आओ गुरमुखी सीखें / वाट्सएप ग्रुप बनाकर बच्चों को सिखा रहे हैं गुरबानी और सिखों का इतिहास, कुवैत, यूएस, आस्ट्रेलिया के बच्चे भी जान रहे अपनी संस्कृति

By creating a WhatsApp group, children are teaching Gurbani and the history of Sikhs, children of Kuwait, US, Australia are also knowing their culture
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By creating a WhatsApp group, children are teaching Gurbani and the history of Sikhs, children of Kuwait, US, Australia are also knowing their culture

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:00 AM IST

राजनांदगांव. कोरोना वायरस ने सभी धर्मस्थलों पर ताला जड़़ दिया है। स्कूलें बंद हैं और समर क्लासेंस भी इस साल नहीं हो सकी। लॉकडाउन के चलते बच्चों को घरों पर रहना पड़ रहा है, लेकिन इसी समस्या को शहर के सिख समाज ने एक बड़े अवसर में तब्दील कर दिया। स्कूलों की छुट्टियों के बाद कभी गुरुद्धारे में लगने वाली धार्मिक शिक्षा की कक्षा अब ऑनलाइन इंटरनेशनल क्लास में बदल गई है। जहां शहर, जिला, राज्य ही नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे सिख समाज के बच्चे भी अपनी संस्कृति और परंपरा सहित अपने महान इतिहास की शिक्षा ले रहे हैं।
सिख समाज ने बैसाखी के दिन से ये अनूठी पहल की। 13 अप्रैल को एक वाट्सएप ग्रुप बनाया गया। जिसमें घरों पर ही रहकर बच्चों को धर्म, परंपरा, संस्कृति और सिख इतिहास की शिक्षा देने की शुरुआत की गई। इस ग्रुप का नाम आओ गुरमुखी सीखें रखा गया। इसमें समाज के बच्चों को गुरबानी, गुरमुखी भाषा, शबद सहित गुरु ग्रंथ साहेब की शिक्षा दे रहे हैं। ये ग्रुप बच्चों सहित हर उम्र के लोगों के लिए कारगर साबित हो रहा है। लॉकडाउन में घर पर ही समाज के बच्चे, युवा व महिलाएं अपनी संस्कृति का पाठ पढ़ रहे हैं।   
शहर से हुई शुरुआत, अब विदेशों के भी बने सदस्य 
वाट्सएप ग्रुप की शुरुआत शहर के बच्चों व युवाओं के लिए की गई, अब इसमें विदेशों से भी सिख परिवार जुड़ने लगे। गुरुद्धारा कमेटी के जीएस भाटिया ने बताया कि पहले ग्रुप में शहर के अलावा डोंगरगढ़, दुर्ग, भिलाई, रायपुर और बिलासपुर के सदस्य शामिल थे। इसके बाद महराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, पंजाब के साथ अब कुवैत, यूएस, आस्ट्रेलिया तक के सिख परिवार सदस्य बन गए हैं। विदेशों में रह रहे सिख परिवार के बच्चे भी इस ग्रुप के माध्यम से अपनी संस्कृति की शिक्षा ले रहे हैं। 
छोटे-छोटे वीडियो से होती है प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
गुरमुखी भाषा की जानकारी सभा की बलजीत कौर भाटिया द्वारा दी जाती है। छतरवीर सिंह भाटिया और भूपिंदर सिंह सलूजा गुरबानी, तरनजीत सिंह टुटेजा और वर्षा कौर बग्गा सिख इतिहास की जानकारी विभिन्न छोटे-छोटे वीडियो एवं अन्य सामग्री से ग्रुप में देते हैं। इनका उत्तर बच्चे वीडियो या नोट्स की फोटो खींचकर देते हैं। क्लास के बाद रोज प्रश्न-उत्तर का भी दौर चलता है। पूछे गए प्रश्नों के जवाब बच्चे अपने वीडियो के माध्यम से ग्रुप में पोस्ट करते हैं। 

लॉकडाउन ने बना दिया इंटरनेशनल क्लास 
सीएस भाटिया ने बताया कि हर साल धार्मिक कक्षाएं गुरुद्वारे में लगती। पहले ये कक्षाएं तीन दिन होती और इसमें शहर के ही बच्चे शामिल हो पाते। लेकिन वाट्सएप ग्रुप पर ऐसी शुरुआत ने गुरुद्वारे की ये क्लास अब इंटरनेशनल क्लास में तब्दील हो गई है। अब 171 सदस्य इस ग्रुप से जुड़े हुए हैं। लगातार सदस्यों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों के साथ युवा और परिवार के वरिष्ठ सदस्य भी इसमें पहले से अधिक समय दे रहे हैं। बच्चों को अपनी संस्कृति और इतिहास के बारे में बता रहे हैं। 

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