पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

गणेशोत्सव:100 साल पुरानी गणेशोत्सव की परंपरा की चेन टूट रही, मूर्तिकारों के पास ऑर्डर ही नहीं

राजनांदगांवएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • कोरोना वायरस केे संक्रमण को देख समितियों ने उत्सव की तैयारी शुरू नहीं की
  • नुकसान झेल रहे: दो माह पहले तैयारी में जुटते थे, अभी संकट

शहर की पहचान हॉकी और झांकी से है। झांकी यानी की गणेशोत्सव की चर्चा तो देशभर में होती है पर इस बार 100 से पुरानी इस परंपरा पर कोरोना वायरस साया मंडरा रहा है। इस वजह से सालों पुरानी इस परंपरा की चेन टूट रही है। गणेशोत्सव को डेढ़ माह शेष बचे हैं पर मूर्तिकारों के घरों में सन्नाटा पसरा है। पहले की तरह इनके पास ऑर्डर ही नहीं आ रहे हैं। समितियों ने तो तैयारी ही शुरू नहीं की है। ये असमंजस में हैं कि आखिर इस बार क्या करें। कुछ समितियों ने तो तय किया है कि प्रशासन की अनुमति बाद सिर्फ बप्पा की मूर्ति रखेंगे। स्थल सजावट और झांकी नहीं निकालेंगे। 
गणेशोत्सव के एक से डेढ़ माह पहले ही तैयारी शुरू हो जाती थी। बड़ी समितियां मूर्तिकारों के संपर्क में रहते थे और अपनी पसंद के अनुसार बड़ी मूर्तियां तैयार करवाते थे। शहर में समितियों की टोली जन सहयोग जुटाने निकल पड़ती थी पर इस बार कोरोना महामारी की वजह से सारे लोग घर तक सीमित हैं। 
मूर्तिकारों ने कहा- प्रशासन से हम गाइडलाइन मांगेंगे 
मूर्तियों का ऑर्डर नहीं मिलने से आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे मूर्तिकारों ने मूर्तिकार संघ के बैनर तले हुई बैठक ली। इसमें तय किया कि प्रशासन ने मूर्तियों के आकार को लेकर गाइडलाइन मांगेंगे। संघ के अध्यक्ष देवा रंगारी ने बताया कि गणेशोत्सव में शहरभर में लगभग 25 से 30 लाख का कारोबार होता होगा पर इस बार संकट है। 

भीड़ से बचने के लिए स्टॉल उपलब्ध कराने की मांग 
मूर्तिकार संघ की ओर से मांग रखी गई है कि किसी एक जगह पर सभी मूर्तिकारों को स्टॉल उपलब्ध कराया जाए जहां पर सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मूर्ति बेच सकेंगे। इससे बाजार में भीड़ नहीं लगेगी। बताया कि प्रशासन से गाइडलाइन मांग रहे हैं कि पंडालों की मूर्तियां कितनी ऊंची बना सकते हैं। इससे हमें भी सुविधा होगी। 

इधर, बड़ी मूर्तियां बनाकर असमंजस में हैं मूर्तिकार
पड़ोसी जिले दुर्ग के थनौद गांव से ज्यादातर बड़ी मूर्तियां शहर आती हैं। यहां कलाकार हर साल की तरह बड़ी मूर्तियां बना चुके हैं पर अब बाजार ठंडा होने से चिंता में डूबे हैं। मूर्तिकार राधे लाल ने बताया कि मूर्तियां बनाने का प्रोफेशनल वर्क है। इसलिए पहले से मूर्तियां बनाकर रखते हैं पर अब भारी नुकसान होने वाला है। 

रौनक नहीं होने से लाखों के कारोबार पर भी असर 
व्यवसायी रोशन गोलछा ने बताया कि गणेशोत्सव के चलते शहर में 11 दिन की रौनक रहती है। इससे कारोबार भी अच्छा होता है। कोरोना की वजह से रौनक नहीं रहेगी। इसलिए व्यवसायियों को नुकसान होगा। अनुमान है कि उत्सव के बीच 11 दिनों में 7 से 8 लाख का  कारोबार होता रहा होगा।  लेकिन इस बार मायूसी है। 

समिति पदाधिकारियों का क्या है कहना...
नवरत्न मंडल: समिति के पदाधिकारी अजय खंडेलवाल का कहना है कि प्रशासन के गाइडलाइन अनुसार मूर्ति रखेंगे। झांकी नहीं निकालेंगे। जल्द समिति की बैठक में प्लानिंग की जाएगी।
बाल समाज: समिति के पूर्व अध्यक्ष दामू भूतड़ा ने बताया कि समिति 100 से मूर्ति रख रही है। इस बार पंडाल की अनुमति मिलेगी तब बाहर मूर्ति रखेंगे या फिर मंदिर या किसी के घर पर रखकर पूजा करेंगे।
सुमति मंडल: समिति के कोषाध्यक्ष नंदकिशोर अग्रवाल ने बताया कि 90 साल से मूर्ति रख रहे हैं पर इस बार असमंजस की स्थिति में हैं। झांकी निकालना मुश्किल लग रहा है। प्रशासन की गाइडलाइन का पालन होगा। आगे जो नियम तय किया जाएगा उसी के मुताबिक ही कम करेंगे। 

0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव- धार्मिक संस्थाओं में सेवा संबंधी कार्यों में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। कहीं से मन मुताबिक पेमेंट आने से राहत महसूस होगी। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और कई प्रकार की गतिविधियों में आज व्यस्तता बनी...

और पढ़ें