पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अन्नदाता से खिलवाड़:2 बैग खाद देकर पोर्टल में दर्ज कर रहे 12 बैग एसएमएस से खुल गया सोसाइटी का फर्जीवाड़ा

राजनांदगांव2 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
मटेवा की सोसाइटी में खाद के लिए रोजाना क्षेत्र के किसानों की भीड़ जुट रही है। - Dainik Bhaskar
मटेवा की सोसाइटी में खाद के लिए रोजाना क्षेत्र के किसानों की भीड़ जुट रही है।
  • मोहला ब्लॉक की मटेवा सोसाइटी में सामने आया मामला
  • खाद खरीदी की मैनुअल रसीद भी नहीं दे रहे

खाद के नाम पर किसानों से खिलवाड़ होने लगा है। पहले ही जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, उस पर अब किसान जितना खाद खरीद रहे हैं, उससे अधिक की खरीदी ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज हो रही है। इसका खुलासा तब हुआ जब कुछ जागरूक किसानों ने अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में आए एसएमएस को देखा । ये एसएमएस खाद खरीदी और बायो मैट्रिक्स थंबिंग के बाद किसानों के नंबर पर पहुंचती है।

जिसमें खाद के खरीदी की मात्रा, कुल रकम और सब्सिडी की जानकारी होती है। ऐसे ही कुछ मैसेज को जब किसानों ने पढ़ा तो पता चला कि उन्होंने जितना खाद सोसाइटी से खरीदा है, उससे कहीं अधिक की जानकारी एसएमएस के माध्यम से दी गई है। इसके बाद किसानों ने एक दूसरे से जानकारी लेनी शुरू की।

जिसमें सामने आया कि मोहला इलाके के 15 से 20 किसानों के साथ अब तक ऐसा हो चुका है, जैसे जैसे किसानों को इसकी जानकारी हो रही है, वह रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में पहुंचे एसएमएस को देख रहे हैं। आमतौर पर किसान इस तरह के एसएमएस को गंभीरता से नहीं लेते थे। लेकिन कुछ किसानों की जागरूकता के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

जानिए, इस तरह हो रही राजनांदगांव जिले के किसानों से धोखाधड़ी

केस 1: मोहला ब्लॉक के गिधाली के किसान मनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने मटेवा सोसाइटी से दो बोरी यूरिया खरीदी है। लेकिन मोबाइल में जो एसएमएस आया है उसमें 16 बोरी यूरिया, 2 बोरी डीएसपी, 7 बोरी पोटाश खरीदने की जानकारी है। खरीदी की कुल राशि 13664 और सब्सिडी 4547 रुपए बताया गया है। जबकि उन्होंने इतनी खरीदी की ही नहीं हैं।

केस 2: ग्राम गिधाली के ही किसान सीताराम ने बताया कि उन्होंने सोसाइटी से सिर्फ 2 बोरी यूरिया की खरीदी की है। लेकिन उन्हें 12 बोरी यूरिया, 3 बोरी डीएपी और 6 बोरी पोटाश खरीदी की जानकारी एसएमएस से भेजी गई है। उन्होने बताया कि इसकी कुल रकम 12798 रुपए होना बताया गया है। जबकि उन्होंने सिर्फ 2 बोरी यूरिया ही खरीदी है।

केस 3: मोहला ब्लॉक के ही ग्राम कंगलूटोला के मनक लाल ने बताया कि उन्हें भी 12 बोरी यूरिया, 3 बोरी डीएसपी और 6 बोरी पोटाश के खरीदी की जानकारी भेजी गई है। जबकि उन्हें बमुश्किल सिर्फ 2 बोरी यूरिया ही मिल सका है। खरीदी की कुल रकम 12798 और सब्सिडी 5455 रुपए दिए जाने की जानकारी मोबाइल में आए एसएमएस में हैं।

अब एक-दूसरे से पूरी जानकारी ले रहे किसान

खाद खरीदी में इस तरह की धांधली का मामला मोहला ब्लाक के मटेवा सोसाइटी से सामने आया है। मटेवा सोसाइटी में किसानों ने कुछ दिन पहले जमकर हंगामा भी मचाया था और खाद नहीं मिलने पर देर रात तक धरना भी दिया गया था। अब एक सोसाइटी से मामला सामने आने के बाद किसान दूसरे सोसाइटियों के किसानों से भी जानकारी जुटा रहे हैं। गुरुवार को किसान मामले की शिकायत एसडीएम व कलेक्टर से करने की तैयारी में हैं ।

थंब इंप्रेशन के बाद सीधे खाद उपलब्ध करा रहे

पूरे मामले का खुलासा इसलिए भी नहीं हो पा रहा था कि सोसाइटी से हो रही खाद खरीदी की मैनुअल रसीद भी नहीं दी जा रही है। मटेवा सोसाइटी के किसानों ने बताया कि उन्हें थंब इंप्रेशन के बाद सीधे खाद उपलब्ध करा दी जा रही है। खास बात यह है कि खाद की खरीदी के लिए किसानों को नगद रुपए नहीं देना होता, उक्त राशि उन्हें मिलने वाले कर्ज में शामिल होता है।

किसानों की खाद खुले बाजार में बेचने की साजिश

मामले को लेकर कुछ जानकार किसानों ने बताया कि ये पूरी साजिश किसानों के हिस्से के खाद को खुले बाजार में बेचने का है। दरअसल किल्लत की स्थिति में किसान बाजार से जरूरत के मुताबिक खाद की खरीदी कर लेते हैं। जब सोसाइटी में खाद पहुंचती है तो उनकी जरूरत भी कम हो जाती है। ऐसे में वे अपने तय कोटे से कम खाद खरीदते हैं। लेकिन फर्जी खरीदी दिखाकर रिकार्ड मेंटेन कर लिया जाता है।

सरकारी आंकड़े दुरुस्त करने में भी मिलती है मदद

सोसाइटियों में खाद की किल्लत हर साल रहती है। जमीनी स्तर पर किसानों को परेशान होना पड़ता है। लेकिन सरकारी आंकड़े में किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराया जाना दिखा दिया जाता है। आंकड़े दुरुस्त करने में इसी तरह के फर्जी खरीदी की अहम भूमिका रहती है।

मुझे जानकारी नहीं, जांच के बाद ही कुछ बता पाउंगा

​​​​​​इसके संबंध में मुझे जानकारी नहीं थी, अगर ऐसा हो रहा है तो मैं इसकी पूरी जानकारी सोसाइटी से लेता हूं। इसकी जांच के बाद भी कुछ बता पाउंगा। -सुनील वर्मा, सीईओ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक

खबरें और भी हैं...