत हो गई। इसी तरह कोरोना संक्रमण से नंदई चौक निवासी एक व्यक्ति की भी मौत हो गई है। वहीं डोंगरगांव ब्लॉक के एक व्यक्ति की भी कोरोना से मौत हुई है। बताया कि उक्त मरीज की लगातार हालत बिगड़ती जा रही थी पर डॉक्टर ध्यान ही नहीं दे रहे थे। बुधवार की शाम मरीज ने दम तोड़ दिया।

मौत किन परिस्थितियों में हुई यह नहीं बता रहे
कोरोना संक्रमित की मौत होने पर परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए प्रोटोकाल के तहत शव ले जाने की जानकारी दी जा रही है पर यह नहीं बताया जा रहा है कि मरीज की किन परिस्थितियों में मौत हुई। कोई रिपोर्ट भी परिजनों को नहीं दे रहे हैं। इससे कोरोना से मृत मरीजों के परिजनों में रोष है।

आईसीयू का यह है हाल
आईसीयू में मरीजों को 24 घंटे अब्जर्वेशन में रखना है। 50 बेड के आईसीयू में हर शिफ्ट तीन सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी जरूरी है। इनके साथ दो जूनियर और अनुभवी नर्सेस का होना जरूरी है पर वर्तमान में एक सीनियर, दो जूनियर और दो नर्सेस यहां ड्यूटी कर रहीं हैं। सीनियर डॉक्टर इमरजेंसी कॉल में ही यहां पहुंच रहे हैं। जबकि हर पल मरीजों को नजर में रखना है।

तकनीशियनों की कमी
मरीजों की सेवा करने रिस्क लेकर कोविड अस्पताल पहुंचे परिजनों ने बताया कि हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर की भी सुविधा नहीं दी जा रही है। बताया गया कि यहां प्रधानमंत्री कोविड केयर फंड से वेंटिलेटर उपलब्ध कराया गया है पर इसे ऑपरेट करने तकनीशियनों की कमी है। इसके चलते मरीज सांस लेने की परेशानी के बीच दम तोड़ रहे हैं। बावजूद अफसर गंभीर नहीं हैं।

रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं डॉक्टर व स्टाफ की कमी
अधीक्षक डॉ. प्रदीप बेक का कहना है कि ज्यादातर मरीज दूसरे बीमारी से पीड़ित हैं। निमोनिया की शिकायत वाले मरीजों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। लंग्स में प्राब्लम होने से ऑक्सीजन लेवल डाउन हो रहा है। अधीक्षक का कहना है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन महंगा होने से इसकी कमी बनी हुई है। रायपुर से यह इंजेक्शन मंगाते हैं। डॉक्टर, स्टाफ की कमी भी है।

दिनभर इंतजार कराने के बाद भी नहीं दिया शव
डोंगरगांव क्षेत्र के जिस मरीज की कोरोना से मौत हुई उसके परिजन दिनभर शव के इंतजार में बैठे रहे। बताया गया कि सुबह 9 बजे के आसपास मरीज ने दम तोड़ा पर देर शाम तक शव नहीं दिया गया। परिजनों को डॉक्टर यही बताते रहे कि एक-दो घंटे में शव दे दिया जाएगा पर देखते-देखते शाम हो गयी। एसडीएम दफ्तर बंद होने की वजह बताकर शव सुबह ले जाने कह दिया।

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