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बदलाव के 9 मोड़:छुईखदान-बकरकट्‌टा के बीच तीन पहाड़ियों को काटकर बनाया रास्ता, नक्सलगढ़ में सुरक्षा मजबूत, इससे लोगों को राहत मिलेगी

राजनांदगांव9 दिन पहलेलेखक: संदीप साहू
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राजनांदगांव के छुईखदान-बकरकट्‌टा मार्ग पर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 3 साल से चल रहा सड़क बनाने का काम पूरा हो चुका है। जंगल और पहाड़ों से गुजरती दिख रही यह सर्पीली सड़क छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित कॉरिडोर में बदलाव का अहम माध्यम बनेगी। तीन पहाड़ियों को काटकर बनी 12.70 किमी लंबी सड़क पर 2.5 किमी के हिस्से में घाटी पड़ती है, जहां यह सड़क हेयरपिन जैसे 9 तीखे मोड़ से गुजरती है। सड़क बनने से छुईखदान से बकरकट्‌टा की दूरी अब 90 किमी की जगह 34 किमी रह गई है। साथ ही मप्र का बालाघाट सीधे जुड़ गया है।

शुरुआती दौर में यहां 100 जवानों की एक बटालियन के बीच काम होता था। बाद में बुढ़ानभाठ में आईटीबीपी का एक कैंप बन गया। सड़क की चौड़ाई 3.75 मीटर है लेकिन ढाई किमी की घाटी में इसे 7.75 मीटर चौड़ा रखा गया है ताकि आवाजाही में दिक्कत न हो। लागत करीब 46 करोड़ रुपए है। इसमें 46 पुल-पुलिया हैं।

हेयरपिन जैसे दिखने वाले मोड़ से अब राहत
यह रास्ता बनने के बाद छुईखदान से बकरकट्‌टा जाने के लिए अब नर्मदा, साल्हेवारा की ओर नहीं जाना होगा। इससे समय और ईंधन की भी बचत होगी। देवरच्चा, कुम्हरवाड़ा, बकरकट्‌टा, साल्हेवारा, बसंतपुर, तेंदूभांठा, सरोधी, गेरूखदान, आमगांव, जामगांव जैसे गांव अब सीधे छुईखदान और खैरागढ़ मुख्यालय से जुड़ गए। बारिश में आवाजाही में दिक्कत से भी लोगों को निजात मिल जाएगी।

1. जोड़ने का रास्ता: तीन पहाड़ों को काटकर यह रास्ता बना। अब यह मध्यप्रदेश के बालाघाट से सीधे जुड़ गया।
2. नक्सल कॉरीडोर टूटेगा: इस सर्पीली सड़क से छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश का नक्सल कॉरीडोर टूटेगा।
3. दूरी घटी: छुईखदान से बकरकट्‌टा जाने के लिए अब 90 किमी की जगह महज 34 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी।
4. बढ़ा विश्वास, सुरक्षा: जवानों ने दिन-रात काम किया, रास्ता बना। आईटीबीपी का कैंप बनने के बाद सुरक्षा बढ़ गई है।
5. मुश्किलें होंगी कम: इस रास्ते पर सेतु निगम की ओर से 35 पुलिया, छह मध्यम और पांच बड़े पुल भी बनाए गए हैं।
6. पैनी नजर रहेगी: सड़क की चौड़ाई 3.75 मीटर है लेकिन ढाई किमी की घाटी में इसे 7.75 मीटर चौड़ा रखा गया है।
7. मेडिकल इमरजेंसी: छुईखदान तक आने के लिए 25 गांव के 10 हजार लोग बारिश में कट जाते थे। अब सीधे आ सकेंगे।
8. 46 करोड़ की लागत: इस पूरे रास्ते को बनाने में जवानों की मेहनत तो लगी ही, लागत 46 करोड़ रुपए की आई।
9. कान्हा तक पहुंच: अब साल्हेवारा घाटी से नहीं जाना पड़ेगा, कान्हा किसली तक 65 की बजाए 46 किमी जाना होगा।

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