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रणनीति:धान खरीदी में अव्यवस्था, भाजपा विधानसभा क्षेत्रों में करेगी प्रदर्शन

राजनांदगांव2 महीने पहले
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  • 13 जनवरी को आयोजन, 2-2 हजार से अधिक कार्यकर्ता जुटाने का लक्ष्य

राज्य सरकार की वादाखिलाफी और धान खरीदी की अव्यवस्था को लेकर भाजपाइयों का प्रदर्शन शुरू होगा। 13 जनवरी को विधानसभा स्तरीय प्रदर्शन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस संबंध में प्रमुख पदाधिकारियों व मंडल अध्यक्षों की बैठक गुरुवार को जिला संगठन प्रभारी संजय श्रीवास्तव ने ली। उन्होंने सभी स्थानों पर कम से कम दो हजार कार्यकर्ताओं की उपस्थिति की लिए लक्ष्य दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि सभी सभाओं में किसानों को भी शामिल किया जाए। संगठन प्रभारी संजय ने बताया कि दो साल में विफलता के सारे कीर्तिमान कांग्रेस की सरकार ने रचे हैं। यह सरकार किसान विरोधी है। लगातार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। पिछले वर्ष के धान की कीमत का पूरा भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। वर्तमान में भी 20 दिन बीत जाने के बाद भी किसानों के खाते में पैसा नहीं आ पाया है। पूर्व में भाजपा की सरकार में तीन से चार दिनों में ही और कभी-कभी तो 24 घंटे में किसानों के घर पहुंचने से पहले अकाउंट में राशि पहुंच जाती थी।

खरीदी से बचना चाह रहे
श्रीवास्तव ने पत्रकारवार्ता लेकर कहा कि यह सरकार बारदाना के नाम पर घोटाला कर रही है। उसके बहाने धान खरीदी से बचना चाहती है। विधानसभा में जवाब देते हुए सरकार ने कहा था कि प्रदेश में इस सीजन में कुल चार लाख 45 हजार गठान की जरूरत होती है। इसमें से 3 लाख 30 हजार बारदाना उपलब्ध है, एक लाख 15 हजार गठान अतिरिक्त बारदाने की जरूरत होगी। समय रहते उससे संबंधित कुछ भी नहीं किया गया। आज हालात ऐसे हैं कि किसान खुद 30 रुपए तक का बारदाना खरीदने के लिए मजबूर हैं। किसानों की परेशानी बढ़ रही है।

गिरदावरी रिपोर्ट के जरिए रकबा कम करने का षड़यंत्र
किसानों की गिरदावरी रिपोर्ट के माध्यम से रकबा कम करने का षड़यंत्र किया जा रहा है। इसके पीछे धान खरीदी से बचने की साजिश है। यही मंशा है कि सरकार कम धान खरीदे। इसका बड़ा उदाहरण है कि रकबा कम होने के कारण खुद कांग्रेस अध्यक्ष क्षेत्र के किसान धनीराम ने आत्महत्या की। किसान आत्महत्या करने मजबूर हैं। प्रदेश की सरकार संवेदनहीन सरकार है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 233 किसानों और खेतिहरों ने 2019 में आत्महत्या की है। ऐसे किसानों को 25 लाख रुपए तक मुआवजा देने मांग रखी।

इधर अब तक कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो पाई
जिला भाजपा की कार्यकारिणी की सूची अटक गई है। दो बार स्वयं संगठन प्रभारी बैठक ले चुके हैं। बावजूद अब तक जिला भाजपा की कार्यकारिणी की सूची जारी नहीं हो पाई। प्रदेश प्रभारी की टाइमलाइन भी समाप्त हो चुकी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो कुछ नामों पर विवाद की स्थिति है। यहां तक राज्य स्तर पर सूची भी भेजी जा चुकी है। हालांकि अंतिम मुहर अब तक नहीं लग पाई है। खासकर महामंत्री पद के लिए पेंच फंसा हुआ बताया जा रहा है।

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